योगेश्वर धाम में श्रीमद्भागवत कथा का पांचवां दिवस, माखन-चोरी लीला से भाव-विभोर हुए श्रद्धालु

हरदोई, लक्ष्मीकान्त पाठक | वेब वार्ता

जनपद हरदोई के ग्राम अटवा असिगांव स्थित योगेश्वर धाम में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिवस पर श्रद्धा, भक्ति और भावनाओं का अद्भुत संगम देखने को मिला। 10 फरवरी 2026 से प्रारंभ हुई इस कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु प्रतिदिन पहुंचकर आध्यात्मिक रस का आनंद ले रहे हैं।

आचार्या शिवानी मिश्रा कर रहीं कथा वाचन

कथा का वाचन ग्राम पिंपरी निवादा निवासी एवं वृन्दावन धाम से दीक्षित आचार्या शिवानी मिश्रा द्वारा किया जा रहा है। आयोजन मुख्य संत स्वामी जी के सान्निध्य एवं मार्गदर्शन में श्रद्धा और समर्पण भाव से संपन्न हो रहा है।

माखन-चोरी लीला का भावपूर्ण वर्णन

पांचवें दिवस की कथा में आचार्या शिवानी मिश्रा ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल-लीलाओं में अत्यंत लोकप्रिय माखन-चोरी प्रसंग का ओजस्वी और भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने बताया कि यह लीला केवल बाल-सुलभ चपलता नहीं, बल्कि भक्तों के निर्मल हृदय रूपी माखन को स्वीकार करने का दिव्य प्रतीक है।

कथा स्थल पर उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब

विवरणजानकारी
कथा प्रारंभ तिथि10 फरवरी 2026
कथा दिवसपांचवां दिवस
स्थानयोगेश्वर धाम, अटवा असिगांव
उपस्थितिसैकड़ों श्रद्धालु प्रतिदिन

गोपियों की स्नेहिल शिकायतें, यशोदा मैया का वात्सल्य और नटखट कन्हैया की लीलाओं का ऐसा सजीव चित्रण हुआ कि श्रद्धालु कभी हंसी से झूम उठे तो कभी भाव-विभोर होकर अश्रुपूरित हो गए।

भक्ति से सराबोर हुआ योगेश्वर धाम

कथा पंडाल में “राधे-राधे” के उद्घोष, मधुर भजनों की स्वर-लहरियां और शंखनाद से पूरा वातावरण ब्रजधाम की अनुभूति कराने लगा। श्रद्धालुओं ने भक्ति संगीत और कथा रस का भरपूर आनंद लिया।

  • मधुर भजनों की प्रस्तुति
  • भक्तिमय वातावरण
  • युवा वर्ग की सक्रिय सहभागिता

युवाओं में दिखी विशेष रुचि

आचार्या शिवानी मिश्रा की वाणी में शास्त्रीय गंभीरता, आध्यात्मिक गहराई और सरल प्रस्तुति का सुंदर समन्वय देखने को मिल रहा है। विशेष रूप से युवा वर्ग कथा से जुड़कर धर्म, संस्कृति और नैतिक मूल्यों की ओर प्रेरित हो रहा है।

आयोजकों ने किया सहभागिता का आह्वान

आयोजकों ने श्रद्धालुओं से शेष दिनों की कथा में अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर धर्मलाभ प्राप्त करने की अपील की है। यह आयोजन क्षेत्र में आध्यात्मिक चेतना और सांस्कृतिक जागरण का माध्यम बनता जा रहा है।

निष्कर्ष

योगेश्वर धाम में प्रवाहित श्रीमद्भागवत कथा की यह पावन धारा श्रद्धालुओं को आत्मिक शांति, भक्ति-भाव और जीवन मूल्यों से जोड़ रही है। माखन-चोरी लीला के माध्यम से प्रस्तुत श्रीकृष्ण की लीलाएं भक्तों के हृदय में गहरी छाप छोड़ रही हैं और क्षेत्र में आध्यात्मिक वातावरण को सशक्त बना रही हैं।

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