देवरिया, ममता तिवारी | वेब वार्ता
उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा लागू किए गए यूजीसी नियम 2026 को लेकर सवर्ण समाज का विरोध लगातार गहराता जा रहा है। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड समेत कई राज्यों में इस नियम के खिलाफ नाराजगी देखने को मिल रही है। देवरिया जनपद में भी बड़ी संख्या में लोग सोशल मीडिया के माध्यम से लोकतांत्रिक तरीके से अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं।
सोशल मीडिया पर मुखर हुआ विरोध
यूजीसी नियम लागू होने के बाद से सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में लोग इस पर प्रतिक्रिया व्यक्त कर रहे हैं। विरोध करने वालों का कहना है कि यह नियम सवर्ण समाज के छात्रों पर मानसिक दबाव बढ़ाने वाला है और इससे शैक्षिक वातावरण प्रभावित हो सकता है। देवरिया सहित पूर्वांचल के कई जिलों में इस मुद्दे पर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
पूर्व केंद्रीय मंत्री कलराज मिश्र की प्रतिक्रिया
यूजीसी नियम को लेकर भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री कलराज मिश्र ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने समाचार एजेंसी “भाषा” से बातचीत में कहा कि किसी भी शैक्षिक संस्थान में जाति के आधार पर भेदभाव नहीं होना चाहिए। उनके अनुसार यह नियम छात्रों के बीच भेदभाव की भावना पैदा कर सकता है और इससे समानता की अवधारणा पर भी असर पड़ेगा।
कलराज मिश्र ने जताई पुनर्विचार की जरूरत
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा कि यूजीसी नियम 2026 पर दोबारा विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य सभी वर्गों को समान अवसर देना होना चाहिए, न कि किसी वर्ग में असुरक्षा या दबाव की भावना उत्पन्न करना।
क्या है यूजीसी नियम 2026
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| नियम का नाम | यूजीसी नियम 2026 |
| लागू होने की तिथि | 15 जनवरी 2026 |
| लागू क्षेत्र | देशभर के सभी यूजीसी संबद्ध विश्वविद्यालय और कॉलेज |
| मुख्य उद्देश्य | उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता और भेदभाव की रोकथाम |
| नया प्रावधान | ओबीसी को भी जातीय भेदभाव की परिभाषा में शामिल किया गया |
सवर्ण समाज की मुख्य आपत्तियां
- नियम से छात्रों में वर्ग आधारित दबाव बढ़ने की आशंका
- शैक्षिक संस्थानों में आपसी अविश्वास का माहौल
- भेदभाव की परिभाषा को एकतरफा बताया जा रहा है
उत्तर प्रदेश से उत्तराखंड तक असर
सवर्ण समाज से जुड़े विभिन्न संगठनों और समूहों ने नियम लागू होते ही इसका विरोध शुरू कर दिया था। यह विरोध अब उत्तर प्रदेश से लेकर उत्तराखंड तक सुनाई देने लगा है। कई जगहों पर ज्ञापन देने और सोशल मीडिया अभियानों के माध्यम से सरकार और यूजीसी से नियम में संशोधन की मांग की जा रही है।
निष्कर्ष
यूजीसी नियम 2026 को लेकर सवर्ण समाज का बढ़ता विरोध यह संकेत दे रहा है कि यह मुद्दा आने वाले दिनों में राजनीतिक और शैक्षिक बहस का बड़ा विषय बन सकता है। अब देखना यह होगा कि यूजीसी और केंद्र सरकार इस विरोध पर क्या रुख अपनाती है और क्या नियम में किसी प्रकार का संशोधन किया जाता है।
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