कुशीनगर, ममता तिवारी | वेब वार्ता
उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के खड्डा तहसील कार्यालय में तैनात एक संविदाकर्मी पर एसडीएम के डिजिटल हस्ताक्षर का दुरुपयोग कर धोखाधड़ी करने का गंभीर आरोप सामने आया है। राजस्व निरीक्षक की तहरीर पर पुलिस ने आरोपी कंप्यूटर ऑपरेटर के खिलाफ कूट रचना और धोखाधड़ी समेत विभिन्न धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की है।
धान खरीद प्रक्रिया में किया गया फर्जीवाड़ा
पुलिस के अनुसार, नगर पंचायत खड्डा में तैनात कंप्यूटर ऑपरेटर अरविंद रावत को तहसील के भूलेख कार्यालय में संबद्ध किया गया था। उसे धान क्रय के लिए किसानों के आवेदन के सत्यापन की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
आरोपी ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया में तहसीलदार और एसडीएम के डिजिटल हस्ताक्षर का गलत इस्तेमाल कर सत्यापन रिपोर्ट जारी करता था।
दूसरे जिले के किसानों के नाम से हुआ पंजीकरण
जांच में सामने आया कि आरोपी ने दूसरे जिलों के किसानों के नाम पर धान बिक्री का पंजीकरण किया और अभिलेखों में भी हेराफेरी की।
कई मामलों में लेखपाल स्तर पर जांच लंबित होने के बावजूद आरोपी ने गलत रिपोर्ट लगाकर आवेदन स्वीकृत कर दिए।
मामले से जुड़ी मुख्य जानकारी
| विवरण | जानकारी | टिप्पणी |
|---|---|---|
| आरोपी | अरविंद रावत | संविदा कंप्यूटर ऑपरेटर |
| कार्यालय | खड्डा तहसील | कुशीनगर |
| आरोप | डिजिटल हस्ताक्षर का दुरुपयोग | धोखाधड़ी व कूटरचना |
| कार्रवाई | प्राथमिकी दर्ज | विवेचना जारी |
एसडीएम की जांच में हुआ खुलासा
मामले के सामने आने के बाद एसडीएम ने आंतरिक जांच कराई, जिसमें डिजिटल हस्ताक्षर के दुरुपयोग और लापरवाही की पुष्टि हुई।
इसके बाद राजस्व निरीक्षक को प्राथमिकी दर्ज कराने के निर्देश दिए गए।
पुलिस ने शुरू की विवेचना
खड्डा थाना प्रभारी निरीक्षक ने बताया कि आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी, कूटरचना और आईटी से जुड़े अपराधों में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।
मामले की विस्तृत विवेचना की जा रही है और सभी संबंधित अभिलेखों की जांच की जा रही है।
- डिजिटल दस्तावेजों की फॉरेंसिक जांच
- धान खरीद से जुड़े रिकॉर्ड की पड़ताल
- अन्य कर्मचारियों की भूमिका की जांच
- आर्थिक नुकसान का आकलन
संविदा सेवा समाप्त करने की कार्रवाई
एसडीएम राम बीर ने बताया कि जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद संबंधित फर्म को पत्र भेजकर आरोपी की संविदा सेवा समाप्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इस प्रकार की अनियमितताओं को किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
निष्कर्ष
खड्डा तहसील में सामने आया यह मामला प्रशासनिक प्रणाली में डिजिटल सुरक्षा और निगरानी की आवश्यकता को उजागर करता है। समय रहते की गई कार्रवाई से सरकारी व्यवस्था में पारदर्शिता बनाए रखने का प्रयास किया गया है। अब जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि इस फर्जीवाड़े से कितना नुकसान हुआ और इसमें अन्य लोग भी शामिल थे या नहीं।
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