दुर्ग/लखनऊ, डेस्क | वेब वार्ता
शब-ए-बारात का पावन पर्व देशभर में मुस्लिम समाज द्वारा पूरी अकीदत, एहतराम और सादगी के साथ मनाया गया। इस अवसर पर मस्जिदों और कब्रिस्तानों में विशेष सजावट की गई, जबकि लोगों ने पूरी रात इबादत, तौबा और दुआओं में गुजारी। शब-ए-बारात को इस्लाम में अल्लाह की माफी, रहमत और फैसले की रात माना जाता है।
कब्रिस्तानों में उमड़ी भीड़, मरहूमीन के लिए की गई दुआ
छत्तीसगढ़ के दुर्ग और भिलाई सहित विभिन्न शहरों में कब्रिस्तानों में बड़ी संख्या में लोगों की आमद देखी गई। भिलाई स्थित कब्रिस्तान में विशेष इंतजाम किए गए थे, जहां लोगों ने अपने मरहूम परिजनों की कब्रों पर फूल चढ़ाए और फातेहा पढ़कर मग़फिरत की दुआ मांगी। इस मौके पर कब्रिस्तान परिसर में तकरीरी कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया।
उलेमाओं ने शब-ए-बारात के महत्व पर डाली रोशनी
आयोजित तकरीरी कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों से आए उलेमाओं ने शिरकत की और शब-ए-बारात की धार्मिक एवं आध्यात्मिक अहमियत पर विस्तार से प्रकाश डाला। वक्ताओं ने कहा कि यह रात आत्ममंथन, गुनाहों से तौबा और अच्छे कार्यों का संकल्प लेने की रात है।
इमाम का बयान: दुआओं की कबूलियत की रात
भिलाई जामा मस्जिद के इमाम हाफिज़ मोहम्मद इक़बाल अंजुम ने बताया कि इस्लाम में शब-ए-बारात का विशेष महत्व है। उन्होंने कहा कि इस रात मांगी गई दुआओं को अल्लाह कबूल करता है और अपने बंदों पर रहमत नाज़िल करता है। मुस्लिम समाज ने पूरी रात इबादत में बिताकर गुनाहों से तौबा की और बेहतर भविष्य के लिए दुआएं मांगीं।
लखनऊ में रूहानी माहौल, रोशनी से सजे इमामबाड़े
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में भी शब-ए-बारात अकीदत के साथ मनाई गई। शहर के इमामबाड़ों और मस्जिदों को रंग-बिरंगी रोशनी से सजाया गया, जिससे माहौल बेहद रूहानी नजर आया। बड़ी संख्या में लोग रातभर इबादत और दुआओं में मशगूल रहे। इस मौके पर धर्म गुरु मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने सब को मुबारकबाद दी और लोगों को शान्ति और सद्भाव के साथ मनाने का पैग़ाम दिया।
शब-ए-बारात: धार्मिक महत्व और आयोजन
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| तिथि | शाबान माह की 15वीं रात |
| धार्मिक महत्व | अल्लाह की माफी और रहमत की रात |
| मुख्य गतिविधियां | इबादत, दुआ, फातेहा, तौबा |
| विशेष स्थल | मस्जिदें, कब्रिस्तान, इमामबाड़े |
| अन्य आयोजन | शिया समुदाय द्वारा 12वें इमाम का यौम-ए-पैदाइश |
भीड़ को देखते हुए ट्रैफिक प्रबंधन
लखनऊ सहित कई शहरों में कब्रिस्तानों और मस्जिदों में उमड़ी भीड़ को देखते हुए यातायात पुलिस द्वारा ट्रैफिक डायवर्जन और सुरक्षा व्यवस्था की गई थी, जिससे श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
निष्कर्ष
शब-ए-बारात का पर्व देशभर में धार्मिक श्रद्धा, भाईचारे और आत्मिक शांति के साथ मनाया गया। इबादत, दुआ और तौबा के माध्यम से लोगों ने न केवल अपने लिए, बल्कि समाज और मानवता की भलाई के लिए भी दुआएं मांगीं। यह पर्व आपसी सौहार्द और आध्यात्मिक चेतना का सशक्त प्रतीक बनकर सामने आया।
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