गोरखपुर | वेब वार्ता
गोरखपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने संघ शताब्दी वर्ष के अवसर पर आयोजित सामाजिक सद्भाव बैठक में भाग लेकर सामाजिक एकता और समरसता का संदेश दिया।
यह कार्यक्रम तारामंडल स्थित बाबा गम्भीरनाथ प्रेक्षागृह में आयोजित किया गया, जिसमें विभिन्न समाज, वर्ग, जाति और पंथ के प्रतिनिधियों की उपस्थिति रही।
प्रदर्शनी का किया उद्घाटन
कार्यक्रम के दौरान डॉ. मोहन भागवत ने संघ की 100 वर्षों की यात्रा और ‘पंच परिवर्तन’ विषय पर आधारित प्रदर्शनी का दीप प्रज्ज्वलित कर उद्घाटन किया तथा उसका अवलोकन भी किया।
प्रदर्शनी में संघ के सामाजिक, सांस्कृतिक और राष्ट्रनिर्माण से जुड़े कार्यों को चित्रों और दस्तावेजों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया।
आत्ममंथन का अवसर: डॉ. भागवत
डॉ. भागवत ने अपने संबोधन में कहा कि संघ के 100 वर्ष पूरे होना केवल उत्सव का विषय नहीं है, बल्कि यह आत्ममंथन और आत्मविश्लेषण का अवसर है।
उन्होंने कहा कि संगठन को समय-समय पर अपने कार्यों, उद्देश्यों और समाज में अपनी भूमिका का मूल्यांकन करते रहना चाहिए।
सामाजिक समरसता पर दिया जोर
सरसंघचालक ने कहा कि समाज में आपसी सद्भाव, सहयोग और भाईचारे की भावना को मजबूत करना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि हम सभी एक बड़े हिन्दू समाज का हिस्सा हैं और हमें जाति, वर्ग और पंथ से ऊपर उठकर समाजहित में कार्य करना चाहिए।
ब्लॉक स्तर पर बैठकों का आह्वान
डॉ. भागवत ने समाज में संवाद और सहयोग बढ़ाने के लिए ब्लॉक स्तर पर नियमित बैठकों के आयोजन पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर संवाद से समस्याओं का समाधान संभव होता है और सामाजिक एकता को मजबूती मिलती है।
भारत सद्भावना का केंद्र
अपने संबोधन में डॉ. भागवत ने कहा कि भारत विश्व में सद्भावना और मानवता का केंद्र रहा है।
उन्होंने कहा कि संकट के समय भारत हमेशा अन्य देशों की सहायता के लिए आगे आता है, जो हमारी सांस्कृतिक परंपरा का प्रतीक है।
विविध समाजों की रही सहभागिता
बैठक में विभिन्न सामाजिक संगठनों, धार्मिक संस्थाओं, शैक्षणिक संस्थानों और जनप्रतिनिधियों ने भाग लिया।
सभी प्रतिनिधियों ने सामाजिक समरसता, राष्ट्रनिर्माण और सहयोग की भावना को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।
युवाओं से की विशेष अपील
डॉ. भागवत ने युवाओं से समाजसेवा और राष्ट्रनिर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की।
उन्होंने कहा कि युवा वर्ग देश का भविष्य है और उनके सकारात्मक प्रयासों से ही समाज को नई दिशा मिल सकती है।
निष्कर्ष
संघ शताब्दी कार्यक्रम के अवसर पर आयोजित यह सामाजिक सद्भाव बैठक सामाजिक एकता, सहयोग और राष्ट्रनिर्माण के संकल्प को मजबूत करने में महत्वपूर्ण साबित हुई।
डॉ. मोहन भागवत के संदेश ने समाज के विभिन्न वर्गों को एकजुट होकर देशहित में कार्य करने के लिए प्रेरित किया।
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