नई दिल्ली | वेब वार्ता
बजट सत्र 2026-27 की शुरुआत से पहले सोमवार को आयोजित सर्वदलीय बैठक संपन्न हो गई। बैठक के बाद केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने कहा कि सरकार नियमों और प्रक्रियाओं के तहत काम करती है और संसद में सभी मुद्दों पर चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बजट सत्र की कार्यवाही को संविधान और संसदीय नियमों के अनुरूप ही चलाया जाएगा।
बजट सत्र की प्रक्रिया पर सरकार का पक्ष
सर्वदलीय बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में किरेन रिजिजू ने कहा कि बजट सत्र की एक निर्धारित संसदीय प्रक्रिया होती है, जिसके तहत सबसे पहले राष्ट्रपति का अभिभाषण होता है। इसके बाद अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा होती है और फिर बजट पेश कर उस पर चर्चा की जाती है। उन्होंने कहा कि संसद की यह प्रक्रिया वर्षों से चली आ रही है और इसका पालन करना सभी के लिए अनिवार्य है।
धन्यवाद प्रस्ताव पर उठाए जा सकते हैं विभिन्न मुद्दे
संसदीय कार्य मंत्री ने स्पष्ट किया कि धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान सदस्य सरकार के कामकाज से जुड़े विभिन्न राष्ट्रीय और क्षेत्रीय मुद्दे उठा सकते हैं, क्योंकि राष्ट्रपति के अभिभाषण में सरकार अपने कार्यों और नीतियों का लेखा-जोखा प्रस्तुत करती है। उन्होंने कहा कि सरकार इस दौरान उठाए गए हर सवाल और सुझाव को सुनने के लिए तैयार रहती है।
हंगामे पर जताई चिंता
किरेन रिजिजू ने विपक्ष द्वारा लगातार हंगामे की प्रवृत्ति पर चिंता जताते हुए कहा कि यदि केवल शोर-शराबे के कारण सदन की कार्यवाही बाधित होती है, तो इससे संसदीय लोकतंत्र को नुकसान पहुंचता है। उन्होंने कहा कि सरकार चर्चा से कभी पीछे नहीं हटती, लेकिन सदन को चलने देना भी उतना ही जरूरी है।
एसआईआर मुद्दे पर विपक्ष को जवाब
मतदाता सूची के गहन विशेष पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) को लेकर विपक्ष की मांगों पर प्रतिक्रिया देते हुए किरेन रिजिजू ने कहा कि यह मुद्दा पहले ही संसद में विस्तार से चर्चा का विषय बन चुका है। उन्होंने बताया कि पिछली बार विपक्षी दलों की मांग पर सरकार ने चुनाव सुधारों पर चर्चा का दायरा बढ़ाया था, जिसमें एसआईआर भी शामिल था।
लोकसभा और राज्यसभा में हो चुकी है लंबी बहस
| मुद्दा | स्थिति |
|---|---|
| एसआईआर (मतदाता सूची पुनरीक्षण) | पहले ही विस्तृत चर्चा हो चुकी |
| चुनाव सुधार | लोकसभा और राज्यसभा दोनों में बहस |
| सदस्यों को समय | पर्याप्त समय दिया गया |
उन्होंने कहा कि लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में इस विषय पर लंबी और विस्तृत चर्चा हो चुकी है, जिसमें सभी दलों के सदस्यों को अपनी बात रखने का पूरा अवसर मिला था। ऐसे में एक ही विषय पर बार-बार चर्चा की मांग को उन्होंने अनावश्यक बताया।
संविधान और नियमों के तहत चलेगा सदन
किरेन रिजिजू ने दो टूक कहा कि सरकार न तो नियमों से बाहर जाकर काम करती है और न ही किसी की मनमर्जी से संसद चलती है। उन्होंने कहा, “देश संविधान से चलता है और संसद की कार्यवाही भी संविधान व संसदीय नियमों के अनुसार ही होती है।”
निष्कर्ष
बजट सत्र 2026-27 से पहले हुई सर्वदलीय बैठक में सरकार ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि वह सार्थक और नियमबद्ध चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है। हालांकि, सरकार की यह भी अपेक्षा है कि विपक्ष सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से चलने दे, ताकि बजट जैसे अहम विषयों पर संसद में विस्तृत और रचनात्मक चर्चा हो सके।
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