नई दिल्ली, वेब वार्ता | संवाददाता
गूगल के मुख्य कार्यपालक अधिकारी सुंदर पिचाई ने कृत्रिम मेधा (एआई) को ‘‘तीव्र प्रगति’’ के युग की शुरुआत करने वाली प्रौद्योगिकी करार देते हुए कहा है कि इसमें नई वैज्ञानिक खोजों को संभव बनाने और उभरती अर्थव्यवस्थाओं को विकास के पारंपरिक चरणों से आगे ले जाने की अपार क्षमता है।
उन्होंने कहा कि अब तक किसी भी तकनीक ने उन्हें एआई जितना बड़े सपने देखने के लिए प्रेरित नहीं किया है।
इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट में दिया संबोधन
‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट’ को संबोधित करते हुए गूगल और अल्फाबेट के सीईओ ने एआई के लिए एक महत्वाकांक्षी वैश्विक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया।
उन्होंने एआई को ‘‘हमारे जीवनकाल का सबसे बड़ा बदलाव’’ बताते हुए सरकारों, कंपनियों और संस्थानों से इस तकनीक को साहस और जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ाने का आग्रह किया।
जिम्मेदारी के साथ विकास जरूरी
सुंदर पिचाई ने कहा, ‘‘यह हमारे जीवनकाल का सबसे बड़ा वैश्विक बदलाव है। हम नई खोजों और तीव्र प्रगति के मुहाने पर खड़े हैं।’’
उन्होंने स्पष्ट किया कि एआई का सकारात्मक प्रभाव न तो स्वतः मिलेगा और न ही सुनिश्चित है, इसके लिए जिम्मेदार प्रयास जरूरी हैं।
भारत में 15 अरब डॉलर का निवेश
पिचाई ने बताया कि गूगल भारत में अपने 15 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश के तहत आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में एक पूर्ण-स्तरीय एआई केंद्र स्थापित कर रहा है।
इस केंद्र में गीगावाट स्तर की कंप्यूटिंग क्षमता और एक नया अंतरराष्ट्रीय सब-सी केबल गेटवे भी होगा।
डिजिटल विभाजन से बचाने की जरूरत
उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी से बड़े लाभ मिलते हैं, लेकिन यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि हर वर्ग को इसका लाभ मिले।
उन्होंने चेतावनी दी कि डिजिटल डिवाइड को एआई डिवाइड में बदलने नहीं दिया जाना चाहिए।
रोजगार क्षेत्र में आएंगे बड़े बदलाव
सुंदर पिचाई ने कहा कि एआई कार्यबल को नया रूप देगा, कुछ नौकरियों को स्वचालित करेगा, कुछ को विकसित करेगा और नए रोजगार के अवसर पैदा करेगा।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि 20 वर्ष पहले ‘यूट्यूब क्रिएटर’ जैसी कोई अवधारणा नहीं थी, लेकिन आज लाखों लोग इससे रोजगार पा रहे हैं।
अल्फाफोल्ड जैसी तकनीकों का उल्लेख
पिचाई ने गूगल डीपमाइंड द्वारा विकसित अल्फाफोल्ड तकनीक का उदाहरण देते हुए कहा कि इसने प्रोटीन अनुसंधान के दशकों के कार्य को एक सार्वजनिक डेटाबेस में सीमित कर दिया है।
इसका उपयोग आज दुनिया भर के लाखों शोधकर्ता कर रहे हैं।
फैक्ट चेकिंग के लिए ‘सिंथ आईडी’
उन्होंने बताया कि गूगल ने ‘सिंथ आईडी’ जैसे उपकरण विकसित किए हैं, जिनका उपयोग पत्रकार और तथ्य-जांचकर्ता सामग्री की प्रामाणिकता जांचने में करते हैं।
उन्होंने कहा कि सहयोग के बिना एआई के पूर्ण लाभ संभव नहीं हैं।
सरकारों की भूमिका अहम
सुंदर पिचाई ने कहा कि सरकारों की भूमिका नियामक और नवोन्मेषक दोनों रूपों में अत्यंत महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि सरकारें एआई को सार्वजनिक सेवाओं में लागू कर लोगों के जीवन को बेहतर बना सकती हैं।
निष्कर्ष
सुंदर पिचाई के अनुसार, कृत्रिम मेधा अरबों लोगों के जीवन को बेहतर बना सकती है और विज्ञान की सबसे कठिन समस्याओं का समाधान कर सकती है।
उन्होंने सभी देशों और संस्थानों से एआई के सुरक्षित, समावेशी और जिम्मेदार विकास के लिए मिलकर काम करने की अपील की।
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