लखनऊ, अजय कुमार | वेब वार्ता
भारतीय रेल परिवहन प्रबंधन संस्थान (आईआरटीएम), लखनऊ में 77वां गणतंत्र दिवस देशभक्ति, राष्ट्रवाद और गरिमामय वातावरण के बीच धूमधाम से मनाया गया। 26 जनवरी 2026 को आयोजित इस समारोह में संस्थान के अधिकारियों, कर्मचारियों, परिवीक्षाधीन अधिकारियों और उनके परिजनों की सक्रिय सहभागिता देखने को मिली। पूरे कार्यक्रम में संविधान, लोकतांत्रिक मूल्यों और राष्ट्रीय एकता का स्पष्ट संदेश दिया गया।
महानिदेशक ने किया ध्वजारोहण, राष्ट्रगान से हुआ शुभारंभ
गणतंत्र दिवस समारोह की शुरुआत महानिदेशक, भारतीय रेल परिवहन प्रबंधन संस्थान श्री रंजन प्रकाश ठाकुर द्वारा राष्ट्रीय ध्वज फहराने के साथ हुई। इसके पश्चात उपस्थित सभी अधिकारियों, कर्मचारियों और प्रशिक्षु अधिकारियों ने राष्ट्रगान गाकर राष्ट्र के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की। पूरा परिसर देशभक्ति के रंग में रंगा नजर आया।
संस्थान की उपलब्धियों पर रहा महानिदेशक का जोर
ध्वजारोहण के बाद अपने संबोधन में श्री रंजन प्रकाश ठाकुर ने संस्थान की प्रमुख उपलब्धियों, प्रशिक्षण रिकॉर्ड और भारतीय रेल के लिए इसके योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने अधिकारियों, परिवीक्षाधीन अधिकारियों और कर्मचारियों को गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं देते हुए उत्कृष्ट कार्य संस्कृति बनाए रखने का आह्वान किया।
- संस्थान की शैक्षणिक और प्रशासनिक उपलब्धियों की जानकारी
- रेलवे प्रशिक्षण में गुणवत्ता और नवाचार पर जोर
- कर्मचारियों की भूमिका को सराहा
स्वतंत्रता सेनानियों को दी गई श्रद्धांजलि
अपने वक्तव्य में महानिदेशक ने देश की स्वतंत्रता के लिए बलिदान देने वाले अमर शहीदों को नमन किया। उन्होंने स्वतंत्रता सेनानियों की अदम्य वीरता, त्याग और राष्ट्र के प्रति समर्पण को याद करते हुए कहा कि आज का भारत उन्हीं बलिदानों का परिणाम है। यह संबोधन उपस्थित सभी जनों के लिए प्रेरणादायी रहा।
देशभक्ति गीतों से गूंजा परिसर
कार्यक्रम के अगले चरण में देशभक्ति गीतों की प्रस्तुति दी गई, जिसने समारोह को और भी भावनात्मक बना दिया। गीतों के माध्यम से राष्ट्रप्रेम, एकता और अखंडता का संदेश प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया। इस अवसर पर अपर महानिदेशक श्री संजय त्रिपाठी, संकाय सदस्य, कर्मचारी, परिवीक्षाधीन अधिकारी तथा उनके परिवारजन बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
निष्कर्ष
भारतीय रेल परिवहन प्रबंधन संस्थान, लखनऊ में आयोजित 77वां गणतंत्र दिवस समारोह न केवल एक औपचारिक आयोजन रहा, बल्कि यह लोकतांत्रिक मूल्यों, राष्ट्रीय एकता और प्रशासनिक जिम्मेदारी का सशक्त प्रतीक भी बना। इस प्रकार के आयोजन कर्मचारियों और प्रशिक्षुओं में राष्ट्रसेवा और कर्तव्यबोध की भावना को और मजबूत करते हैं।
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