बलरामपुर, क़मर खान | वेब वार्ता
बलरामपुर नगर के गेल्हापुर स्थित श्री उदासी संगत मंदिर परिसर में सत्संग सभागार, संत आवास एवं भंडारा हाल निर्माण कार्य का विधिवत शिलान्यास वैदिक मंत्रोच्चार और पूजन-अर्चन के साथ संपन्न हुआ। यह निर्माण कार्य हरिका रविंद्र नागेश्वर (HRN) सेवा फाउंडेशन के सौजन्य से कराया जा रहा है, जिससे मंदिर परिसर को आधुनिक एवं सुविधाजनक स्वरूप प्रदान किया जाएगा।
वैदिक विधि से हुआ भूमि पूजन
कार्यक्रम के दौरान परम पूज्य महंत बृजानन्द जी महाराज एवं नगर पालिका अध्यक्ष डॉ. धीरेन्द्र प्रताप सिंह ‘धीरू’ ने विधिवत भूमि पूजन कर निर्माण कार्य का शुभारंभ किया। वैदिक रीति-रिवाज से संपन्न इस धार्मिक अनुष्ठान में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और मंदिर विकास के इस पुनीत कार्य की भूरी-भूरी प्रशंसा की।
| निर्माण इकाई | उद्देश्य | लाभ |
|---|---|---|
| सत्संग सभागार | धार्मिक आयोजनों का संचालन | श्रद्धालुओं की बेहतर व्यवस्था |
| संत आवास | साधु-संतों का निवास | सुविधाजनक ठहराव |
| भंडारा हाल | प्रसाद एवं भोजन वितरण | व्यवस्थित सेवा व्यवस्था |
श्रद्धालुओं को मिलेंगी आधुनिक सुविधाएं
मंदिर परिसर में आधुनिक सुविधाओं से युक्त विशाल सत्संग सभागार एवं भंडारा हाल के निर्माण से दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर व्यवस्था उपलब्ध हो सकेगी। साथ ही संत आवास के निर्माण से साधु-संतों के ठहरने की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित होगी, जिससे धार्मिक आयोजनों का प्रभावी संचालन संभव होगा।
- श्रद्धालुओं के लिए सुव्यवस्थित बैठने की व्यवस्था
- भंडारे के लिए स्थायी एवं आधुनिक हाल
- संतों के लिए सुरक्षित एवं स्वच्छ आवास
- धार्मिक आयोजनों की क्षमता में वृद्धि
HRN सेवा फाउंडेशन की समाजसेवी भूमिका
HRN सेवा फाउंडेशन के पदाधिकारियों ने बताया कि संस्था समाजसेवा एवं धार्मिक स्थलों के विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही है। भविष्य में भी मंदिर विकास, जनकल्याण एवं धार्मिक आयोजनों के लिए सहयोग जारी रखा जाएगा। संस्था का उद्देश्य आध्यात्मिक और सामाजिक चेतना को सशक्त बनाना है।
निष्कर्ष
श्री गेल्हापुर मंदिर परिसर में सत्संग सभागार, संत आवास और भंडारा हाल निर्माण का शिलान्यास क्षेत्र के धार्मिक एवं सांस्कृतिक विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी और आध्यात्मिक गतिविधियों को नया विस्तार प्राप्त होगा। यह पहल समाज में धार्मिक एकता और सेवा भावना को और मजबूत करने में सहायक सिद्ध होगी।
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