लखनऊ, राजनीतिक वार्ता | वेब वार्ता
उत्तर प्रदेश की राजनीति में बड़ा फेरबदल देखने को मिला है। पूर्व बसपा कैबिनेट मंत्री और वरिष्ठ नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने लखनऊ स्थित समाजवादी पार्टी मुख्यालय में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की मौजूदगी में पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली। उनके साथ तीन बार के विधायक अनीस अहमद खान उर्फ फूल बाबू सहित कुल सात नेताओं ने सपा का दामन थामा। इस घटनाक्रम को आगामी 2027 विधानसभा चुनावों से पहले सपा की रणनीति के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।
सपा मुख्यालय में हुआ औपचारिक शामिल होना
समाजवादी पार्टी मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान अखिलेश यादव ने सभी नेताओं को औपचारिक रूप से पार्टी की सदस्यता दिलाई। यह राजनीतिक बदलाव पहले से चर्चा में था, लेकिन रविवार को इसकी आधिकारिक घोषणा कर दी गई। नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने कहा कि उनकी विचारधारा सपा से मेल खाती है और वे PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) राजनीति को मजबूत करने के उद्देश्य से पार्टी में शामिल हुए हैं।
सपा में शामिल हुए प्रमुख नेता
| नाम | पूर्व भूमिका | राजनीतिक पृष्ठभूमि |
|---|---|---|
| नसीमुद्दीन सिद्दीकी | पूर्व कैबिनेट मंत्री | बसपा / कांग्रेस |
| अनीस अहमद खान (फूल बाबू) | तीन बार विधायक | बसपा |
| राजकुमार पाल | पूर्व विधायक | अपना दल (एस) |
| दीनानाथ कुशवाहा | पूर्व विधायक | क्षेत्रीय दल |
| डॉ. दानिश खान | पूर्व प्रत्याशी | AIMIM |
| पूनम पाल सहित | नेत्री | विभिन्न दल |
पार्टी में शामिल होने वालों में तीन महिला नेत्रियां भी शामिल हैं। इन नेताओं के आने से सपा के संगठनात्मक ढांचे को मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
नसीमुद्दीन सिद्दीकी का बयान
सपा की सदस्यता ग्रहण करने के बाद नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने कहा कि समाजवादी पार्टी ही वह मंच है, जहां सामाजिक न्याय और समावेशी राजनीति को मजबूती मिलती है। उन्होंने कहा कि वे पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक समाज के अधिकारों के लिए संघर्ष करते रहेंगे और पार्टी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।
अखिलेश यादव का स्वागत संदेश
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने नसीमुद्दीन सिद्दीकी और अन्य नेताओं का स्वागत करते हुए कहा कि अनुभवी और जनाधार वाले नेताओं के जुड़ने से पार्टी और अधिक मजबूत होगी। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी प्रदेश में सामाजिक न्याय और विकास की राजनीति को आगे बढ़ा रही है।
राजनीतिक महत्व और संकेत
नसीमुद्दीन सिद्दीकी का सपा में आना बसपा से सपा की ओर हो रहे राजनीतिक प्रवास का बड़ा संकेत माना जा रहा है। पूर्वांचल और मुस्लिम-दलित मतदाताओं में उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है। इससे सपा की PDA रणनीति को नई धार मिलने की संभावना है।
- बसपा के पुराने नेताओं का सपा की ओर झुकाव
- 2027 चुनाव से पहले संगठन को मजबूती
- PDA समीकरण को और सशक्त बनाने की रणनीति
बसपा पर बढ़ता दबाव
लगातार वरिष्ठ नेताओं के सपा में जाने से बसपा नेतृत्व पर दबाव बढ़ता जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह प्रवृत्ति यदि जारी रही, तो आगामी चुनावों में बसपा की रणनीति पर असर पड़ सकता है।
निष्कर्ष
नसीमुद्दीन सिद्दीकी समेत कई नेताओं का समाजवादी पार्टी में शामिल होना उत्तर प्रदेश की राजनीति में नए समीकरणों की ओर संकेत करता है। 2027 विधानसभा चुनाव से पहले यह घटनाक्रम सपा के लिए संजीवनी साबित हो सकता है। आने वाले दिनों में इसका प्रभाव प्रदेश की सियासत में और स्पष्ट रूप से दिखाई देगा।
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