Tuesday, February 17, 2026
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राज्यपाल बोले-आगे बढ़ रहीं बेटियां… आने वाले समय में बेटा बढ़ाओ पर सोचना पड़ेगा

  • इंदौर में दीक्षांत समारोह: 78 साल की सुषमा मोघे को मिला स्वर्ण पदक
  • 221 छात्रों को पीएचडी की उपाधि और 150 स्टूडेंट को गोल्ड मेडल
  • नम्र रहेंगे तो आगे रहेंगे, जितने अकड़ में रहेंगे उतना पीछे होते जाएंगे

इंदौर। वेब वार्ता

इंदौर की देवी अहिल्या विश्वविद्यालय में आज यानी मंगलवार को दीक्षांत समारोह का आयोजन किया गया। समारोह में पहुंचे राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने 221 स्टूडेंट को पीएचडी की उपाधि दी। दो साल के बाद हो रहे इस आयोजन में विभिन्न परीक्षाओं में अव्वल रहे 150 स्टूडेंट को गोल्ड मेडल भी दिया गया। 78 साल की सुषमा मोघे को भी गोल्ड मेडल दिया गया।

वहीं समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा- देवी अहिल्या बाई होल्कर का जन्म 500 साल पहले हुआ था। उन्होंने महिला शिक्षा पर जोर दिया। अभी बेटी बचाओ अभियान चलाया जा रहा है, जिस तरह बेटियां आगे बढ़ रही हैं आने वाले समय में बेटा बढ़ाओ पर सोचना पड़ेगा। राज्यपाल ने स्टूडेंट से कहा कि लक्ष्य निर्धारित करके आगे बढ़ते रहें। कठिनाइयां आती रहेंगी। आप जितने नम्र रहेंगे उतने आगे रहेंगे। जितने अकड़ में रहेंगे उतना पीछे होते जाएंगे।

दो साल बाद हुआ दीक्षांत समारोह

कुलपति प्रोफेसर राकेश सिंघई ने बताया कि बीते दो वर्षों से दीक्षांत समारोह आयोजित नहीं हुआ था, इसलिए छात्रों में ज्यादा उत्साह दिखा। जिन छात्रों ने पीएचडी की है, वे देश के विकास में योगदान देंगे। यही हमने सभी स्टूडेंट को संदेश दिया है। आयोजन में सांसद शंकर लालवानी भी शामिल हुए। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पद्मश्री डॉ. नारायण व्यास थे।

सवा से डेढ़ घंटे का समारोह

राज्यपाल के मुख्य आतिथ्य में आयोजित दीक्षांत समारोह को इस बार समयबद्ध और संक्षिप्त (केवल सवा से डेढ़ घंटे) में संपन्न कराया गया। सभी मेडल और डिग्रियों का वितरण इसी समयावधि में किया जाएगा। राज्यपाल ने परिसर में ही एनीमिया जागरूकता कार्यक्रम रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

महिलाओं की संख्या अधिक

यह दीक्षांत समारोह विशेष इसलिए भी है, क्योंकि इसमें शैक्षणिक सत्र 2023-24 और 2024-25 दोनों का दीक्षांत एक साथ आयोजित किया गया। पीएचडी डिग्री प्राप्त करने वाले शोधार्थियों में महिलाओं की संख्या अधिक है।

सुषमा मोघे को भी गोल्ड मेडल

78 साल की स्टूडेंट सुषमा मोघे ने बताया कि मैं केंद्रीय स्कूल से रिटायर हूं। पढ़ाई के लिए उम्र की सीमा खत्म होने का लाभ मुझे मिला है। मेरी मातृभाषा मराठी है। इसलिए मैंने मराठी में एमए किया। मुझे मातृभाषा की सेवा करने का अवसर मिला। अब मैं मराठी से हिंदी में अनुवाद करूंगी। इसमें मुझे फायदा मिलेगा। आज मुझे बहुत तालियां मिली, मैं बहुत खुश हूं।

ग्रुप में बुलाए शोधार्थी और मेडलिस्ट

समारोह को सुव्यवस्थित रखने के लिए शोधार्थियों को 6-6 के समूह में मंच पर आमंत्रित किया, जबकि मेडल प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को 2-2 के समूह में बुलाया। पीएचडी डिग्री के लिए 221 शोधार्थी समारोह में शामिल हुए। वहीं 121 विद्यार्थी मेडल प्राप्त किए, जिनमें 90 से अधिक छात्राएं हैं।

दो डीलिट् उपाधियों से समारोह की शुरुआत

दीक्षांत समारोह की शुरुआत दो डीलिट उपाधियों के वितरण से हुई। इस वर्ष अंग्रेजी विषय में यह उपाधि शासकीय कॉलेज के प्राचार्य प्रो. अशोक सचदेवा और सीनियर प्रोफेसर डॉ. मनीषा शर्मा पांडेय को प्रदान की गई। इसके बाद 192 गोल्ड मेडल और 21 सिल्वर मेडल वितरित किए जाएंगे।

सागर की साक्षी का छह मेडल

इस वर्ष का दीक्षांत समारोह स्टूडेंट्स की उपलब्धियों के लिहाज से भी खास रहा। सागर की छात्रा साक्षी जैन को 6 मेडल और झाबुआ की भव्या त्रिपाठी को 5 मेडल प्रदान किए गए। वहीं, 25 से अधिक विद्यार्थियों को 2 से 4 मेडल मिले।

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