Sunday, February 1, 2026
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बजट 2026 में टैक्सपेयर्स की उम्मीदों पर पानी, टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं

नई दिल्ली, डेस्क | वेब वार्ता

केंद्रीय बजट 2026-27 में इनकम टैक्स को लेकर आम करदाताओं को किसी बड़ी राहत की उम्मीद थी, लेकिन वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया। सरकार ने इस बजट में टैक्स सिस्टम में स्थिरता बनाए रखने पर जोर दिया है, जिससे टैक्सपेयर्स को फिलहाल कोई सीधी राहत नहीं मिली।

टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं

बजट 2026 में सरकार ने इनकम टैक्स स्लैब को यथावत रखा है। जो करदाता पुरानी टैक्स व्यवस्था को चुनते हैं, उनके लिए टैक्स फ्री इनकम की सीमा अब भी 2.5 लाख रुपये ही है। हालांकि, इनकम टैक्स एक्ट की धारा 87A के तहत 5 लाख रुपये तक की वार्षिक आय पर पूरी टैक्स छूट पहले की तरह जारी रहेगी।

नई टैक्स व्यवस्था में भी कोई राहत नहीं

नई टैक्स व्यवस्था को अपनाने वाले करदाताओं के लिए भी कोई बदलाव नहीं किया गया है। इस व्यवस्था के तहत 4 लाख रुपये तक की आय टैक्स फ्री बनी हुई है। वहीं, धारा 87A के अंतर्गत सैलरी पाने वाले व्यक्ति 12.75 लाख रुपये तक और अन्य करदाता 12 लाख रुपये तक की आय पर टैक्स राहत का लाभ उठा सकते हैं।

रिवाइज्ड रिटर्न फाइल करने की समय-सीमा बढ़ी

हालांकि टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया गया, लेकिन सरकार ने करदाताओं को रिवाइज्ड इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करने के लिए थोड़ी राहत जरूर दी है। अब रिवाइज्ड रिटर्न फाइल करने की अंतिम तिथि 31 दिसंबर से बढ़ाकर 31 मार्च कर दी गई है। इससे उन करदाताओं को फायदा होगा, जिन्हें रिटर्न में सुधार के लिए अतिरिक्त समय की जरूरत होती है।

स्टैंडर्ड डिडक्शन में भी कोई बदलाव नहीं

बजट 2026 में स्टैंडर्ड डिडक्शन को लेकर भी टैक्सपेयर्स को निराशा हाथ लगी है। सरकार ने इसे 75,000 रुपये पर ही बरकरार रखा है। उम्मीद जताई जा रही थी कि इसमें बढ़ोतरी हो सकती है, लेकिन इस मोर्चे पर भी कोई राहत नहीं दी गई।

  • इनकम टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं
  • पुरानी और नई टैक्स व्यवस्था दोनों यथावत
  • रिवाइज्ड रिटर्न की समय-सीमा 31 मार्च तक बढ़ी
  • स्टैंडर्ड डिडक्शन 75,000 रुपये ही रहेगा

कुल मिलाकर, बजट 2026 में टैक्सपेयर्स को किसी बड़ी राहत की जगह टैक्स सिस्टम में स्थिरता का संदेश मिला है। सरकार का मानना है कि बार-बार बदलाव से बचकर एक स्थिर और पूर्वानुमेय टैक्स व्यवस्था ही करदाताओं और अर्थव्यवस्था दोनों के लिए बेहतर है।

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