अयोध्या रेप केस में बड़ा मोड़, SP नेता मुईद खान बेगुनाह साबित, नौकर को दोषी ठहराया

अयोध्या, वेब डेस्क | वेब वार्ता

उत्तर प्रदेश के अयोध्या जनपद से एक अहम और चर्चित मामले में बड़ा न्यायिक फैसला सामने आया है। साल 2024 में नाबालिग से दुष्कर्म के आरोप में घिरे समाजवादी पार्टी (SP) के नेता मुईद खान को अदालत ने बेगुनाह करार देते हुए बरी कर दिया है। वहीं, इस मामले में नौकर राजू खान को दोषी पाया गया है, जिसकी सजा का ऐलान 29 जनवरी को किया जाएगा।

भदरसा क्षेत्र का मामला, 2024 में दर्ज हुआ था केस

यह मामला अयोध्या के भदरसा (पूराकलंदर थाना क्षेत्र) से जुड़ा है। 29 जुलाई 2024 को नाबालिग से दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज किया गया था, जिसने पूरे प्रदेश में राजनीतिक और सामाजिक हलचल मचा दी थी। आरोप लगने के बाद मुईद खान की बेकरी और शॉपिंग कॉम्प्लेक्स पर बुलडोजर कार्रवाई भी की गई थी, जिसे लेकर काफी विवाद हुआ।

DNA रिपोर्ट ने पलटा पूरा मामला

आरोपीDNA रिपोर्टअदालती फैसला
मुईद खाननेगेटिवबरी
राजू खान (नौकर)पॉजिटिवदोषी

जांच के दौरान कराए गए DNA टेस्ट इस केस का निर्णायक मोड़ साबित हुए। रिपोर्ट में मुईद खान का DNA नेगेटिव पाया गया, जबकि राजू खान का DNA पॉजिटिव निकला। इसी आधार पर अदालत ने मुईद खान को दोषमुक्त किया और राजू खान को अपराध का जिम्मेदार माना।

POCSO कोर्ट ने सुनाया फैसला

अयोध्या की POCSO प्रथम अदालत ने बुधवार को यह फैसला सुनाया। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि वैज्ञानिक साक्ष्य (DNA एविडेंस) के आधार पर ही यह निर्णय लिया गया है। राजू खान को दोषी ठहराते हुए अदालत ने कहा कि सजा पर फैसला 29 जनवरी को सुनाया जाएगा।

राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया

मुईद खान के बरी होने के बाद राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। समाजवादी पार्टी समर्थकों ने इसे न्याय की जीत बताया है, जबकि विपक्ष ने बुलडोजर कार्रवाई और शुरुआती आरोपों पर सवाल उठाए हैं। यह मामला एक बार फिर जांच प्रक्रिया, मीडिया ट्रायल और प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर बहस का विषय बन गया है।

निष्कर्ष

अयोध्या का यह फैसला इस बात का उदाहरण है कि न्यायिक प्रक्रिया में वैज्ञानिक साक्ष्य की भूमिका कितनी अहम होती है। मुईद खान का बरी होना जहां आरोपों की पुष्टि के बिना की गई कार्रवाई पर सवाल खड़े करता है, वहीं राजू खान के दोषी ठहराए जाने से यह भी स्पष्ट होता है कि अपराधी कितना भी छिपे, साक्ष्य के आधार पर न्याय तक पहुंचा ही जाता है

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