कुशीनगर, ममता तिवारी | वेब वार्ता
उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले में किसानों की कृषि लागत कम करने और पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से नैनो उर्वरकों के उपयोग एवं महत्व पर आधारित एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम पडरौना बीज भंडार स्थित सभागार में आयोजित हुआ।
इफको के तत्वावधान में हुआ आयोजन
सोमवार को आयोजित इस कार्यशाला का आयोजन इफको के तत्वावधान में कृषि विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जिला कृषि अधिकारी डॉ. मेनका रहीं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ क्षेत्रीय प्रबंधक इफको गोरखपुर डॉ. विनोद कुमार सिंह ने की, जबकि संचालन क्षेत्र अधिकारी अनमोल मिश्रा द्वारा किया गया।
नैनो उर्वरकों से लागत में होगी कमी
वरिष्ठ क्षेत्रीय प्रबंधक डॉ. विनोद कुमार सिंह ने कहा कि नैनो उर्वरकों के प्रयोग से किसान अपनी खेती की लागत में उल्लेखनीय कमी ला सकते हैं।
उन्होंने बताया कि यूरिया और डीएपी के अत्यधिक उपयोग से जल, मृदा और पर्यावरण को नुकसान होता है, जिससे नैनो उर्वरकों के माध्यम से बचा जा सकता है।
मृदा और पर्यावरण संरक्षण पर जोर
क्षेत्र अधिकारी अनमोल मिश्रा ने नैनो उर्वरकों की आवश्यकता, प्रयोग विधि और फसलों पर होने वाले लाभों की विस्तार से जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि नैनो तकनीक के प्रयोग से मृदा स्वास्थ्य, जल प्रदूषण, पर्यावरण प्रदूषण और मानव स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों से बचाव संभव है।
- रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता में कमी
- मृदा की उर्वरता में सुधार
- पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा
रासायनिक उर्वरकों के बढ़ते प्रयोग पर चिंता
मुख्य अतिथि जिला कृषि अधिकारी डॉ. मेनका ने कहा कि किसान लगातार रासायनिक उर्वरकों का अधिक उपयोग कर रहे हैं, जिससे मृदा की उत्पादकता में गिरावट आ रही है।
उन्होंने किसानों से वैज्ञानिक पद्धति अपनाने और संतुलित उर्वरक प्रयोग पर जोर दिया।
अधिकारियों की रही सक्रिय सहभागिता
कार्यक्रम में भूमि संरक्षण अधिकारी सुदीप पटेल, अपर जिला कृषि अधिकारी संदीप यादव, लकी तिवारी तथा इफको के एसएफए अभिषेक दुबे, अंगद गिरी सहित कई अधिकारी उपस्थित रहे।
निष्कर्ष
नैनो उर्वरकों पर आधारित यह कार्यशाला किसानों और कृषि अधिकारियों के लिए आधुनिक, किफायती और पर्यावरण अनुकूल खेती की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुई है। इससे भविष्य में खेती को अधिक टिकाऊ और लाभकारी बनाया जा सकेगा।
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