यूपी का ओडीओपी मॉडल बना राष्ट्रीय विकास का निर्णायक रोडमैप, निर्यात और रोजगार में रचा नया कीर्तिमान

- Advertisement -
लखनऊ, अजय कुमार | वेब वार्ता

उत्तर प्रदेश का ‘एक जनपद, एक उत्पाद’ (ODOP) मॉडल आज केवल एक राज्य स्तरीय योजना नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर संतुलित आर्थिक विकास का प्रभावी रोडमैप बनकर उभरा है। वर्ष 2018 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में शुरू हुई यह पहल अब जिला आधारित विकास का ऐसा उदाहरण बन चुकी है, जिसने निर्यात, रोजगार, आय वृद्धि और क्षेत्रीय संतुलन—चारों मोर्चों पर ठोस परिणाम दिए हैं।ODOP

ओडीओपी की मूल अवधारणा और उद्देश्य

ओडीओपी योजना की मूल सोच हर जिले की एक विशिष्ट पहचान तय करने की रही है। उत्तर प्रदेश के 75 जिलों में स्थानीय पारंपरिक कला, हस्तशिल्प या विशिष्ट उत्पाद को चिन्हित कर उसे ब्रांडिंग, मार्केट एक्सेस, प्रशिक्षण और संस्थागत समर्थन प्रदान किया गया। इसका उद्देश्य केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाना रहा है।

पारंपरिक उत्पादों को मिली नई पहचानUP ODOC Model Economic Development Lucknow Revari UP ODOC Model Economic Development Bijnor Gajak

ओडीओपी के माध्यम से प्रदेश के पारंपरिक उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में नई पहचान मिली है। मुरादाबाद का पीतल उद्योग, वाराणसी की बुनकरी, फिरोजाबाद का कांच उद्योग, कन्नौज का इत्र और भदोही के कालीन अब केवल स्थानीय पहचान तक सीमित नहीं रहे, बल्कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का हिस्सा बन चुके हैं।

निर्यात में ऐतिहासिक वृद्धि

वर्षकुल निर्यात (₹ करोड़)ओडीओपी निर्यात (₹ करोड़)
201788,00058,000
20241,86,00093,000

आंकड़े स्पष्ट रूप से दिखाते हैं कि ओडीओपी मॉडल ने प्रदेश के निर्यात को दोगुने से अधिक करने में निर्णायक भूमिका निभाई है। यह वृद्धि केवल बड़े उद्योगों तक सीमित नहीं रही, बल्कि छोटे उत्पादकों और कारीगरों तक इसका सीधा लाभ पहुंचा।

रोजगार और आय में सुधार, पलायन पर रोक

ओडीओपी से पहले औद्योगिक विकास कुछ गिने-चुने शहरों तक सीमित था, लेकिन इस योजना ने छोटे जिलों और कस्बों को भी आर्थिक गतिविधियों का केंद्र बना दिया। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़े और ग्रामीण व अर्धशहरी क्षेत्रों से होने वाले पलायन में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई।

कारीगरों को मिला प्रशिक्षण और टूलकिट समर्थन

पहलउपलब्धि
टूलकिट वितरण1.25 लाख से अधिक कारीगर लाभान्वित
स्किल डेवलपमेंटआधुनिक तकनीक से पारंपरिक कौशल का उन्नयन

आधुनिक टूलकिट, प्रशिक्षण और आसान वित्तीय सहायता ने पारंपरिक उद्योगों को आधुनिक बाजार की मांग से जोड़ा, जिससे उत्पादों की गुणवत्ता और प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार हुआ।

वित्तीय सहायता और उद्यमिता को बढ़ावा

ओडीओपी मार्जिन मनी योजना के तहत अब तक 6,000 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट स्वीकृत किए जा चुके हैं। इससे सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) को सीधा लाभ मिला और ग्रामीण उद्यमिता को नई गति प्राप्त हुई।

राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर ओडीओपी

उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो (UPITS) 2025 में ओडीओपी को विशेष मंच दिया गया, जहां 466 स्टॉल लगाए गए और 20.77 करोड़ रुपये की व्यावसायिक डील/लीड सामने आई। वहीं, प्रयागराज महाकुंभ 2025 के दौरान 6,000 वर्ग मीटर क्षेत्र में ओडीओपी प्रदर्शनी में 44 जीआई टैग उत्पाद प्रदर्शित किए गए।

निष्कर्ष

उत्तर प्रदेश का ओडीओपी मॉडल यह सिद्ध करता है कि स्थानीय संसाधनों पर आधारित नीति से व्यापक आर्थिक बदलाव संभव है। निर्यात, रोजगार और आय में हुई वृद्धि के साथ यह मॉडल अब देश के अन्य राज्यों के लिए ब्लूप्रिंट बन चुका है। ओडीओपी ने न केवल प्रदेश की आर्थिक दिशा बदली है, बल्कि समावेशी और संतुलित विकास का एक सफल भारतीय मॉडल भी प्रस्तुत किया है।

👉 सरकारी योजनाओं और आर्थिक विकास से जुड़ी अहम खबरों के लिए हमारे व्हाट्सएप्प चैनल को फॉलो करें – Web Varta

ये भी पढ़ें: UGC Protest: नए नियमों पर देशभर में बहस: दिग्विजय सिंह की अध्यक्षता वाली समिति की सिफारिशों से बढ़ा विवाद

- Advertisement -

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisement -spot_img
- Advertisement -spot_img

Latest

spot_img
spot_img

More articles

spot_img
spot_img