Monday, February 16, 2026
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क्रिकेट के लिए पढ़ाई से समझौता: वैभव सूर्यवंशी इस साल नहीं देंगे 10वीं बोर्ड परीक्षा

समस्तीपुर/स्पोर्ट्स डेस्क | वेब वार्ता

भारतीय क्रिकेट के उभरते सितारे और अंडर-19 स्तर पर शानदार प्रदर्शन से चर्चा में आए 14 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी इस वर्ष सीबीएसई की 10वीं बोर्ड परीक्षा में शामिल नहीं होंगे। समस्तीपुर के इस युवा खिलाड़ी ने अपने व्यस्त क्रिकेट शेड्यूल के कारण पढ़ाई से अस्थायी ब्रेक लेकर पूरी तरह खेल पर फोकस करने का फैसला किया है। 17 फरवरी से 11 मार्च तक होने वाली बोर्ड परीक्षाओं के दौरान ही उनका डीवाई पाटिल टी20 टूर्नामेंट और आईपीएल की तैयारियों में हिस्सा लेना तय माना जा रहा है।

पिता और स्कूल प्रबंधन ने किया स्पष्ट

ताजपुर स्थित मोडेस्टी स्कूल के निदेशक आदर्श कुमार पिंटू के अनुसार वैभव के पिता से हुई बातचीत में यह साफ हुआ कि लगातार क्रिकेट कैंप, टूर्नामेंट और आईपीएल की तैयारियों के कारण वह इस वर्ष बोर्ड परीक्षा नहीं दे पाएंगे। परिवार ने फिलहाल क्रिकेट करियर को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया है। स्कूल प्रबंधन ने भी स्पष्ट किया था कि वैभव को किसी विशेष छूट के बजाय सामान्य विद्यार्थियों की तरह ही परीक्षा प्रक्रिया में शामिल होना होगा।

परीक्षा और टूर्नामेंट की तारीखों का टकराव

इवेंटतारीख
सीबीएसई 10वीं बोर्ड परीक्षा17 फरवरी – 11 मार्च 2026
डीवाई पाटिल टी20 टूर्नामेंट23 फरवरी 2026 से
आईपीएल 202626 मार्च 2026 से

परीक्षा और डीवाई पाटिल टी20 टूर्नामेंट की तारीखों के टकराव के कारण वैभव के सामने दोनों में से एक चुनने की स्थिति बनी। आईपीएल फ्रेंचाइजी राजस्थान रॉयल्स के कैंप से जुड़े रहने और लगातार मैच प्रैक्टिस के चलते नियमित रूप से परीक्षा देना संभव नहीं था।

अंडर-19 वर्ल्ड कप के बाद लगातार व्यस्त

अंडर-19 वर्ल्ड कप में शानदार प्रदर्शन के बाद वैभव सीधे भारत लौटकर राजस्थान रॉयल्स के कैंप में शामिल हो गए थे। उन्हें घर जाने तक का समय नहीं मिला। 2025 में वह भारत के सबसे ज्यादा सर्च किए जाने वाले युवा क्रिकेटरों में शामिल रहे, जिससे उनके करियर की रफ्तार और तेज हो गई।

  • 14 साल की उम्र में राष्ट्रीय स्तर पर पहचान
  • अंडर-19 वर्ल्ड कप में बेहतरीन प्रदर्शन
  • आईपीएल फ्रेंचाइजी के साथ लगातार ट्रेनिंग

करियर पर फोकस, पढ़ाई बाद में

परिवार का मानना है कि इस समय वैभव के करियर का अहम दौर चल रहा है और उन्हें अधिकतम मौके मिलने चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार युवा खिलाड़ियों के लिए यह समय तकनीकी सुधार, फिटनेस और मैच अनुभव हासिल करने का होता है। ऐसे में बोर्ड परीक्षा को एक वर्ष बाद भी दिया जा सकता है, जबकि इस स्तर के क्रिकेट अवसर बार-बार नहीं मिलते।

निष्कर्ष

वैभव सूर्यवंशी का बोर्ड परीक्षा छोड़ने का फैसला खेल और शिक्षा के बीच संतुलन की बहस को फिर से सामने लाता है। हालांकि परिवार और खिलाड़ी ने स्पष्ट किया है कि यह स्थायी नहीं बल्कि करियर की मांग के अनुरूप लिया गया निर्णय है। आने वाले महीनों में आईपीएल और अन्य टी20 टूर्नामेंट में उनका प्रदर्शन ही तय करेगा कि यह जोखिम भरा फैसला उनके भविष्य को कितना ऊंचा ले जाता है।


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