लखनऊ, अजय कुमार | वेब वार्ता
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संत शिरोमणि सतगुरु श्री रविदास जी महाराज की जयंती के अवसर पर प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि संत रविदास जी के विचार आज भी समाज को दिशा देने वाले, प्रेरणादायी और प्रासंगिक हैं।
कालातीत और सार्वभौमिक हैं संत रविदास जी के विचार
मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि संत रविदास जी के विचार कालातीत, सार्वभौमिक और मानव कल्याण से प्रेरित हैं। उन्होंने सामाजिक समरसता, समानता और मानवीय गरिमा जैसे मूल्यों को अपनी वाणी और कर्म के माध्यम से जन-जन तक पहुंचाया। सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध उनके विचार आज भी समाज को जागृत और प्रेरित करते हैं।
काशी में स्थित है संत रविदास जी की जन्मस्थली
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यह उत्तर प्रदेश के लिए गौरव का विषय है कि संत रविदास जी की जन्मस्थली सीर गोवर्धन, प्राचीन एवं सांस्कृतिक नगरी काशी में स्थित है। काशी ने भारत की संत परंपरा को नई चेतना और वैचारिक ऊर्जा प्रदान की है। उन्होंने संत रविदास जी के प्रसिद्ध कथन “मन चंगा तो कठौती में गंगा” का उल्लेख करते हुए कहा कि यह कथन आंतरिक पवित्रता, नैतिकता और आत्मशुद्धि का सशक्त संदेश देता है।
माघ पूर्णिमा और संत रविदास जयंती का विशेष महत्व
मुख्यमंत्री ने कहा कि माघ पूर्णिमा के पावन अवसर पर ही संत रविदास जी का जन्म हुआ था, जिससे यह तिथि आध्यात्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण बन जाती है। इस अवसर पर प्रयागराज में त्रिवेणी संगम सहित पवित्र नदियों में स्नान-दान का विशेष महत्व है।
माघ मेला समरसता और आस्था का महापर्व
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि प्रयागराज में चल रहा सुव्यवस्थित माघ मेला समरसता, आस्था और भारतीय आध्यात्मिक परंपरा का अद्वितीय संगम है। देश-विदेश से आए श्रद्धालु यहां साधना, सेवा और आत्मिक शुद्धि के भाव से पवित्र स्नान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि माघ मेला करोड़ों श्रद्धालुओं को जोड़ने वाला सामुदायिक समरसता का महापर्व है, जहां सभी जाति और समुदाय एक साथ समानता और सद्भाव का अनुभव करते हैं।
- संत रविदास जी के विचार समाज के लिए प्रेरणास्रोत
- काशी स्थित जन्मस्थली पर प्रदेश को गर्व
- माघ पूर्णिमा और माघ मेले का विशेष आध्यात्मिक महत्व
मुख्यमंत्री ने माघ पूर्णिमा के अवसर पर संगम में स्नान करने वाले श्रद्धालुओं और कल्पवासियों के सुख, स्वास्थ्य और मंगलमय जीवन की कामना की। उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील की कि पवित्र स्नान और धार्मिक अनुष्ठानों के दौरान स्वच्छता, अनुशासन और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें, ताकि यह आस्था का महापर्व सुरक्षित, सुव्यवस्थित और सौहार्दपूर्ण वातावरण में सम्पन्न हो सके।
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