Sunday, February 1, 2026
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तीन तलाक पर शिया संगठनों का विरोध, मौलाना यासूब अब्बास बोले– शरीयत के खिलाफ प्रथाएं अस्वीकार्य

लखनऊ, अजय कुमार | वेब वार्ता

तीन तलाक के मामलों में शिया मुसलमानों के खिलाफ हो रही कानूनी कार्रवाई को लेकर लखनऊ में शिया संगठनों ने विरोध दर्ज कराया है। इस संबंध में अफ़हाम-ए-ज़मा सोसाइटी के प्रतिनिधिमंडल ने शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव मौलाना यासूब अब्बास को ज्ञापन सौंपते हुए शिया शरीयत के अनुसार तलाक की प्रक्रिया को समझने और गलत परंपराओं पर रोक लगाने की मांग की।

शरीयत के नाम पर गलत प्रथाओं का आरोप

इस अवसर पर मौलाना यासूब अब्बास ने कहा कि कुछ मौलवी शरीयत को धंधा बना रहे हैं और पैसे लेकर बिना दोनों पक्षों की बात सुने तलाक और खुला पढ़ा रहे हैं, जो कि शिया शरीयत के स्पष्ट रूप से खिलाफ है। उन्होंने कहा कि इस तरह की प्रथाएं समाज में भ्रम और अन्याय को बढ़ावा दे रही हैं।

शिया शरीयत में तलाक की प्रक्रिया स्पष्ट

मौलाना यासूब अब्बास ने स्पष्ट किया कि शिया शरीयत में तलाक की एक निश्चित और अनुशासित प्रक्रिया है, जिसका पालन अनिवार्य है। बिना निर्धारित शर्तों के दिया गया तलाक शरीयत के अंतर्गत मान्य नहीं माना जा सकता।

बिंदुशिया शरीयत के अनुसार स्थिति
तलाक के गवाहदो गवाहों की उपस्थिति अनिवार्य
दोनों पक्षों की बातपति और पत्नी दोनों को सुना जाना आवश्यक
गलत परंपराएंकिसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं

कानूनी कार्रवाई पर जताई आपत्ति

शिया संगठनों का कहना है कि शिया और सुन्नी समुदायों की शरीयत में तलाक की प्रक्रियाएं अलग-अलग हैं, इसके बावजूद शिया मामलों में भी बिना इस भिन्नता को समझे कानूनी कार्रवाई की जा रही है, जो न्यायसंगत नहीं है। उन्होंने मांग की कि शिया शरीयत की मान्यताओं को ध्यान में रखते हुए ही किसी भी प्रकार की कार्रवाई की जाए।

बैठक बुलाने की घोषणा

मौलाना यासूब अब्बास ने बताया कि ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड इस मुद्दे पर शीघ्र ही एक बैठक आयोजित करेगा, जिसमें मौजूदा परिस्थितियों, कानूनी पहलुओं और समाज में फैल रही गलत प्रथाओं पर विस्तार से चर्चा की जाएगी तथा आगे की रणनीति तय की जाएगी।

निष्कर्ष

तीन तलाक को लेकर उठे इस मुद्दे ने शिया समाज में शरीयत की सही व्याख्या और उसके पालन को लेकर नई बहस को जन्म दिया है। शिया संगठनों का कहना है कि धर्म के नाम पर गलत परंपराओं को बढ़ावा देना न तो समाज के हित में है और न ही न्याय की भावना के अनुरूप। आने वाले दिनों में शिया पर्सनल लॉ बोर्ड की बैठक के बाद इस विषय पर आगे की दिशा स्पष्ट होने की संभावना है।

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