कुशीनगर, ममता तिवारी | वेब वार्ता
बुद्ध की पावन धरती कुशीनगर में संस्कृति विभाग एवं पर्यटन विभाग, उत्तर प्रदेश तथा जिला प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित भारत–नेपाल मैत्री महोत्सव 2026 के द्वितीय दिवस का आयोजन बुद्धा पीजी विश्वविद्यालय परिसर में गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ।
कार्यक्रम ने भारत और नेपाल की साझा सांस्कृतिक विरासत, आत्मीय संबंधों और लोकपरंपराओं को एक मंच पर सजीव रूप में प्रस्तुत किया।
नेपाल और भारत के रिश्ते ऐतिहासिक: विजय कुमार दुबे
मुख्य अतिथि एवं सांसद कुशीनगर विजय कुमार दुबे ने कहा कि नेपाल और भारत के रिश्ते ऐतिहासिक एवं प्रगाढ़ हैं। दोनों देशों के बीच सदियों से सांस्कृतिक, धार्मिक और पारंपरिक ‘रोटी-बेटी’ के संबंध रहे हैं।
लोकगीत और लोकनृत्य समाज की आत्मा: श्रीप्रकाश मणि त्रिपाठी
विशिष्ट अतिथि पूर्व कुलपति, अमरकंटक विश्वविद्यालय (मध्य प्रदेश) श्रीप्रकाश मणि त्रिपाठी ने कहा कि लोकगीत और लोकनृत्य किसी भी समाज की आत्मा होते हैं। उन्होंने भारत-नेपाल संबंधों को सामाजिक, धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से अद्वितीय बताया।
सांस्कृतिक विरासत साझा: जिलाधिकारी
जिलाधिकारी कुशीनगर महेंद्र सिंह तवर ने कहा कि भारत और नेपाल भले ही दो स्वतंत्र राष्ट्र हों, परंतु सांस्कृतिक दृष्टि से दोनों देशों की विरासत साझा है। महोत्सव का उद्देश्य इसी एकता को सुदृढ़ करना है।
लोकनृत्य और शास्त्रीय प्रस्तुतियों ने बांधा समां
कार्यक्रम का शुभारंभ विशाल गुप्ता द्वारा प्रस्तुत गणेश वंदना लोकनृत्य से हुआ। इसके बाद डॉ. उपासना दीक्षित एवं उनकी टीम ने कथक नृत्य-नाटिका के माध्यम से रामकथा प्रसंग प्रस्तुत कर दर्शकों को भावविभोर कर दिया।
नेपाल से आए कलाकारों ने जनजातीय लोकनृत्य प्रस्तुत कर दोनों देशों की सांस्कृतिक समानताओं को प्रभावशाली ढंग से अभिव्यक्त किया।
लोकगायन से गूंजी सांस्कृतिक एकता
तेज सिंह कुशवाहा, सुनील शर्मा, स्वीटी सिंह एवं अनीता सिंह ने लोकगीतों की प्रस्तुति देकर भारत-नेपाल की साझा लोकधुनों को जीवंत किया। भोजपुरी और नेपाली स्वरों की संगति ने सांस्कृतिक एकात्मता का संदेश दिया।
प्रदर्शनी बनी आकर्षण का केंद्र
महोत्सव में आयोजित प्रदर्शनी में भारत और नेपाल की कला, शिल्प, व्यंजन एवं सांस्कृतिक धरोहर का आकर्षक प्रदर्शन किया गया।
निष्कर्ष
भारत–नेपाल मैत्री महोत्सव ने यह सिद्ध कर दिया कि लोकसंस्कृति ही वह माध्यम है जो सीमाओं के पार आत्मीयता का सेतु बनाती है और दो देशों को परिवार की भावना में जोड़ती है।
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