संजय कुमार शर्मा/वरिष्ठ पत्रकार
आजकल अपने पुराने मित्रों परिचितों के बारे में सुन कर और उनके हावभाव देखकर मुझे लगता है कि काश मैं भी उनके जैसा VIP होता। मेरे पास भी लंबी गाड़ी, बड़ा मकान, करोड़ो का न सही पर लाखों का बैंक बैलेंस होता। और अगर मेरे पास यह सब होता, तो शायद मैं वो नही होता, जो आज हूँ। न किसी का डर और न ही किसी प्रकार की उत्तेजना। मेरे पास जो है वह शायद काफी लोगो के पास नही होता है। सुकून, चैन, अच्छा परिवार और मन की शांति के साथ भरपूर नींद। कोई नेता के पीछे भाग रहा, कोई अधिकारी के पीछे भाग रहा है। और कोई अपने आप से भागने के साथ अपने मिलने वालों, परिचितों और मित्रो से भाग रहा है। इस भागमभाग का जब मैंने अध्यन किया तो पाया कि VIP भी कई प्रकार के होते है।
शरुआती VIP।
मध्यम VIP।
बड़े VIP।
और एक इन सबसे ऊपर VVIP।
शुरूआती VIP वो होते है जो कम व्यस्त रहते है, लोगो से मेलजोल बनाए रखते है और देश दुनिया से उनका वास्ता आपेक्षाकृत मध्यम रहता है। ऐसे लोग अन्य लोगो से समन्वय बनाने और मेलजोल रखने का प्रयास करते है।
मध्य VIP सामान्यतः बड़े VIP की तरह दिखने और दिखाने का प्रयास करते है। असल में वे अपने आप को बड़ा दिखाने और बनाने के प्रयास में उन बातों को भूल जाते है या यूँ कहे कि उनका ध्यान ही नही रहता कि आगे क्या करना है, किससे मिलना और किनसे नही मिलना है। इस श्रेणी में ऐसे कुछ लोगों को रखा जा सकता है, जो अपने आप में ही मस्त रहते है।
बड़े VIP में सामान्यतः उन लोगो को माना जाता है। जो शायद रहते तो आपके आसपास ही है पर वह ज्यादा लोगो से मेल जोल रखना नही चाहते। उनका अपना दायरा होता है जिसमे कुछ चुनिंदा लोग ही शामिल होते है। पहले तो आप उनके बीच पहुंच ही नही पाओगे, यदि आप किसी तरह पहुंच भी गये तो आप को एक घुटन सी महसूस होगी। अक्सर मध्यम VIP कहे जाने वाले लोग इस श्रेणी में अपनी जगह बनाने का प्रयास करते है। इस प्रयास में उन्हें कई बार आत्म ग्लानि का भी सामना करना पड़ जाता है।
VVIP श्रेणी को सबसे खास कहा और माना जाता है। इस श्रेणी के लिए न तो योग्यता की जरूरत है और न ही ज्ञान की। इसे एक लाइन में कहना चाहिए कि VVIP बनने के किये व्यक्ति का भाग्य उसके साथ हो और जनता के बीच अपनी अच्छी बुरी बातो को निर्भीक के साथ रख सके और वाक्पटुता में निपुण होना अनिवार्य होता है। वैसे तो हम किसी को भी VIP मान लेते है। पर किसी को VVIP की श्रेणी में मानना और रखना काफी कठिनाइ भरा काम है।
VVIP बनने की प्रक्रिया अपने शब्द और संबोधन की तरह बड़ी है। एक सामान्य व्यक्ति को पहले VIP बनना पड़ता है और फिर सभी बाधाओं को पर कर सीढियो पर पैर रख कर बड़े VIP वाले मुकाम को लांघना पड़ता है।
वैसे इस श्रेणी में सत्ता दल के कुछ नेता, मंत्री और देश के चुनिंदा लोगो को ही माना जाता है।।
जिस तरह बेहतर और बहुत बेहतर के बीच का अंतर बता पाना जितना मुश्किल है। उसके ठीक वैसे ही VIP से VVIP तक पहुंच बनाने का सफर लंबा और जोखिम भरा है।
आज के दौर में हर कोई VIP और VVIP बनने की दौड़ में शामिल होना चाहता है। इस दौड़ में सत्ता के कुछ दलाल और कुछ ऐसे लोग भी शामिल होना चाहते है जिनका VIP होना बेहद खतरनाक साबित होता है।
VIP लोगो से मिलना और उनसे बात करना कई लोगो के लिए उत्साहवर्धक और गरिमापूर्ण दिखाई देता है। इस मेल मिलाप के पीछे उनके छिपे एजेंडे भी हो सकते है। पर कुछ ऐसे भी होते है जो अकारण ही VIP से मिलने और मेलजोल रखने का प्रयास करते है।
इसी मंथन और जद्दोजहद को देख कर मैं अपने आप को संतोषी मान लेता हूं। और ईश्वर को धन्यवाद देता हूं कि मैं VIP नही हूँ। न मैं किसी से मिलने से इंकार करता हूँ। मैं सभी के लिए खुले दरवाजे की तरह उपलब्ध हूँ।
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