Monday, January 26, 2026
व्हाट्सएप पर हमसे जुड़ें

संविधान से सुरक्षा तक, नारी शक्ति से युवा भारत तक: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के संबोधन का विस्तृत विश्लेषण

नई दिल्ली | वेब वार्ता

77वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्र के नाम संबोधन में न केवल देशवासियों को शुभकामनाएं दीं, बल्कि भारत की लोकतांत्रिक यात्रा, सामाजिक बदलाव, आर्थिक प्रगति और राष्ट्रीय सुरक्षा पर एक व्यापक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। उनका संबोधन भावनात्मक होने के साथ-साथ नीति, मूल्यों और भविष्य की दिशा को स्पष्ट करने वाला रहा।

गणतंत्र दिवस का अर्थ: केवल उत्सव नहीं, आत्ममंथन

राष्ट्रपति ने कहा कि गणतंत्र दिवस महज परेड या उत्सव का दिन नहीं है, बल्कि यह देश के अतीत, वर्तमान और भविष्य पर विचार करने का अवसर है। 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्रता और 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू होने के साथ भारत ने अपने भाग्य का निर्धारण स्वयं करना शुरू किया। यही वह क्षण था जब भारत लोकतांत्रिक गणराज्य के रूप में विश्व पटल पर स्थापित हुआ।

संविधान: सबसे बड़े गणराज्य की आधारशिला

राष्ट्रपति मुर्मू ने भारतीय संविधान को विश्व इतिहास के सबसे बड़े गणराज्य का मूलभूत दस्तावेज बताया। उन्होंने कहा कि संविधान में निहित न्याय, स्वतंत्रता, समता और बंधुता के मूल्य केवल शब्द नहीं, बल्कि हमारे लोकतंत्र की आत्मा हैं। सरदार वल्लभभाई पटेल के योगदान को स्मरण करते हुए उन्होंने राष्ट्रीय एकता को बनाए रखने के प्रयासों को अत्यंत आवश्यक बताया।

वंदे मातरम् के 150 वर्ष और सांस्कृतिक चेतना

उन्होंने बताया कि राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ की रचना के 150 वर्ष पूरे होना भारत की सांस्कृतिक विरासत का गौरवपूर्ण अध्याय है। यह गीत पीढ़ियों से राष्ट्र-प्रेम की भावना को जीवित रखे हुए है और भारत माता की चेतना का प्रतीक है।

पराक्रम दिवस, सेना और ऑपरेशन सिंदूर

नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि उनका नारा ‘जय हिन्द’ आज भी राष्ट्रीय आत्मविश्वास का उद्घोष है। उन्होंने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर के तहत आतंकवादी ठिकानों पर सटीक प्रहार कर भारत ने अपनी सुरक्षा क्षमता और आत्मनिर्भर रक्षा प्रणाली का परिचय दिया। थलसेना, वायुसेना और नौसेना पर देश को पूरा भरोसा है।

नारी शक्ति: विकास की धुरी

राष्ट्रपति ने विशेष रूप से महिलाओं की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि महिलाओं की भागीदारी बढ़ना देश के समग्र विकास के लिए अनिवार्य है। जन-धन खातों में महिलाओं की बहुलता, स्वयं सहायता समूहों की सफलता और खेल व विज्ञान में बेटियों की उपलब्धियां इसका प्रमाण हैं। नारी शक्ति वंदन अधिनियम से महिला नेतृत्व को नई ताकत मिलेगी।

युवा भारत और 2047 का लक्ष्य

उन्होंने कहा कि भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी युवा आबादी है। ‘माय भारत’ जैसे प्लेटफॉर्म युवाओं को कौशल, नवाचार और नेतृत्व से जोड़ रहे हैं। राष्ट्रपति ने विश्वास जताया कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण में युवाओं की भूमिका निर्णायक होगी।

किसान, गरीब और समावेशी विकास

राष्ट्रपति ने किसानों को देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बताया। उन्होंने कहा कि पीएम किसान सम्मान निधि, कृषि बीमा, सिंचाई और जैविक खेती से किसानों को सशक्त किया जा रहा है। वहीं पीएम गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत 81 करोड़ लोगों को खाद्य सुरक्षा मिल रही है और करोड़ों परिवारों को पक्के घर उपलब्ध कराए गए हैं।

मतदाता दिवस और लोकतंत्र की मजबूती

25 जनवरी को राष्ट्रीय मतदाता दिवस का उल्लेख करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि मतदान लोकतंत्र की आत्मा है। डॉ. भीमराव आंबेडकर के विचारों का हवाला देते हुए उन्होंने महिलाओं की बढ़ती मतदान भागीदारी को लोकतंत्र की मजबूती का संकेत बताया।

अर्थव्यवस्था, आत्मनिर्भरता और डिजिटल भारत

राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि भारत आज विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था है। जीएसटी, लेबर कोड्स, डिजिटल भुगतान और इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास से देश की आर्थिक नींव मजबूत हो रही है और भारत तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में अग्रसर है।

पर्यावरण संरक्षण और वैश्विक शांति

उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। भारत का ‘लाइफस्टाइल फॉर एनवायरमेंट (LiFE)’ संदेश प्रकृति के साथ संतुलन में जीने की सीख देता है। विश्व में शांति और भाईचारा ही मानवता का सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित कर सकता है।

राष्ट्र प्रथम का आह्वान

अपने संबोधन के अंत में राष्ट्रपति ने सभी नागरिकों से ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना के साथ कार्य करने का आह्वान किया और कहा कि गणतंत्र दिवस हमें कर्तव्य, एकता और देशभक्ति के संकल्प को मजबूत करने का अवसर देता है।

📌 राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के संबोधन से 8 प्रमुख संदेश

1️⃣ संविधान सर्वोच्च आधार: भारतीय संविधान विश्व इतिहास के सबसे बड़े गणराज्य का मूल दस्तावेज है, जो न्याय, स्वतंत्रता, समता और बंधुता के मूल्यों पर आधारित है।

2️⃣ गणतंत्र दिवस आत्ममंथन का अवसर: यह केवल उत्सव नहीं, बल्कि देश के अतीत, वर्तमान और भविष्य की दिशा पर विचार करने का दिन है।

3️⃣ ऑपरेशन सिंदूर और राष्ट्रीय सुरक्षा: आतंकवाद के खिलाफ भारत की निर्णायक कार्रवाई ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और सैन्य क्षमता को प्रमाणित किया।

4️⃣ नारी शक्ति बनी विकास की धुरी: जन-धन खातों, स्वयं सहायता समूहों, खेल और नेतृत्व में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी विकसित भारत की मजबूत नींव है।

5️⃣ युवा शक्ति ही 2047 का आधार: ‘माय भारत’ जैसे मंचों के जरिए युवा नेतृत्व, नवाचार और उद्यमिता को नई दिशा मिल रही है।

6️⃣ किसान और गरीब कल्याण पर जोर: पीएम किसान सम्मान निधि और पीएम गरीब कल्याण अन्न योजना से समावेशी विकास को मजबूती मिली है।

7️⃣ लोकतंत्र की आत्मा है मतदान: राष्ट्रीय मतदाता दिवस पर महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को लोकतंत्र की शक्ति बताया गया।

8️⃣ पर्यावरण और वैश्विक शांति का संदेश: ‘LiFE’ के जरिए भारत ने प्रकृति-संतुलित जीवन और विश्व शांति का वैश्विक आह्वान किया।

📲 वेब वार्ता से जुड़े रहने के लिए हमारा WhatsApp चैनल फॉलो करें।

ये भी पढ़ें: राफेल, Su-30MKI, ब्रह्मोस से वार… ऑपरेशन सिंदूर पर नई यूरोपीय रिपोर्ट ने क्या खुलासा किया?

Author

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisement -spot_img

Latest

More articles