सिद्धार्थनगर, सन्दीप पाण्डेय | वेब वार्ता
सिद्धार्थनगर में उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग एवं जिला प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय भारत-नेपाल मैत्री महोत्सव का भव्य शुभारंभ किया गया। इस महोत्सव का उद्देश्य भारत और नेपाल के बीच सांस्कृतिक, ऐतिहासिक एवं पर्यटन संबंधों को और अधिक मजबूत बनाना है।
महोत्सव के पहले दिन विविध सांस्कृतिक कार्यक्रमों की आकर्षक प्रस्तुतियां हुईं, जबकि दूसरे दिन 19 फरवरी को और अधिक भव्य आयोजन किए जाएंगे।
मुख्य अतिथि ने साझा विरासत पर डाला प्रकाश
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में डुमरियागंज सांसद के प्रतिनिधि एस.पी. अग्रवाल उपस्थित रहे। उन्होंने भारत-नेपाल की पारंपरिक मित्रता, सांस्कृतिक एकता और ‘रोटी-बेटी’ के ऐतिहासिक संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन दोनों देशों के रिश्तों को नई ऊर्जा प्रदान करते हैं।
शोभायात्रा और लोकनृत्य बने आकर्षण
महोत्सव का शुभारंभ आकर्षक शोभायात्रा से हुआ। इसमें फारूवाही लोक नृत्य एवं बधावा लोक नृत्य के कलाकारों ने मनमोहक प्रस्तुतियां दीं।
साथ ही स्काउट एंड गाइड के छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर कार्यक्रम को गरिमामय बनाया। शोभायात्रा ने भारत और नेपाल की सांस्कृतिक विविधता की सुंदर झलक प्रस्तुत की।
सांस्कृतिक संध्या में कलाकारों की शानदार प्रस्तुति
सांस्कृतिक संध्या में भारतीय एवं नेपाली कलाकारों द्वारा लोकगायन, शास्त्रीय गायन, सूफी संगीत एवं लोकनृत्य की प्रस्तुति दी गई।
विशेष रूप से विशाल श्रीवास्तव द्वारा प्रस्तुत राष्ट्रगीत “हम जिएंगे और मरेंगे ऐ वतन तेरे लिए” ने उपस्थित जनसमूह में देशभक्ति का उत्साह भर दिया।
भारत-नेपाल संबंधों पर विशेष संबोधन
अपने संबोधन में एस.पी. अग्रवाल ने कहा कि भगवान बुद्ध का जन्मस्थान नेपाल में है, जबकि भारत उनकी तपोभूमि और प्रेरणास्थली रहा है।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत-नेपाल संबंधों को नई मजबूती मिली है और दोनों देशों की साझा विरासत को आगे बढ़ाना समय की आवश्यकता है।
द्वितीय दिवस पर होगा विशेष सांस्कृतिक आयोजन
महोत्सव के दूसरे दिन मध्यप्रदेश, लखनऊ, सीतापुर, प्रयागराज, संत कबीरनगर सहित विभिन्न क्षेत्रों के कलाकार अपनी प्रस्तुतियां देंगे।
इस दिन पारंपरिक लोकनृत्य, अवधी एवं लोकगायन, नुक्कड़ नाटक, समूह गायन तथा भारत-नेपाल मैत्री पर आधारित विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
निष्कर्ष
भारत-नेपाल मैत्री महोत्सव दोनों देशों के सांस्कृतिक और सामाजिक रिश्तों को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हो रहा है।
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