भिंड/दबोह, मुकेश शर्मा | वेब वार्ता
भिंड जिले के दबोह क्षेत्र में स्थित प्राचीन शक्ति पीठ माँ रेहकोला देवी उर्फ माँ रणकौशला देवी का जन्मोत्सव इस वर्ष भी अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ मनाया गया। इस पावन अवसर पर मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश के सीमावर्ती जिलों से हजारों श्रद्धालु मंदिर परिसर में दर्शन एवं पूजन के लिए पहुंचे।
विधि-विधान से हुआ अभिषेक, जन्मोत्सव में दिखा आस्था का संगम
जन्मोत्सव कार्यक्रम की शुरुआत मंदिर के मुख्य पुजारी हलधर पांडा जी द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के साथ अभिषेक पूजन से की गई। इसके पश्चात माँ रणकौशला देवी को विशेष श्रृंगार अर्पित किया गया। धार्मिक परंपरा के अनुसार जन्मोत्सव के अवसर पर केक काटकर आयोजन मनाया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
ग्यारहवीं शताब्दी से जुड़ा है मंदिर का ऐतिहासिक महत्व
जानकारी के अनुसार माँ रणकौशला देवी का यह मंदिर लगभग ग्यारहवीं शताब्दी पुराना है। मान्यता है कि इसकी स्थापना आल्हा-उदल के भाई एवं सिरसा नरेश वीर मलखान द्वारा कराई गई थी। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि माँ के दरबार में सच्चे मन से की गई प्रार्थना अवश्य फलित होती है।
यज्ञ, हवन और विशाल भंडारे का आयोजन
जन्मोत्सव के अवसर पर मंदिर परिसर में यज्ञ, हवन एवं अन्य धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए। इसके साथ ही विशाल भंडारे का आयोजन भी किया गया, जिसमें नगर सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से आए श्रद्धालुओं ने प्रसादी ग्रहण की। आयोजन को सफल बनाने में स्थानीय श्रद्धालुओं और सेवाभावी संस्थाओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
संतान प्राप्ति और रोग निवारण की है विशेष मान्यता
पुजारी हलधर पांडा जी ने बताया कि माँ रणकौशला देवी के दरबार में निसंतान दंपत्तियों को संतान प्राप्ति का आशीर्वाद मिलने की विशेष मान्यता है। श्रद्धालुओं का यह भी विश्वास है कि यदि लगातार तीन माह तक सोमवार के दिन विशेष पूजा-अर्चना की जाए, तो गंभीर बीमारियों से भी राहत मिलती है।
स्थानीय मान्यताओं से जुड़ी है पीढ़ियों पुरानी आस्था
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार आज भी वीर मलखान और उनकी पत्नी गज मोतिन सूक्ष्म रूप में माँ के दर्शन के लिए मंदिर परिसर में आते हैं। इस मान्यता को लेकर श्रद्धालुओं में गहरी आस्था देखने को मिलती है, जो पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही है।
- मध्यप्रदेश-उत्तरप्रदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति
- अभिषेक, यज्ञ और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन
- विशाल भंडारे में श्रद्धालुओं ने ग्रहण की प्रसादी
जन्मोत्सव के दौरान पूरे मंदिर परिसर में भक्ति, श्रद्धा और उत्साह का वातावरण देखने को मिला। श्रद्धालुओं ने माँ के जयकारों के साथ पूजा-अर्चना कर क्षेत्र की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की।
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