ललितपुर, आलोक चतुर्वेदी | वेब वार्ता
केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी द्वारा शिक्षकों के लिए टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) को अनिवार्य किए जाने संबंधी बयान के विरोध में ललितपुर में सैकड़ों शिक्षकों ने जोरदार प्रदर्शन किया। उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के आह्वान पर जिलाध्यक्ष राजेश लिटौरिया के नेतृत्व में गिन्नौट बाग मैदान में एकत्र होकर शिक्षकों ने मंत्री के बयान की प्रतियां जलाकर अपना आक्रोश जताया।
गिन्नौट बाग मैदान में जुटे सैकड़ों शिक्षक
प्रदर्शन के दौरान शिक्षकों ने कहा कि उनकी नियुक्ति कई वर्ष पूर्व तत्कालीन नियमों और योग्यताओं के आधार पर हुई थी। उस समय न तो आरटीई अधिनियम लागू था और न ही टीईटी की अनिवार्यता थी। ऐसे में वर्षों बाद नई शर्तें थोपना पूरी तरह अन्यायपूर्ण है।
शिक्षकों की मुख्य आपत्तियां
- नियुक्ति के समय टीईटी अनिवार्य नहीं थी
- 20-25 वर्ष बाद नई योग्यता थोपना अनुचित
- सेवा और पदोन्नति पर संकट
- सुप्रीम कोर्ट के आदेश से लाखों शिक्षक प्रभावित
देशभर के लाखों शिक्षक होंगे प्रभावित
वक्ताओं ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद केवल उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे देश के 20 लाख से अधिक शिक्षक प्रभावित हो रहे हैं। वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों को अचानक नई परीक्षा देने के लिए बाध्य करना न्यायसंगत नहीं है।
संसद और बयानों में विरोधाभास का आरोप
शिक्षकों ने आरोप लगाया कि जयंत चौधरी शिक्षकों से वार्ता के दौरान कुछ और कहते हैं, जबकि संसद में विपरीत बयान देते हैं। इससे शिक्षकों में असंतोष और अविश्वास बढ़ रहा है। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि जनप्रतिनिधियों का दायित्व है कि वे संसद में शिक्षकों के हितों की रक्षा करें।
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| स्थान | गिन्नौट बाग मैदान, ललितपुर |
| आयोजन | शिक्षक विरोध प्रदर्शन |
| मुद्दा | टीईटी अनिवार्यता |
| नेतृत्व | राजेश लिटौरिया |
| भागीदारी | सैकड़ों शिक्षक-शिक्षिकाएं |
संघ पदाधिकारियों ने रखी एकजुटता पर जोर
प्रदर्शन में जिला मंत्री अरुण गोस्वामी, कोषाध्यक्ष संतोष रजक सहित अन्य पदाधिकारियों ने शिक्षकों से एकजुट रहने की अपील की। वक्ताओं ने कहा कि जब तक मांगों पर विचार नहीं किया जाएगा, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
निष्कर्ष
ललितपुर में शिक्षकों का यह प्रदर्शन टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ बढ़ते असंतोष को दर्शाता है। शिक्षक संगठन सरकार से मांग कर रहे हैं कि वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों पर नई शर्तें न थोपी जाएं और उनके हितों की रक्षा सुनिश्चित की जाए।
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