कुशीनगर, ममता तिवारी | वेब वार्ता
उत्तर प्रदेश के कुशीनगर स्थित महापरिनिर्वाण मंदिर परिसर में शनिवार को तीन कश्मीरी युवकों को संदिग्ध समझकर लोगों ने पुलिस के हवाले कर दिया। स्थानीय लोगों को उनके हाव-भाव, पहनावे और भाषा के कारण शक हुआ, जिसके बाद पर्यटक पुलिस ने उन्हें अभिरक्षा में लेकर पूछताछ की। जांच में सभी युवक निर्दोष पाए गए, जिसके बाद उन्हें छोड़ दिया गया।
मंदिर परिसर में संदिग्ध गतिविधि पर हुआ संदेह
शनिवार दोपहर करीब दो बजे महापरिनिर्वाण मंदिर परिसर में तीन युवक अलग वेशभूषा में घूमते नजर आए। उनकी भाषा और रहन-सहन स्थानीय लोगों से अलग प्रतीत हो रही थी।
कुछ लोगों ने उनसे बातचीत की, जिसके बाद संदेह और गहराता गया। धीरे-धीरे मौके पर भीड़ जमा हो गई और युवकों को पाकिस्तानी नागरिक समझकर घेर लिया गया।
लोगों ने पुलिस को सौंपा
स्थिति बिगड़ने से पहले स्थानीय लोगों ने मामले की सूचना पर्यटक पुलिस को दी। पुलिस मौके पर पहुंची और तीनों युवकों को अपनी अभिरक्षा में लेकर थाने ले गई।
इसके बाद उनकी पहचान और गतिविधियों की विस्तृत जांच शुरू की गई।
युवकों की पहचान और पृष्ठभूमि
| नाम | पिता का नाम | निवास स्थान | राज्य |
|---|---|---|---|
| अब्बास | गुलाम | अजस, बांदीपुरा | जम्मू-कश्मीर |
| मुहम्मद नासिर | रमजान | अजस, बांदीपुरा | जम्मू-कश्मीर |
| ओबैद | असरफ | अजस, बांदीपुरा | जम्मू-कश्मीर |
पूछताछ में तीनों युवकों ने बताया कि वे जम्मू-कश्मीर के बांदीपुरा जिले के निवासी हैं और कैटरिंग कार्य से जुड़े हुए हैं।
टेंट मालिक से भी की गई पुष्टि
युवकों ने पुलिस को बताया कि उन्हें सलमान उर्फ सब्बू निवासी मदार खास, गोरखपुर द्वारा कुशीनगर बुलाया गया था। वे रामकोला क्षेत्र के एक टेंट व्यवसायी के यहां कार्यरत हैं।
पुलिस ने टेंट मालिक से भी संपर्क कर जानकारी ली, जिन्होंने बताया कि तीनों युवक पिछले तीन वर्षों से उनके यहां कार्य कर रहे हैं और उनके खिलाफ कभी कोई शिकायत नहीं मिली है।
पुलिस जांच में सभी तथ्य सही पाए गए
पर्यटक पुलिस ने युवकों के पहचान पत्रों की जांच की और संबंधित दस्तावेजों का सत्यापन किया। सभी तथ्य सही पाए जाने के बाद उन्हें छोड़ दिया गया।
पुलिस अधिकारियों ने लोगों से अपील की कि किसी को संदेह के आधार पर दोषी ठहराने से पहले प्रशासन को सूचना दें और कानून अपने हाथ में न लें।
- आईडी कार्ड और दस्तावेजों की जांच
- नियोक्ता से पुष्टि
- यात्रा और कार्य संबंधी जानकारी का सत्यापन
- पूछताछ के बाद रिहाई
निष्कर्ष
कुशीनगर में हुई यह घटना सतर्कता के साथ-साथ सामाजिक समझदारी की भी आवश्यकता को दर्शाती है। बिना पुष्टि के किसी पर संदेह करना सामाजिक तनाव को बढ़ा सकता है। पुलिस की समय पर कार्रवाई से स्थिति सामान्य बनी रही और निर्दोष युवकों को राहत मिली।
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