Saturday, February 14, 2026
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महोबा में मिड-डे मील में सनसनीखेज घोटाला: बच्चों को पानी में मिलाकर पिलाया गया दूध, वीडियो वायरल

महोबा, रिपोर्टर डेस्क | वेब वार्ता

उत्तर प्रदेश के महोबा जिले के ढिकवाहा गांव स्थित एक सरकारी प्राथमिक विद्यालय से मिड-डे मील से जुड़ा गंभीर और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। वायरल वीडियो में बच्चों को दिए जाने वाले दूध में बाल्टी भर पानी में मात्र दो पैकेट दूध मिलाकर परोसा जा रहा है। यह पूरी प्रक्रिया प्रधानाचार्या मोनिका सोनी की मौजूदगी में होने का आरोप है, जिससे शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं।

कैसे सामने आया मामला

गांव के एक स्थानीय व्यक्ति द्वारा बनाए गए वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि विद्यालय परिसर में खुलेआम दूध में अत्यधिक पानी मिलाया जा रहा है। यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, जिसके बाद मामला प्रशासन तक पहुंचा और जांच के आदेश दिए गए।

बच्चों की सेहत से खुला खिलवाड़

विशेषज्ञों के अनुसार, मिड-डे मील में दिया जाने वाला दूध बच्चों के पोषण और शारीरिक विकास के लिए अत्यंत आवश्यक होता है। लेकिन इस मामले में दूध को अत्यधिक पतला कर बच्चों को पिलाया गया, जिससे एनीमिया, कमजोरी और कुपोषण जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।

बिंदुविवरणस्थिति
स्थानढिकवाहा गांव, महोबासरकारी प्राथमिक विद्यालय
मामलादूध में अत्यधिक पानी मिलानावीडियो वायरल
आरोपप्रधानाचार्या व स्टाफ पर लापरवाहीजांच जारी
कार्रवाईबीएसए द्वारा जांच के आदेशप्रक्रियाधीन

प्रधानाचार्या और स्टाफ पर गंभीर आरोप

वायरल वीडियो में आरोप है कि प्रधानाचार्या मोनिका सोनी की मौजूदगी में यह कार्य किया गया। बताया जा रहा है कि स्कूल प्रशासन द्वारा मिड-डे मील के बजट में कटौती कर बच्चों को घटिया भोजन परोसा जा रहा था।

  • बाल्टी भर पानी में केवल दो पैकेट दूध मिलाया गया।
  • बच्चों को बिना गुणवत्ता जांच के दूध पिलाया गया।
  • विद्यालय प्रशासन पर नियमों की अनदेखी का आरोप।

प्रशासन हरकत में, जांच के निर्देश

वीडियो वायरल होने के बाद बीएसए राहुल मिश्रा ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच और सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ विभागीय व कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

निष्कर्ष

मिड-डे मील योजना का उद्देश्य बच्चों को बेहतर पोषण प्रदान करना है, लेकिन महोबा का यह मामला व्यवस्था में गहरी खामियों को उजागर करता है। यदि समय रहते कठोर कदम नहीं उठाए गए, तो ऐसे मामले बच्चों के भविष्य पर गंभीर प्रभाव डाल सकते हैं।

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