गाजियाबाद | वेब वार्ता
उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले के भोजपुर थाना क्षेत्र से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां थाने के मालखाने से 80 हजार रुपये नकद गायब पाए गए हैं। इस मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि पुलिस ने जिस हेड मोहर्रिर को मुख्य आरोपी बनाया है, उसकी मृत्यु मार्च 2024 में ही हो चुकी है।
इसके बावजूद थाना प्रभारी द्वारा मृतक हेड मोहर्रिर के नाम पर ही मुकदमा दर्ज करा दिया गया, जिससे पुलिस की कार्यप्रणाली और जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
मालखाने से कैसे गायब हुए रुपये
जानकारी के अनुसार, भोजपुर थाने में हाल ही में मालखाने की नियमित जांच की जा रही थी। इसी दौरान अधिकारियों को पता चला कि मालखाने में जमा 80 हजार रुपये नकद गायब हैं।
यह राशि विभिन्न आपराधिक मामलों में जब्त की गई थी और नियमानुसार सुरक्षित रखी जानी थी। जांच में रकम के अभाव की पुष्टि होते ही मामला उच्च अधिकारियों तक पहुंचाया गया।
मृतक हेड मोहर्रिर पर दर्ज हुआ मुकदमा
जांच के बाद थाना प्रभारी ने मालखाने के पूर्व हेड मोहर्रिर के नाम पर प्राथमिकी दर्ज कराई। चौंकाने वाली बात यह रही कि संबंधित हेड मोहर्रिर की मृत्यु लगभग दो वर्ष पहले, मार्च 2024 में हो चुकी थी।
इसके बावजूद उनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 409 (आपराधिक विश्वासघात), 420 (धोखाधड़ी) समेत अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया गया।
कानूनी दृष्टि से गंभीर चूक
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि किसी मृत व्यक्ति के विरुद्ध आपराधिक मुकदमा दर्ज करना विधिसम्मत नहीं है। ऐसा मामला न्यायालय में टिक नहीं सकता और इसे तकनीकी रूप से अमान्य माना जा सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, FIR दर्ज करने से पहले आरोपी की वर्तमान स्थिति की जांच करना पुलिस की प्राथमिक जिम्मेदारी होती है।
अन्य कर्मचारियों की भूमिका पर सवाल
इस मामले में एक बड़ा सवाल यह भी उठ रहा है कि मालखाने की देखरेख में शामिल अन्य कर्मचारियों और अधिकारियों की भूमिका की जांच क्यों नहीं की गई।
जानकारों का मानना है कि केवल मृतक कर्मचारी को जिम्मेदार ठहराकर मामले को दबाने का प्रयास किया जा रहा है।
पुलिस का पक्ष
थाना प्रभारी ने इस मामले पर सफाई देते हुए कहा कि मालखाने के रजिस्टर में पूर्व हेड मोहर्रिर का नाम दर्ज था, इसलिए प्रक्रिया के तहत उनके नाम पर ही मुकदमा दर्ज किया गया है।
उन्होंने बताया कि आगे की जांच में अन्य पहलुओं और संभावित जिम्मेदार कर्मचारियों की भूमिका भी देखी जाएगी।
सोशल मीडिया पर बना मजाक का विषय
इस घटना के सामने आने के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X और अन्य माध्यमों पर मामले को लेकर जमकर चर्चा हो रही है।
लोग तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। कुछ यूजर्स ने लिखा— “मरने के बाद भी FIR? अब तो भूतों पर भी केस चलेगा।” “गाजियाबाद पुलिस ने नया रिकॉर्ड बना दिया।”
जांच प्रक्रिया पर उठे सवाल
यह मामला पुलिस की आंतरिक जांच प्रणाली, मालखाने की सुरक्षा व्यवस्था और जवाबदेही पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो ऐसे मामले भविष्य में पुलिस व्यवस्था की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
एसएसपी की प्रतिक्रिया का इंतजार
फिलहाल इस पूरे मामले में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) गाजियाबाद की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।
उम्मीद की जा रही है कि उच्च स्तर से जांच कराकर वास्तविक दोषियों को सामने लाया जाएगा।
निष्कर्ष
भोजपुर थाने के मालखाने से रुपये गायब होने और मृतक कर्मचारी पर FIR दर्ज होने की घटना पुलिस व्यवस्था में गंभीर खामियों को उजागर करती है। अब आवश्यकता है कि मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी और गहन जांच हो, ताकि सच्चाई सामने आ सके और दोषियों को सजा मिल सके।
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