नई दिल्ली | वेब वार्ता
भारत सरकार ने सेमीकंडक्टर क्षेत्र में तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा लक्ष्य तय किया है। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि सरकार का उद्देश्य वर्ष 2032 तक 3-नैनोमीटर नोड के अत्याधुनिक सेमीकंडक्टर चिप का डिज़ाइन और विनिर्माण भारत में करना है। ये चिप्स आधुनिक स्मार्टफोन, कंप्यूटर और उन्नत डिजिटल उपकरणों में इस्तेमाल होते हैं।
डीएलआई योजना के तहत सेमीकंडक्टर कंपनियों के साथ बैठक
मंत्री ने यह जानकारी राष्ट्रीय राजधानी में सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम की डिज़ाइन आधारित प्रोत्साहन (DLI) योजना के अंतर्गत स्वीकृत 24 सेमीकंडक्टर चिप डिज़ाइन कंपनियों के साथ बैठक के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी। उन्होंने कहा कि भारत वर्तमान में चिप डिज़ाइन के क्षेत्र में सक्रिय है, लेकिन अगला लक्ष्य अत्याधुनिक विनिर्माण क्षमता विकसित करना है।
2032 तक 3-नैनोमीटर स्तर पर पहुंचने का लक्ष्य
अश्विनी वैष्णव ने कहा, “2032 तक हमारा लक्ष्य 3-नैनोमीटर चिप के डिज़ाइन और मैन्युफैक्चरिंग के स्तर तक पहुंचना है। डिज़ाइन का कार्य आज भी हो रहा है, लेकिन विनिर्माण में इस स्तर तक पहुंचना हमारी प्राथमिकता है।” उन्होंने बताया कि भविष्य की डिजिटल अर्थव्यवस्था में ऐसे उच्च-प्रौद्योगिकी चिप्स की मांग तेजी से बढ़ेगी।
छह प्रमुख श्रेणियों पर केंद्रित होगी डीएलआई योजना
| चिप श्रेणी | उपयोग क्षेत्र |
|---|---|
| कंप्यूट | कंप्यूटर, सर्वर, डेटा प्रोसेसिंग |
| रेडियो फ्रीक्वेंसी (RF) | टेलीकॉम, वायरलेस संचार |
| नेटवर्किंग | इंटरनेट इंफ्रास्ट्रक्चर, डेटा नेटवर्क |
| ऊर्जा (पावर) | ऊर्जा प्रबंधन, इलेक्ट्रिक वाहन |
| सेंसर | आईओटी, ऑटोमेशन, हेल्थटेक |
| मेमोरी | डेटा स्टोरेज, स्मार्ट डिवाइस |
मंत्री ने बताया कि DLI योजना के दूसरे चरण में सरकार इन छह प्रमुख श्रेणियों पर फोकस करेगी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भारत की कंपनियों के पास 70–75 प्रतिशत तकनीकी उत्पादों के विकास पर प्रमुख नियंत्रण हो सके।
सेमीकंडक्टर क्षेत्र में तेज़ी से बढ़ रही क्षमता
अश्विनी वैष्णव ने कहा कि वर्षों से यह सपना था कि भारत में ही सेमीकंडक्टर चिप का डिज़ाइन और उत्पादन हो। अब यह सपना साकार होता दिख रहा है। उन्होंने बताया कि इस समय 10 सेमीकंडक्टर परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं, जबकि चार परियोजनाओं में इसी वर्ष उत्पादन शुरू होने की उम्मीद है।
स्टार्टअप्स और छात्रों की बढ़ती भागीदारी
मंत्री के अनुसार, अब तक 24 स्टार्टअप्स सेमीकंडक्टर चिप डिज़ाइन कर चुके हैं और 67 हजार से अधिक छात्रों को चिप डिज़ाइन का प्रशिक्षण दिया जा चुका है। उन्होंने कहा कि शिक्षा जगत और उद्योग को नए विचार, नई सोच और नवाचार के लिए लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा है।
2029 तक मजबूत डिज़ाइन और मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम
अश्विनी वैष्णव ने कहा कि जैसे-जैसे देश 2029 की ओर बढ़ेगा, भारत में ऐसे चिप्स के डिज़ाइन और उत्पादन की मजबूत क्षमता विकसित हो जाएगी, जिनकी आवश्यकता देश के लगभग 70–75 प्रतिशत अनुप्रयोगों में होती है। इससे आयात पर निर्भरता घटेगी और भारत वैश्विक सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला में अहम भूमिका निभा सकेगा।
निष्कर्ष
3-नैनोमीटर चिप निर्माण का लक्ष्य भारत को उच्च-प्रौद्योगिकी विनिर्माण की वैश्विक दौड़ में अग्रणी बनाने की दिशा में एक निर्णायक कदम माना जा रहा है। सरकार की योजनाओं, स्टार्टअप्स की भागीदारी और कुशल मानव संसाधन के साथ भारत आने वाले वर्षों में सेमीकंडक्टर क्षेत्र में आत्मनिर्भर और प्रतिस्पर्धी शक्ति के रूप में उभर सकता है।
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