एटा, लक्ष्मीकांत पाठक | वेब वार्ता
अलीगंज तहसील अंतर्गत झकरई गांव में 5 फरवरी से आयोजित शांति महोत्सव का समापन रविवार को श्रद्धा, उत्साह और आध्यात्मिक वातावरण के बीच सम्पन्न हुआ। महोत्सव के अंतिम दिन विश्व शांति दूत एवं मोटिवेशनल स्पीकर डॉ. प्रेम रावत का विशेष शांति संदेश वीडियो माध्यम से प्रसारित किया गया, जिसे सुनकर उपस्थित हजारों श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। कार्यक्रम के दौरान पूरे परिसर में शांति, साधना और आत्मचेतना का विशेष वातावरण देखने को मिला।
वीडियो संदेश से जुड़ा जनसमूह
समापन समारोह के अवसर पर दोपहर में डॉ. प्रेम रावत का प्रेरणादायी संदेश स्क्रीन के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। इसमें उनके जीवन, आध्यात्मिक दृष्टिकोण तथा विश्वभर में मानव कल्याण और शांति स्थापना के प्रयासों की जानकारी दी गई। श्रद्धालुओं ने एकाग्रचित्त होकर संदेश सुना और इसे अपने जीवन के लिए मार्गदर्शक बताया।
मानवीय सेवा में ‘द प्रेम रावत फाउंडेशन’ की भूमिका
कार्यक्रम में बताया गया कि डॉ. प्रेम रावत द्वारा स्थापित द प्रेम रावत फाउंडेशन विश्व के अनेक देशों में शांति शिक्षा और मानवीय सेवा के क्षेत्र में कार्य कर रही है। अफ्रीका, घाना, दक्षिण अफ्रीका के केप टाउन सहित कई क्षेत्रों में बच्चों और युवाओं के लिए विशेष शैक्षिक एवं जीवनोपयोगी कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं।
पुस्तक ‘स्वयं की आवाज’ का संदेश
महोत्सव के दौरान डॉ. प्रेम रावत की चर्चित पुस्तक “स्वयं की आवाज (Hear Yourself)” का भी उल्लेख किया गया। यह पुस्तक वर्ष 2021 में प्रकाशित हुई थी और न्यूयॉर्क टाइम्स की बेस्ट सेलर सूची में शामिल रही है। इसमें मनुष्य को आत्मचिंतन, मानसिक शांति और आंतरिक जागरण का मार्ग दिखाया गया है। उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर में इसके हिंदी संस्करण का विमोचन भी किया जा चुका है।
शांति का वास्तविक अर्थ: डॉ. प्रेम रावत का संदेश
अपने संदेश में डॉ. प्रेम रावत ने कहा कि मनुष्य जिस शांति की तलाश करता है, वह बाहर नहीं बल्कि उसके भीतर ही मौजूद है। उन्होंने कहा, “जिस चीज की तुमको तलाश है, वह तुम्हारे अंदर है। इसे अनुभव करना जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि है।”
उन्होंने मधुमक्खी का उदाहरण देते हुए बताया कि जैसे मधुमक्खी फूलों से रस निकालती है, वैसे ही मनुष्य यदि जीवन का सही ज्ञान प्राप्त कर ले, तो वह अपने भीतर छिपे आनंद और संतोष को पहचान सकता है।
कबीर के दोहों से दिया आध्यात्मिक संदेश
डॉ. प्रेम रावत ने संत कबीरदास के दोहों का उल्लेख करते हुए कहा—
“घट-घट मोरा सैयां, सूनी सेज न कोय,
कबीरा खड़ा बाजार में, मांगे सबकी खैर,
ना काहू से दोस्ती, ना काहू से बैर।”
उन्होंने बताया कि परम सत्य प्रत्येक व्यक्ति के भीतर विद्यमान है और जब तक मनुष्य का ध्यान उस अविनाशी तत्व की ओर नहीं जाएगा, तब तक उसे वास्तविक शांति प्राप्त नहीं हो सकती।
डॉ. प्रेम रावत की प्रमुख उपलब्धियां
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| शांति संदेश यात्रा | 50 वर्षों से अधिक |
| कुल कार्यक्रम | 5632+ (दिसंबर 2023 तक) |
| सम्मान | मलेशिया बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड |
| प्रमुख पुस्तक | Hear Yourself (2021) |
पिछले पांच दशकों से डॉ. प्रेम रावत विश्वभर में शांति और आत्मबोध का संदेश दे रहे हैं। उन्हें उनके व्यापक योगदान के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया जा चुका है।
श्रद्धालुओं की प्रतिक्रिया
महोत्सव में उपस्थित श्रद्धालुओं ने कहा कि यह संदेश उनके जीवन के लिए अत्यंत प्रेरणादायी रहा। इससे उन्हें आंतरिक शांति, सकारात्मक सोच और जीवन को समझने की नई दिशा मिली है। कई श्रद्धालुओं ने इसे अपने जीवन का सौभाग्य बताया।
- आत्मिक शांति की अनुभूति
- जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण
- मानवता और सद्भाव का संकल्प
निष्कर्ष
झकरई गांव में आयोजित शांति महोत्सव न केवल एक धार्मिक आयोजन रहा, बल्कि यह आत्मचेतना और मानवीय मूल्यों को जागृत करने का माध्यम भी बना। डॉ. प्रेम रावत के संदेश ने श्रद्धालुओं को आंतरिक शांति और जीवन के वास्तविक उद्देश्य से जोड़ने का कार्य किया। शांति, प्रेम और सद्भाव के संकल्प के साथ महोत्सव का सफल समापन हुआ।
👉 आध्यात्मिक और सामाजिक कार्यक्रमों की खबरों के लिए हमारे व्हाट्सएप्प चैनल से जुड़ें – Web Varta
ये भी पढ़ें: “श्वास की कीमत को पहचानें, जीवन का मूल्य समझें” — डॉ. प्रेम रावत








