वाराणसी, अजय कुमार | वेब वार्ता
कैंटोमेंट वाराणसी क्षेत्र में करोड़पति बाबू संदीप झा की संपत्तियों और कथित अवैध निर्माण को लेकर लगातार नए खुलासे सामने आ रहे हैं। आरोप है कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में बिना विधिवत मानचित्र स्वीकृति के कई इमारतें खड़ी की गईं, जिन पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
स्थानीय लोगों के अनुसार यह मामला केवल होटल वरुणा और एक निर्माणाधीन बिल्डिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि “मैथली भवन” नामक एक अन्य इमारत भी इसी श्रेणी में आती है।
बाढ़ क्षेत्र में अवैध निर्माण का आरोप
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि संबंधित भवन वरुणा नदी के किनारे डूब क्षेत्र में बनाया गया है, जहां निर्माण के लिए विशेष अनुमति की आवश्यकता होती है।
आरोप है कि इन इमारतों का विधिवत नक्शा स्वीकृत नहीं कराया गया, इसके बावजूद निर्माण कार्य लगातार चलता रहा।
2023 में जारी हुआ था नोटिस
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार वर्ष 2023 में वाराणसी विकास प्राधिकरण (वीडीए) द्वारा संदीप झा की पत्नी संगीता झा को नोटिस जारी किया गया था।
उस समय ध्वस्तीकरण कार्रवाई की बात कही गई थी, लेकिन अब तक भवन पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
घूसखोर अधिकारियों की भूमिका पर सवाल
स्थानीय लोगों में चर्चा है कि कुछ भ्रष्ट अधिकारियों की मेहरबानी से ही यह निर्माण सुरक्षित बना हुआ है।
सवाल उठ रहा है कि किन अधिकारियों के संरक्षण में नियमों को ताक पर रखकर यह सब संभव हो सका।
होटल वरुणा के लाइसेंस पर भी संदेह
आरोप है कि होटल वरुणा भी बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में स्थित है, जहां व्यावसायिक निर्माण पर सख्त नियम लागू होते हैं।
ऐसे में यह भी जांच का विषय है कि होटल को लाइसेंस और अनुमति किन मानकों पर दी गई।
जमीन हड़पने और दबाव बनाने के आरोप
स्थानीय लोगों का आरोप है कि संदीप झा द्वारा रास्ते अवरुद्ध कर लोगों पर जमीन बेचने का दबाव बनाया जाता है।
कथित रूप से औने-पौने दामों पर जमीन खरीदने के लिए प्रोपेगंडा और मानसिक दबाव का सहारा लिया जाता है।
संपत्ति लेन-देन के दस्तावेज सामने आए
दस्तावेजों के अनुसार संदीप झा की पत्नी संगीता झा, भाई प्रवीण झा और पार्टनर शैलेश चौधरी के बीच संपत्ति विक्रय से जुड़े कागजात सामने आए हैं।
शैलेश चौधरी का मूल निवास हावड़ा, पश्चिम बंगाल बताया जा रहा है।
दो दशकों में करोड़ों की संपत्ति कैसे?
स्थानीय स्तर पर यह सवाल भी उठ रहा है कि महज 20 वर्षों में संदीप झा ने इतनी विशाल संपत्ति कैसे अर्जित की।
चर्चा है कि इसके पीछे बिहार के एक पूर्व सीओ का संरक्षण रहा है, जिसकी भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।
जांच की मांग तेज
सामाजिक संगठनों और नागरिकों ने मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो यह मामला बड़े घोटाले का रूप ले सकता है।
निष्कर्ष
कैंटोमेंट वाराणसी में संदीप झा से जुड़ा यह मामला अवैध निर्माण, प्रशासनिक लापरवाही और संभावित भ्रष्टाचार की गंभीर तस्वीर पेश करता है।
फिलहाल पड़ताल जारी है और आने वाले दिनों में इससे जुड़े और भी खुलासे सामने आने की संभावना है।
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