Thursday, February 12, 2026
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मीडिया स्वतंत्रता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम: मीडिया पारदर्शिता और जवाबदेही विधेयक लोकसभा में पेश

नई दिल्ली, नेशनल वार्ता | वेब वार्ता

मीडिया स्वतंत्रता और पत्रकारों के संवैधानिक अधिकारों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए इलाहाबाद (प्रयागराज) से सांसद उज्ज्वल रमन सिंह ने लोकसभा में “मीडिया पारदर्शिता (एंड अकाउंटेबिलिटी) बिल” को प्राइवेट मेंबर बिल के रूप में पेश किया है। यह विधेयक प्रेस क्लब ऑफ इंडिया (PCI) द्वारा तैयार किया गया है।

PCI ने किया स्वागत

प्रेस क्लब ऑफ इंडिया ने इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि यह कदम मीडिया स्वतंत्रता की गारंटी की दिशा में सार्थक प्रयास है। PCI ने सभी राजनीतिक दलों से अपील की है कि वे इस विधेयक का समर्थन करें ताकि इसे कानून का रूप दिया जा सके।

विधेयक के प्रमुख उद्देश्य

प्रस्तावित बिल का उद्देश्य मीडिया क्षेत्र में पारदर्शिता, जवाबदेही और पत्रकारों के अधिकारों की संवैधानिक सुरक्षा को मजबूत करना है।

प्रमुख प्रावधानउद्देश्यप्रभाव
मीडिया स्वामित्व पारदर्शितामालिकाना हक और फंडिंग का खुलासाबाहरी प्रभाव में कमी
जवाबदेही तंत्रनैतिक पत्रकारिता को बढ़ावाफेक न्यूज पर रोक
पत्रकारों के अधिकारअनुच्छेद 19(1)(A) की रक्षाअभिव्यक्ति की स्वतंत्रता सुदृढ़
राष्ट्रीय मीडिया परिषदस्वतंत्र फंडिंग तंत्रसंस्थागत मजबूती
  • मीडिया हाउसों के वित्तीय स्रोतों की पारदर्शिता।
  • डिजिटल और पारंपरिक मीडिया के लिए समान मानक।
  • पत्रकारों पर दबाव और दखल से सुरक्षा।

प्राइवेट मेंबर बिल का महत्व

यद्यपि प्राइवेट मेंबर बिल का कानून बनना सरकार के समर्थन पर निर्भर करता है, फिर भी ऐसे विधेयक संसद में महत्वपूर्ण बहस को जन्म देते हैं। वर्तमान परिप्रेक्ष्य में, जब डिजिटल मीडिया, आईटी नियमों और डेटा संरक्षण कानूनों को लेकर चिंताएं व्यक्त की जा रही हैं, यह प्रस्ताव एक व्यापक विमर्श की दिशा में कदम माना जा रहा है।

लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की मजबूती

PCI ने दोहराया कि वह संविधान के अनुच्छेद 19(1)(A) के तहत पत्रकारों के अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। यह विधेयक भारतीय लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को मजबूत और जवाबदेह बनाने की दिशा में सकारात्मक पहल के रूप में देखा जा रहा है।

निष्कर्ष

मीडिया पारदर्शिता और जवाबदेही विधेयक संसद में पेश होना मीडिया सुधारों पर राष्ट्रीय बहस को गति दे सकता है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विभिन्न राजनीतिक दल इस प्रस्ताव पर क्या रुख अपनाते हैं और क्या इसे व्यापक समर्थन मिल पाता है।

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