हरदोई, लक्ष्मीकान्त पाठक | वेब वार्ता
विकासखंड शाहाबाद की ग्राम पंचायत हसनापुर में विकास निधि के कथित दुरुपयोग का गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि ग्राम पंचायत सचिव और ग्राम प्रधान ने मिलकर शासनादेशों की अनदेखी करते हुए विभिन्न मदों की धनराशि निजी बैंक खातों में स्थानांतरित कर ली।
लगातार अलग-अलग खातों के माध्यम से भुगतान किए जाने से वित्तीय अनियमितता और घोटाले की आशंका और गहरी हो गई है।
वर्ष 2022-23 में संदिग्ध भुगतान
अभिलेखों के अनुसार वित्तीय वर्ष 2022-23 में प्रशासनिक व्यय के नाम पर कई भुगतान किए गए—
- ₹6,400 – वाटिका मिस्त्री भुगतान (खाता अंतिम अंक 7114)
- ₹4,000 – रेनवाटर कार्य मिस्त्री भुगतान
- ₹3,000 – फोटोग्राफी मद
- ₹10,000 – साफ-सफाई मद
- ₹1,180 – रिचार्ज मद
इसी खाते में पंचायत सहायक का मानदेय भेजे जाने से पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
गौशाला कार्य में भी अनियमितता का आरोप
वर्क आईडी 61456269 के अंतर्गत गौशाला में खाई खुदाई के नाम पर—
- ₹97,500 – खाई खुदाई
- ₹63,700 – जेसीबी मशीन कार्य
यह राशि खाता संख्या (अंतिम अंक 4908) में भेजी गई, जिसका उपयोग प्रधान एवं पंचायत सहायक के मानदेय भुगतान में भी किया गया।
2023-24 और 2024-25 में भी जारी रहा सिलसिला
वित्तीय वर्ष 2023-24 में—
- ₹5,000 – 7 मार्च 2024
- ₹23,000 – 17 मार्च 2024
वहीं वर्ष 2024-25 में तकनीकी एवं प्रशासनिक व्यय के नाम पर ₹8,000 (खाता अंक 7560) में भेजे गए, जो कथित रूप से प्रधान के नियंत्रण में बताया जा रहा है।
नियमों के खिलाफ निजी खातों में भुगतान
पंचायती राज नियमों के अनुसार, किसी भी कार्य का भुगतान सीधे लाभार्थी या आपूर्तिकर्ता के खाते में किया जाना अनिवार्य है।
इसके बावजूद मिस्त्री भुगतान, मानदेय एवं अन्य कार्यों की राशि निजी खातों में भेजी गई, जो स्पष्ट रूप से नियमों का उल्लंघन है।
लगातार बदलते खातों से बढ़ा संदेह
भुगतान के लिए बार-बार अलग-अलग बैंक खातों का उपयोग किए जाने से यह संदेह और मजबूत हो गया है कि विकास निधि का सुनियोजित दुरुपयोग किया गया।
यह न केवल वित्तीय नियमों का उल्लंघन है, बल्कि ग्राम पंचायत में सुशासन के सिद्धांतों पर भी प्रश्नचिन्ह लगाता है।
ग्रामीणों ने की निष्पक्ष जांच की मांग
ग्रामीणों और जागरूक नागरिकों का कहना है कि यदि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो बड़े स्तर पर अनियमितता सामने आ सकती है।
लोगों ने दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है।
बीडीओ ने दिए जांच के निर्देश
खंड विकास अधिकारी डी.सी. शर्मा ने कहा कि ग्राम प्रधान को केवल अपने मानदेय की राशि ही निजी खाते में लेने का अधिकार है।
अन्य किसी भी भुगतान का निजी खाते में जाना नियमों के विरुद्ध है। उन्होंने बताया कि मामला उनके संज्ञान में नहीं था, लेकिन अब इसकी जांच कराई जाएगी।
निष्कर्ष
हसनापुर ग्राम पंचायत में सामने आया यह मामला विकास निधि के दुरुपयोग की गंभीर आशंका को दर्शाता है। यदि समय रहते जांच नहीं हुई, तो ग्रामीण विकास योजनाओं की विश्वसनीयता पर गहरा असर पड़ सकता है।
👉 पंचायत, भ्रष्टाचार और प्रशासनिक खबरों के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ें – Web Varta
ये भी पढ़ें: शाहाबाद में प्रेम–प्रसंग छिपाने के लिए की गई महिला की नृशंस हत्या का खुलासा, आरोपी गिरफ्तार








