लखनऊ, अजय कुमार | वेब वार्ता
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में मंगलवार को समाजवादी पार्टी की विधायक पल्लवी पटेल के नेतृत्व में UGC इक्विटी रेगुलेशन 2026 के समर्थन में एक बड़ा पैदल मार्च निकाला गया। विधानसभा की ओर बढ़ रहे इस मार्च को पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर रोक दिया, जिसके बाद कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच झड़प हो गई। इस दौरान पल्लवी पटेल को जबरन हिरासत में लिया गया, जिससे राजनीतिक माहौल और अधिक गरमा गया।
आईटी चौराहा से विधानसभा तक मार्च की योजना
UGC equity regulation 2026 लागू करो pic.twitter.com/wu3BxbO0PT
— Dr. Pallavi Patel (@pallavi_apnadal) February 10, 2026
यह मार्च दोपहर करीब 2:30 बजे आईटी चौराहा से शुरू हुआ था, जिसका उद्देश्य विधानसभा तक पहुंचकर UGC इक्विटी रेगुलेशन को लागू कराने की मांग उठाना था। पल्लवी पटेल ने दलित, पिछड़े और वंचित वर्गों के अधिकारों की रक्षा के नाम पर बड़ी संख्या में महिलाओं और कार्यकर्ताओं को एकजुट किया।
मार्च के दौरान “UGC इक्विटी रेगुलेशन लागू करो” जैसे नारे लगाए गए और सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की गई।
पुलिस बैरिकेडिंग पर रुका प्रदर्शन
रिजर्व पुलिस लाइन के पास पहुंचते ही पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर प्रदर्शनकारियों को रोक दिया। इसके बाद पल्लवी पटेल बैरिकेड पर चढ़ गईं और वहीं धरने पर बैठ गईं। करीब 15 मिनट तक पुलिस और नेताओं के बीच बातचीत हुई, लेकिन कोई सहमति नहीं बन सकी।
घटना का क्रमबद्ध विवरण
| चरण | विवरण |
|---|---|
| मार्च की शुरुआत | आईटी चौराहा से दोपहर 2:30 बजे |
| पुलिस रोक | रिजर्व पुलिस लाइन के पास बैरिकेडिंग |
| धरना | बैरिकेड पर चढ़कर बैठीं पल्लवी पटेल |
| हिरासत | झड़प के बाद पल्लवी व कार्यकर्ता हिरासत में |
| वर्तमान स्थिति | कार्यकर्ताओं से पूछताछ, राजनीतिक बयानबाजी तेज |
- महिलाओं की बड़ी भागीदारी रही
- पुलिस और कार्यकर्ताओं में धक्का-मुक्की
- कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल
UGC इक्विटी रेगुलेशन 2026 क्या है?
UGC इक्विटी रेगुलेशन 2026 को 13 जनवरी 2026 को अधिसूचित किया गया था। इसका उद्देश्य उच्च शिक्षा संस्थानों में जाति, लिंग और सामाजिक आधार पर होने वाले भेदभाव को रोकना है।
इस नियमावली के तहत हर विश्वविद्यालय में इक्विटी सेल का गठन, शिकायतों का 30 दिनों में निस्तारण और पीड़ितों को न्याय दिलाने की व्यवस्था की गई है।
समर्थन और विरोध की स्थिति
| पहलू | स्थिति |
|---|---|
| समर्थक | दलित-पिछड़े संगठन, सपा गठबंधन |
| विरोधी | कुछ ऊपरी जाति समूह, सामाजिक संगठन |
| विवाद | सुप्रीम कोर्ट द्वारा 29 जनवरी को स्टे |
| प्रभाव | लागू न होने से कैंपस में असंतोष |
राजनीतिक बयानबाजी और प्रतिक्रिया
सपा नेताओं ने इस कार्रवाई को “लोकतंत्र की हत्या” बताया है, जबकि राज्य सरकार ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने की मजबूरी का हवाला दिया है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार वंचित वर्गों की आवाज दबा रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला आगामी 2027 विधानसभा चुनावों से भी जुड़ सकता है और आने वाले दिनों में इस पर सियासत और तेज होगी।
निष्कर्ष
लखनऊ में पल्लवी पटेल के नेतृत्व में हुआ यह मार्च UGC इक्विटी रेगुलेशन को लेकर बढ़ते असंतोष और सामाजिक न्याय की मांग को दर्शाता है। पुलिस कार्रवाई और राजनीतिक प्रतिक्रिया से साफ है कि यह मुद्दा आने वाले समय में राज्य की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
ये भी पढ़ें: SIR में ‘फॉर्म-7’ को लेकर अखिलेश यादव का बड़ा आरोप, भाजपा पर वोट कटवाने की साजिश का दावा







