लखनऊ, अजय कुमार | वेब वार्ता
पत्रकारिता की पहचान, गरिमा और एकता को पुनः स्थापित करने की दिशा में शुक्रवार को लखनऊ स्थित विधान भवन के सामने एक संगठित और अनुशासित दृश्य देखने को मिला। उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति (पुनर्गठित) के संयोजक वरिष्ठ पत्रकार प्रभात त्रिपाठी के आह्वान पर बड़ी संख्या में पत्रकार एकजुट हुए और ड्रेस कोड अभियान के माध्यम से चौथे स्तंभ की सामूहिक चेतना का प्रदर्शन किया।
ड्रेस कोड अभियान बना पत्रकारों की एकता का प्रतीक
इस अवसर पर संयोजक प्रभात त्रिपाठी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ड्रेस कोड अभियान किसी विचारधारा को थोपने का प्रयास नहीं है, बल्कि यह पत्रकारों के बीच अनुशासन, सम्मान और सामाजिक पहचान को सुदृढ़ करने की सकारात्मक पहल है। उन्होंने कहा कि सहमति और असहमति लोकतंत्र की आत्मा है, लेकिन आपसी कटुता, कटाक्ष और व्यक्तिगत आक्षेप पत्रकारिता की साख को कमजोर करते हैं।
पहले अपनी मर्यादा और एकजुटता आवश्यक
प्रभात त्रिपाठी ने कहा कि यदि पत्रकार समाज में चौथे स्तंभ को उसका सम्मानजनक स्थान दिलाना चाहता है, तो सबसे पहले आपसी एकजुटता और मर्यादा को अपनाना होगा। विचारधाराएं अलग हो सकती हैं, मत भिन्न हो सकते हैं, लेकिन हम सभी सच के पक्षधर और समाज के जिम्मेदार प्रहरी हैं। एकता ही पत्रकारों की सबसे बड़ी ताक़त है।
- ड्रेस कोड के माध्यम से अनुशासन और पहचान का संदेश
- पत्रकारों के अधिकार और सम्मान के लिए सामूहिक एकजुटता
- चौथे स्तंभ की गरिमा को सशक्त करने का संकल्प
विधान भवन के सामने दिखी संगठित पत्रकारिता
लखनऊ के पत्रकारों ने विधान भवन के सामने एकत्र होकर यह स्पष्ट संदेश दिया कि पत्रकार समाज बिखरा हुआ नहीं है, बल्कि समय आने पर अपनी पहचान और गरिमा के लिए संगठित होकर खड़ा हो सकता है। ड्रेस कोड में पहुंचे पत्रकारों ने यह साबित किया कि वे न केवल समाज का शिक्षित वर्ग हैं, बल्कि अनुशासन और संयम के साथ अपनी बात रखने की क्षमता भी रखते हैं।
निष्कर्ष
कार्यक्रम के अंत में प्रभात त्रिपाठी ने सभी पत्रकार साथियों से अपील की कि यह अभियान किसी व्यक्ति विशेष के लिए नहीं, बल्कि पत्रकारिता की सामूहिक पहचान के लिए है। उन्होंने इसे पत्रकारिता की गरिमा स्थापित करने का अभियान बताते हुए अधिक से अधिक सहभागिता का आह्वान किया। आयोजन ने यह स्पष्ट कर दिया कि जब कलम एकजुट होती है, तो उसकी ताक़त समाज को दिशा देने में सक्षम होती है।
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