Sunday, February 1, 2026
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तुलसीपुर में सवर्ण समाज का यूजीसी विरोध 2026: उपजिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर वापसी की मांग, सामाजिक समरसता पर खतरा बताया HTML

तुलसीपुर / बलरामपुर, कमर खान | वेब वार्ता

उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले के तुलसीपुर तहसील परिसर में सवर्ण समाज ने यूजीसी विरोध 2026 को सामाजिक समरसता के लिए खतरा बताते हुए जोरदार विरोध किया। अखिल क्षत्रिय महासभा के बैनर तले सैकड़ों लोगों ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को संबोधित ज्ञापन उपजिलाधिकारी राकेश कुमार जयंत को सौंपा और यूजीसी नियमों में समता संवर्धन की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यह नियम सामाजिक खाई पैदा करेगा, उच्च शिक्षा में भेदभाव बढ़ाएगा और सामान्य वर्ग के छात्रों को असुरक्षित बनाएगा। ज्ञापन में यूजीसी विरोध 2026 को असंवैधानिक, नैसर्गिक न्याय के विरुद्ध और सामाजिक समरसता को समाप्त करने वाला बताया गया, जिसकी तत्काल वापसी की मांग की गई।

प्रदर्शन और ज्ञापन का विस्तृत विवरण

अखिल क्षत्रिय महासभा के मंडल अध्यक्ष शिवजीत सिंह शिवा के नेतृत्व में सवर्ण समाज के अधिवक्ता, युवा मोर्चा पदाधिकारी और आम लोग तहसील परिसर में एकत्र हुए। ज्ञापन में कहा गया कि यूजीसी विरोध 2026 का निर्णय सामाजिक समरसता को छिन्न-भिन्न कर देगा और जाति संघर्ष को बढ़ावा देगा। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि यह नियम उच्च शिक्षा केंद्रों में पठन-पाठन का माहौल समाप्त कर देगा और दुरुपयोग की पूरी संभावना है। उन्होंने जोर दिया कि किसी भी छात्र के साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए – चाहे वह दलित, पिछड़ा या सामान्य वर्ग का हो। सभी को अपनी प्रतिभा दिखाने का समान अवसर मिलना चाहिए।

ज्ञापन में यूजीसी को सामाजिक एवं न्यायिक संतुलन का ध्यान न रखने का आरोप लगाया गया। कहा गया कि नियम सामान्य वर्ग के छात्रों के उत्पीड़न का सशक्त अधिकार बन जाएगा, जबकि इसका उद्देश्य दलित-पिछड़े छात्रों का उत्पीड़न रोकना होना चाहिए, न कि सामान्य वर्ग को असुरक्षित करना।

प्रमुख मांगें और आरोप

प्रदर्शनकारियों ने यूजीसी विरोध 2026 को असंवैधानिक और नैसर्गिक न्याय के विरुद्ध करार दिया। उन्होंने कहा कि यह कानून सामाजिक समरसता को समाप्त करेगा और समान समाज के उत्पीड़न को बढ़ावा देगा। ज्ञापन में मांग की गई कि नियम तत्काल वापस लिया जाए, ताकि शिक्षा में समानता और न्याय बना रहे। उपजिलाधिकारी ने ज्ञापन प्राप्त कर उच्चाधिकारियों को भेजने का आश्वासन दिया।

प्रदर्शन में अखिल क्षत्रिय महासभा और सवर्ण समाज के कई पदाधिकारी शामिल थे, जिन्होंने एकजुट होकर सरकार पर सामाजिक संतुलन बिगाड़ने का आरोप लगाया।

  • नेतृत्व: शिवजीत सिंह शिवा (मंडल अध्यक्ष, अखिल क्षत्रिय महासभा)।
  • मांग: यूजीसी विरोध 2026 तत्काल वापस लिया जाए।
  • आरोप: नियम सामाजिक खाई पैदा करेगा और सामान्य वर्ग के छात्रों को असुरक्षित बनाएगा।
  • उद्देश्य: शिक्षा में समानता और सामाजिक समरसता की रक्षा।

भविष्य की कार्रवाई और जनता के लिए संदेश

प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि यूजीसी विरोध 2026 वापस नहीं लिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने अन्य समाजों और छात्र संगठनों से भी इस विरोध में शामिल होने की अपील की। जनता के लिए संदेश है कि शिक्षा में भेदभाव नहीं होना चाहिए और सामाजिक समरसता बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यूजीसी नियमों पर व्यापक संवाद और संतुलित दृष्टिकोण जरूरी है।

भविष्य में ऐसे प्रदर्शन अन्य जिलों में भी फैल सकते हैं, जो शिक्षा नीति पर बहस को तेज करेंगे।

निष्कर्ष

तुलसीपुर में सवर्ण समाज का यूजीसी विरोध 2026 सामाजिक समरसता और शिक्षा में समानता की रक्षा का प्रतीक है। यह प्रदर्शन लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक न्याय की भावना को मजबूत करता है, जहां सभी वर्गों को बिना भेदभाव के अवसर मिलने चाहिए। सरकार को मांगों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए, ताकि शिक्षा नीति सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा दे और किसी वर्ग को असुरक्षित न करे। यह आंदोलन शिक्षा अधिकार और सामाजिक न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।

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