ग्वालियर: वार्ड 18 की भाजपा पार्षद पर शासकीय भूमि कब्जा और अवैध वसूली के आरोप, दुकानदारों में असंतोष

ग्वालियर, ब्यूरो | वेब वार्ता

ग्वालियर नगर निगम के वार्ड क्रमांक 18 की भाजपा पार्षद रेखा त्रिपाठी एक बार फिर विवादों और आरोपों के केंद्र में हैं। स्थानीय नागरिकों, ठेला-रेहड़ी चालकों और दुकानदारों का आरोप है कि वार्ड में शासकीय भूमि पर कब्जा, अवैध कॉलोनी निर्माण और प्रतिदिन अवैध वसूली जैसी गतिविधियां पार्षद के संरक्षण में चल रही हैं। हालांकि, इन आरोपों को लेकर अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।

स्थानीय लोगों ने लगाए गंभीर आरोप

वार्ड के नागरिकों का कहना है कि पार्षद का जनहित के कार्यों से सीधा जुड़ाव नहीं दिखता। आरोप है कि सरकारी जमीनों पर कब्जा कर उन्हें बेचा जा रहा है और पार्षद निधि से कराए गए कार्यों की गुणवत्ता भी संतोषजनक नहीं है। साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि ठेकेदारों से कमीशन लिया जाता है।

आरोपों का संक्षिप्त विवरण

आरोप का प्रकारस्थानीय लोगों का दावा
शासकीय भूमि पर कब्जालगभग एक बीघा जमीन पर अवैध कब्जा कर बिक्री का आरोप
अवैध कॉलोनी निर्माणसिंधिया मूर्ति से शनिचरा मार्ग के बीच कॉलोनी विकसित किए जाने की बात
अवैध वसूलीठेले-रेहड़ी से प्रतिदिन हजारों रुपये वसूली का आरोप
कमीशनखोरीठेकेदारों से 25 प्रतिशत कमीशन लेने का दावा

दुकानदारों की परेशानी

दीनदयाल नगर स्थित महाराजा कॉम्प्लेक्स में हाउसिंग बोर्ड द्वारा निर्मित लगभग 50 दुकानों के सामने बड़ी संख्या में ठेले और रेहड़ियां लगने का आरोप लगाया गया है। दुकानदारों का कहना है कि इससे न केवल ग्राहकों की आवाजाही प्रभावित होती है, बल्कि वाहन खड़ा करना भी मुश्किल हो जाता है। विरोध करने पर कथित तौर पर असामाजिक तत्वों द्वारा धमकी और मारपीट की आशंका जताई जाती है।

रेहड़ी चालकों का पक्ष

दीनदयाल नगर के हाथ-रेहड़ी चालक कालूराम का कहना है कि कुछ लोग स्वयं को पार्षद का करीबी या परिजन बताकर उनसे हफ्ता देने का दबाव बनाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इस संबंध में पार्षद से शिकायत करने पर उन्हें कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला।

वहीं महाराजा कॉम्प्लेक्स के दुकानदार अनीस अहमद ने आरोप लगाया कि जबरन ठेले दुकानों के सामने लगवाए जा रहे हैं और विरोध करने पर विवाद की स्थिति बन जाती है।

सभापति परिषद में भी उठ चुका है मुद्दा

स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि नगर निगम सभापति मनोज तोमर ने पूर्व में परिषद की बैठक के दौरान पार्षद पर ठेकेदारों से 25 प्रतिशत कमीशन लेने का आरोप लगाया था। हालांकि, इस संबंध में किसी जांच या कार्रवाई की जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।

प्रशासन की भूमिका पर उठ रहे सवाल

वार्डवासियों का कहना है कि सत्ताधारी दल से जुड़ा मामला होने के कारण प्रशासन की ओर से अब तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई। लोगों को उम्मीद है कि उनकी समस्याओं को देखते हुए प्रशासन अवैध कब्जों और वसूली के आरोपों की निष्पक्ष जांच करेगा।

निष्कर्ष

वार्ड 18 में सामने आए ये आरोप स्थानीय प्रशासन, नगर निगम और जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही से जुड़े अहम सवाल खड़े करते हैं। जब तक पूरे मामले की निष्पक्ष जांच नहीं होती, तब तक आरोपों की सच्चाई स्पष्ट नहीं हो सकती। फिलहाल, वार्ड की जनता की निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

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