लखनऊ, अजय कुमार | वेब वार्ता
77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) की राष्ट्रीय अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश की चार बार मुख्यमंत्री रहीं बहन कु. मायावती ने देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए केंद्र और राज्य सरकारों से संविधान की सच्ची मंशा के अनुरूप आत्मचिंतन करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि बड़े-बड़े वादों और दावों से इतर यह परखना जरूरी है कि देश ने वास्तव में राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक लोकतंत्र के क्षेत्र में कितना ठोस विकास किया है।
देशवासियों को 77वें गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं
मायावती ने समस्त देशवासियों तथा दुनिया भर में रहने वाले भारतीय नागरिकों और उनके परिवारों को गणतंत्र दिवस की दिली मुबारकबाद देते हुए कहा कि यह दिन केवल उत्सव का नहीं, बल्कि संविधान के मूल्यों पर ईमानदार आकलन का भी है। उन्होंने आत्म-सम्मान भरे जीवन और समान अधिकारों की भावना को गणतंत्र की असली आत्मा बताया।
संविधान की मंशा बनाम सरकारों की नीतियां
बीएसपी प्रमुख ने सवाल उठाया कि क्या आज केंद्र और राज्य सरकारों की नीतियां केवल बातों और दावों तक सीमित रह गई हैं या फिर बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर द्वारा दिए गए मानवतावादी और कल्याणकारी संविधान की भावना के अनुरूप देश आगे बढ़ा है। उन्होंने कहा कि लगभग 140 करोड़ की आबादी वाले देश में गरीबी और बेरोजगारी का समाधान अब भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।
गरीबी-बेरोजगारी और असमानता पर चिंता
मायावती ने कहा कि यह गंभीर विचार का विषय है कि क्यों आज भी देश में कुछ मुट्ठीभर अमीर और बड़ी संख्या में गरीब व बेरोजगार बहुजन समाज के लोग मौजूद हैं। उन्होंने इसे सामाजिक और आर्थिक असमानता का परिणाम बताते हुए कहा कि इससे आम लोगों के जीवन स्तर में अपेक्षित सुधार नहीं हो पा रहा है।
वैश्विक परिदृश्य और भारत की भूमिका
बीएसपी सुप्रीमो ने कहा कि भारत कभी अपने संवैधानिक मूल्यों के कारण दुनिया में नैतिक शक्ति के रूप में जाना जाता था। आज यह आत्ममंथन जरूरी है कि क्या भारत अब भी वही स्थान बनाए हुए है या फिर दुनिया को देखने-सीखने वाला देश बनकर रह गया है। उन्होंने वैश्विक हालात के तेजी से बदलते परिदृश्य में भारत की स्थिरता और मजबूती पर भी सवाल उठाए।
घुसपैठियों और वोटर लिस्ट का मुद्दा
मायावती ने कहा कि घुसपैठियों और विदेशियों की पहचान कर उन्हें वोटर लिस्ट से हटाना उचित है, लेकिन इसके नाम पर लगभग 100 करोड़ भारतीय नागरिकों को दस्तावेजी जटिलताओं में उलझाना ठीक नहीं है। उन्होंने सरकार से इस प्रक्रिया के लिए सरल और व्यावहारिक रास्ता अपनाने की अपील की।
धर्म परिवर्तन कानून और विभाजनकारी राजनीति
धर्म परिवर्तन से जुड़े कड़े कानूनों पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि यदि तमाम प्रयासों के बावजूद यह समस्या समाप्त नहीं हो रही है, तो मूल कारणों की पहचान कर सुधार जरूरी है। उन्होंने चेतावनी दी कि इसकी आड़ में विभाजनकारी राजनीति और हिंसा पर जितनी जल्दी रोक लगे, उतना ही देशहित में बेहतर होगा।
बीएसपी की अपेक्षाएं और गणतंत्र दिवस का संकल्प
- महंगाई, गरीबी और बेरोजगारी पर ठोस कार्रवाई
- अशिक्षा, जातिवाद और सांप्रदायिकता पर नियंत्रण
- सामाजिक-आर्थिक असमानता को दूर करने की नीति
- पूंजीवादी लाभ-हानि की सोच से ऊपर उठकर जनकल्याण
निष्कर्ष
गणतंत्र दिवस के अवसर पर मायावती का यह संदेश संविधान, लोकतंत्र और सामाजिक न्याय के मूल प्रश्नों पर केंद्रित रहा। उन्होंने सरकारों से अपेक्षा की कि वे “सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय” की भावना के साथ संवैधानिक उद्देश्यों पर ईमानदारी से अमल करें। बीएसपी ने दोहराया कि यही सच्चे अर्थों में गणतंत्र दिवस का संकल्प होना चाहिए।
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