हरदोई, लक्ष्मीकांत पाठक | वेब वार्ता
जनपद हरदोई के ग्राम अटवा असिगांव स्थित पावन योगेश्वर धाम में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के माध्यम से इन दिनों संपूर्ण क्षेत्र भक्तिमय वातावरण में सराबोर है। ग्राम पिंपरी निवादा निवासी संजय मिश्रा की सुपुत्री तथा वृन्दावन धाम से विधिवत दीक्षा प्राप्त आचार्या शिवानी मिश्रा श्रद्धालुओं को भक्ति, ज्ञान और आध्यात्मिक चेतना के दिव्य आलोक से आलोकित कर रही हैं। 10 फरवरी 2026 से प्रारंभ यह आध्यात्मिक अनुष्ठान निरंतर धर्ममय वातावरण का सृजन कर रहा है।
स्वामी जी के सान्निध्य में हो रहा आयोजन
श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन योगेश्वर धाम के मुख्य संत स्वामी जी के सान्निध्य एवं मार्गदर्शन में श्रद्धा, आस्था और समर्पण भाव के साथ संपन्न हो रहा है। आयोजन समिति द्वारा व्यवस्थाओं को सुव्यवस्थित ढंग से संचालित किया जा रहा है, जिससे श्रद्धालुओं को शांतिपूर्ण वातावरण में कथा श्रवण का अवसर प्राप्त हो रहा है।
रास लीला का भावपूर्ण निरूपण
आज के कथा प्रसंग में आचार्या शिवानी मिश्रा ने भगवान श्रीकृष्ण की रास लीला का अत्यंत भावपूर्ण और ओजस्वी वर्णन किया। उन्होंने कहा कि रास लीला भगवान और भक्त के बीच परम प्रेम, पूर्ण समर्पण और आत्मिक एकत्व का सर्वोच्च प्रतीक है। यह लीला दर्शाती है कि जब जीवात्मा पूर्ण निष्ठा और निर्मल भाव से ईश्वर का स्मरण करती है, तब ईश्वर स्वयं उसके जीवन में आनंद और पूर्णता का संचार करते हैं।
बाल लीलाओं से भाव-विभोर हुए श्रद्धालु
आचार्या जी ने भगवान श्रीकृष्ण की विविध बाल लीलाओं का भी सजीव एवं प्रभावशाली चित्रण किया। नटखट कन्हैया की चपलता, यशोदा मैया की वात्सल्यपूर्ण ममता तथा गोपियों की अनन्य भक्ति का वर्णन सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। उनकी वाणी में ऐसा भाव और माधुर्य था कि उपस्थित जनसमूह मानो ब्रजधाम की अनुभूति करने लगा।
- रास लीला का आध्यात्मिक महत्व
- बालकृष्ण की मोहक लीलाओं का वर्णन
- यशोदा और गोपियों की अनन्य भक्ति का चित्रण
भजन-कीर्तन से गूंज उठा धाम परिसर
कथा के दौरान “राधे-राधे” के गगनभेदी जयघोष, मधुर भजनों की स्वर-लहरियों और शंखनाद से संपूर्ण योगेश्वर धाम भक्तिमय एवं ब्रजमय वातावरण में परिवर्तित हो गया। श्रद्धालु भाव-विभोर होकर भक्ति रस में डूबते नजर आए।
वाणी में दिखा शास्त्रीय गाम्भीर्य और सरसता
आचार्या शिवानी मिश्रा की वाणी में शास्त्रीय गाम्भीर्य, आध्यात्मिक गहराई और सरस अभिव्यक्ति का अद्भुत समन्वय देखने को मिल रहा है। उनका सरल एवं प्रभावशाली शैली में किया गया प्रवचन श्रद्धालुओं के अंतर्मन को स्पर्श कर उन्हें धर्म और भक्ति के मार्ग पर अग्रसर होने की प्रेरणा प्रदान कर रहा है।
प्रतिदिन उमड़ रही श्रद्धालुओं की भीड़
प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु आसपास के गांवों एवं क्षेत्रों से योगेश्वर धाम पहुंचकर कथा श्रवण कर रहे हैं। श्रद्धालुओं का कहना है कि इस दिव्य कथा से उन्हें आत्मिक शांति, मानसिक संतुलन और सकारात्मक ऊर्जा की अनुभूति हो रही है।
क्षेत्र में बढ़ रहा धार्मिक व सांस्कृतिक जागरण
योगेश्वर धाम में प्रवाहित यह श्रीमद्भागवत कथा क्षेत्रवासियों के लिए भक्ति, संस्कार और आध्यात्मिक जागरण का सशक्त माध्यम बन रही है। इससे जनमानस में धर्म, आस्था और नैतिक मूल्यों के प्रति जागरूकता बढ़ रही है।
निष्कर्ष
अटवा असिगांव स्थित योगेश्वर धाम में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा न केवल धार्मिक आयोजन है, बल्कि यह आध्यात्मिक चेतना और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का माध्यम भी बन चुकी है। आचार्या शिवानी मिश्रा के भावपूर्ण प्रवचनों से श्रद्धालु आत्मिक आनंद और भक्ति रस से परिपूर्ण हो रहे हैं। यह आयोजन क्षेत्र में धर्म और आस्था की ज्योति को और प्रज्वलित कर रहा है।
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