सिद्धार्थनगर में बाल श्रम और बंधुआ मजदूरी पर सख्ती, मानवाधिकार आयोग के स्पेशल मॉनिटर के कड़े निर्देश | Webvarta

सिद्धार्थनगर, सन्दीप पाण्डेय | वेब वार्ता

उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले में बाल श्रम और बंधुआ मजदूरी के खिलाफ प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए शून्य सहनशीलता की नीति लागू करने के संकेत दिए हैं। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के स्पेशल मॉनिटर धनंजय टिंगल के दौरे के दौरान इस दिशा में कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए गए।

जनपद मुख्यालय स्थित रेस्ट हाउस में आयोजित समीक्षा बैठक में जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन, पुलिस अधीक्षक डॉ. अभिषेक महाजन, मुख्य विकास अधिकारी बलराम सिंह, सहायक श्रम आयुक्त सचिन कुमार सिंह सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।

मानवाधिकार उल्लंघन पर जीरो टॉलरेंस नीति

बैठक के दौरान स्पेशल मॉनिटर ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बाल श्रम और बंधुआ मजदूरी मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन है और ऐसे मामलों में किसी भी स्तर पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

उन्होंने निर्देश दिया कि दोषियों के विरुद्ध कठोरतम कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, साथ ही पीड़ित बच्चों के पुनर्वास, शिक्षा और कौशल विकास को प्राथमिकता दी जाए।

संयुक्त टीमें चला रहीं नियमित अभियान

जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन ने बताया कि श्रम विभाग, पुलिस और प्रशासन की संयुक्त टीमें लगातार छापेमारी अभियान चला रही हैं।

ईंट-भट्ठों, निर्माण स्थलों, ढाबों, कारखानों और अन्य संदिग्ध प्रतिष्ठानों की नियमित जांच की जा रही है, ताकि किसी भी स्तर पर बाल श्रम की गतिविधियों को रोका जा सके।

पुलिस की अपील: सूचना दें, पहचान गोपनीय रहेगी

पुलिस अधीक्षक डॉ. अभिषेक महाजन ने आम नागरिकों से अपील की कि यदि कहीं भी बाल श्रम या बंधुआ मजदूरी का मामला सामने आए, तो उसकी सूचना तत्काल प्रशासन को दें।

उन्होंने भरोसा दिलाया कि सूचना देने वालों की पहचान गोपनीय रखी जाएगी और त्वरित कार्रवाई की जाएगी।

मैदानी अधिकारियों को सक्रिय भूमिका के निर्देश

बैठक में यह भी निर्देश दिया गया कि खंड विकास अधिकारी, उपजिलाधिकारी, तहसीलदार और खंड शिक्षा अधिकारी बाल श्रम से जुड़े मामलों में सक्रिय भूमिका निभाएं।

सभी अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि अपने-अपने क्षेत्रों में निरंतर निगरानी रखें और किसी भी शिकायत को गंभीरता से लें।

एनजीओ की भूमिका पर विशेष जोर

स्पेशल मॉनिटर ने गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) से भी सक्रिय सहयोग की अपेक्षा जताई।

उन्होंने कहा कि मुक्त कराए गए बच्चों का पुनर्वास, शिक्षा और सामाजिक पुनर्स्थापन एनजीओ की मदद से और अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है, ताकि वे दोबारा श्रम में न लौटें।

मुक्त कराए गए बच्चों से की मुलाकात

बैठक के समापन के बाद स्पेशल मॉनिटर ने बाल श्रम से मुक्त कराए गए तीन बच्चों और उनके परिजनों से मुलाकात की।

उन्होंने बच्चों की वर्तमान स्थिति, शिक्षा और पारिवारिक परिस्थितियों की जानकारी ली और हर संभव सहायता का भरोसा दिलाया।

प्रशासन की प्राथमिकता: सुरक्षित बचपन

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि बच्चों का सुरक्षित बचपन, सम्मानजनक जीवन और शोषण से मुक्ति सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।

अधिकारियों ने कहा कि इस दिशा में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

निष्कर्ष

सिद्धार्थनगर में हुई यह समीक्षा बैठक बाल श्रम और बंधुआ मजदूरी के विरुद्ध प्रशासनिक प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

यदि निर्देशों का प्रभावी क्रियान्वयन हुआ, तो यह जिले में बाल अधिकारों की सुरक्षा की दिशा में एक मजबूत कदम साबित होगा।

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