Wednesday, February 18, 2026
व्हाट्सएप पर हमसे जुड़ें

AI समिट में गलगोटिया यूनिवर्सिटी का ‘रोबोट डॉग’ विवाद, फर्जी दावे और मीडिया चूक ने बढ़ाई किरकिरी

नई दिल्ली, नेशनल डेस्क | वेब वार्ता

नई दिल्ली में आयोजित भारत AI इम्पैक्ट समिट 2026 के दौरान गलगोटिया यूनिवर्सिटी द्वारा प्रदर्शित एआई रोबोट डॉग “ओरियन” को लेकर ऐसा विवाद खड़ा हो गया, जिसने देशभर में तकनीकी जगत, मीडिया और शिक्षा संस्थानों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। यूनिवर्सिटी ने इसे स्वदेशी तकनीक से विकसित AI रोबोट बताते हुए लगभग ₹350 करोड़ की लागत का दावा किया, लेकिन सोशल मीडिया पर इसकी असल पहचान सामने आने के बाद मामला राष्ट्रीय बहस में बदल गया।

विवाद के बाद डीडी न्यूज को अपनी पोस्ट हटानी पड़ी, समिट आयोजकों ने यूनिवर्सिटी को कार्यक्रम से बाहर कर दिया और यह मामला AI पारदर्शिता, मीडिया जिम्मेदारी और शैक्षणिक ईमानदारी का उदाहरण बन गया।

भारत AI इम्पैक्ट समिट 2026: बड़े सपनों का मंच

15 से 18 फरवरी 2026 तक प्रगति मैदान, नई दिल्ली में आयोजित भारत AI इम्पैक्ट समिट को भारत की तकनीकी यात्रा का अहम पड़ाव माना जा रहा था। इस आयोजन में इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY), NASSCOM, IITs, स्टार्टअप्स और अंतरराष्ट्रीय कंपनियों ने भाग लिया।

समिट का उद्देश्य भारत को वैश्विक AI लीडर के रूप में स्थापित करना, स्टार्टअप्स को बढ़ावा देना और डिजिटल इंडिया मिशन को गति देना था।

गलगोटिया यूनिवर्सिटी की महत्वाकांक्षी प्रस्तुति

गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने अपने पवेलियन में विभिन्न छात्र प्रोजेक्ट्स, सॉफ्टवेयर डेमो और रिसर्च मॉडल के साथ “ओरियन” नामक रोबोट डॉग को प्रदर्शित किया।

रोबोट बाधाओं पर कूदता, वॉयस कमांड समझता, दिशा बदलता और निगरानी जैसी गतिविधियों का प्रदर्शन करता नजर आया। यूनिवर्सिटी अधिकारियों ने इसे भारतीय AI अनुसंधान की बड़ी उपलब्धि बताया।

₹350 करोड़ के दावे से शुरू हुआ विवाद

प्रदर्शन के दौरान दावा किया गया कि इस रोबोट को विकसित करने में लगभग ₹350 करोड़ खर्च हुए हैं। यह राशि रिसर्च, डेवलपमेंट, हार्डवेयर और AI एल्गोरिदम से जुड़ी बताई गई।

डीडी न्यूज ने इसी दावे के साथ वीडियो साझा किया, जिससे यह खबर तेजी से देशभर में फैल गई।

सोशल मीडिया ने किया तकनीकी विश्लेषण

वीडियो वायरल होने के कुछ ही घंटों के भीतर तकनीकी विशेषज्ञों और इंजीनियरों ने रोबोट की तुलना चीन की कंपनी Unitree Robotics के Go2 मॉडल से की।

डिजाइन, कैमरा पोजिशन, जॉइंट्स, साइज और मूवमेंट लगभग समान पाए गए, जिससे दावे पर सवाल खड़े हो गए।

#FakeAIInnovation और #GalgotiaRobotScam ट्रेंड

X, लिंक्डइन और रेडिट पर #FakeAIInnovation और #GalgotiaRobotScam जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे।

यूजर्स ने तुलना तस्वीरें, तकनीकी रिपोर्ट और मीम्स साझा कर मामले को और तेज कर दिया।

डीडी न्यूज की भूमिका पर सवाल

बढ़ते दबाव के बाद डीडी न्यूज ने वीडियो हटा दिया और स्वीकार किया कि पोस्ट में तथ्यात्मक त्रुटि थी।

इस घटना ने सरकारी मीडिया की फैक्ट-चेकिंग प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े किए।

गलगोटिया यूनिवर्सिटी का स्पष्टीकरण

यूनिवर्सिटी प्रशासन ने बयान जारी कर कहा कि रोबोट एक डेमो मॉडल था और ₹350 करोड़ की राशि कुल AI निवेश से जुड़ी थी।

उन्होंने भ्रम के लिए खेद जताया और भविष्य में अधिक पारदर्शिता का वादा किया।

आयोजकों की सख्त कार्रवाई

18 फरवरी को आयोजकों ने गलगोटिया पवेलियन को बंद करवा दिया और बैरिकेड लगाकर आम लोगों की एंट्री रोक दी।

इसके बाद यूनिवर्सिटी की समिट में भागीदारी समाप्त कर दी गई।

AI नैतिकता और शिक्षा जगत पर असर

विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला भारत के AI इकोसिस्टम की विश्वसनीयता से जुड़ा है।

तैयार तकनीक को नवाचार बताना शैक्षणिक ईमानदारी को नुकसान पहुंचाता है।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं

विपक्षी नेताओं ने सरकार पर निशाना साधा, जबकि भाजपा नेताओं ने इसे अलग घटना बताया।

भविष्य के लिए सबक

विशेषज्ञों के अनुसार अब तकनीकी प्रदर्शनों के लिए थर्ड-पार्टी वेरिफिकेशन, सख्त नियम और मीडिया प्रशिक्षण जरूरी होंगे।

निष्कर्ष

गलगोटिया यूनिवर्सिटी का यह विवाद दिखाता है कि AI युग में हाइप से अधिक जरूरी पारदर्शिता और सच्चाई है।

विश्वसनीय नवाचार ही भारत को वैश्विक AI नेतृत्व की दिशा में आगे ले जा सकता है।

👉 टेक्नोलॉजी, AI और डिजिटल इंडिया से जुड़ी खबरों के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ें

ये भी पढ़ें: इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026: समावेशी विकास के लिए भारत के संप्रभु एआई रोडमैप पर मंथन

Author

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisement -spot_img
- Advertisement -spot_img

Latest

spot_img
spot_img

More articles

spot_img
spot_img