Sunday, January 25, 2026
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76 साल का उत्तर प्रदेश: उपलब्धियां, चुनौतियां और भविष्य की दिशा

लखनऊ | लक्ष्मी कान्त पाठक | वेब वार्ता

उत्तर प्रदेश, जो 24 जनवरी 1950 को अस्तित्व में आया, आज अपनी स्थापना के 76 वर्ष पूरे कर चुका है। यह यात्रा गौरव, संघर्ष, उपलब्धियों और चुनौतियों का सम्मिलित दस्तावेज है। लगभग 24 करोड़ की जनसंख्या वाला यह राज्य न केवल भारत का सबसे बड़ा राज्य है, बल्कि सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक दृष्टि से देश की दिशा तय करने में भी अहम भूमिका निभाता रहा है।

जनसंख्या, समाज और बुनियादी आंकड़े

उत्तर प्रदेश की लगभग 76–78 प्रतिशत आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करती है, जबकि शहरीकरण की दर केवल 22–24 प्रतिशत के आसपास है। राज्य का लिंगानुपात 912 महिलाएं प्रति 1000 पुरुष है, जो अभी भी संतोषजनक नहीं कहा जा सकता। वहीं साक्षरता दर लगभग 67.7 प्रतिशत है, जो राष्ट्रीय औसत से कम बनी हुई है।

अर्थव्यवस्था: आकार बड़ा, चुनौतियां भी

आर्थिक दृष्टि से उत्तर प्रदेश की GSDP लगभग ₹29.7 लाख करोड़ तक पहुंच चुकी है। राज्य की प्रति व्यक्ति आय लगभग ₹1.09 लाख है, जो अभी भी कई अन्य राज्यों की तुलना में कम है। वर्तमान में राज्य की आर्थिक विकास दर लगभग 8.9 प्रतिशत है।

अर्थव्यवस्था में कृषि का योगदान लगभग 27%, उद्योग का 26% और सेवा क्षेत्र का 47% है। उत्तर प्रदेश देश के सबसे बड़े खाद्यान्न और गन्ना उत्पादक राज्यों में शामिल है। भूमि और आवास वितरण योजनाओं में लगभग 70 प्रतिशत लक्ष्य प्राप्त किया जा चुका है।

शिक्षा और कौशल विकास की स्थिति

शिक्षा के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश में 67 विश्वविद्यालय, 5842 महाविद्यालय, 3268 आईटीआई/आईटीसी और 370 पॉलीटेक्निक संस्थान कार्यरत हैं। हाल ही में लगभग 70,000 युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए विभिन्न उद्योगों के साथ कौशल विकास संबंधी MoU किए गए हैं।

स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़ा विस्तार

स्वास्थ्य ढांचे में भी राज्य ने उल्लेखनीय प्रगति की है। मेडिकल कॉलेजों की संख्या 40 से बढ़कर 81 हो चुकी है। लगभग 5.5 करोड़ परिवार विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं के अंतर्गत लाभान्वित हो चुके हैं। मातृ एवं शिशु मृत्यु दर तथा कई संक्रामक बीमारियों में भी कमी दर्ज की गई है।

औद्योगिक विकास और निवेश

उत्तर प्रदेश में फैक्ट्रियों की संख्या बढ़कर 22,141 तक पहुंच गई है। हाल ही में एस्सार समूह के साथ ₹25,000 करोड़ का निवेश समझौता हुआ है। वित्त वर्ष 2025–26 के लिए ₹8.33 लाख करोड़ का बजट प्रस्तावित किया गया है, जिसमें स्वास्थ्य, शिक्षा, ऊर्जा और औद्योगिक विकास को प्राथमिकता दी गई है।

भविष्य का लक्ष्य: ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी

राज्य सरकार का लक्ष्य है कि उत्तर प्रदेश को 2030 तक 1 ट्रिलियन डॉलर और 2047 तक 6 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाया जाए। इसके लिए आधारभूत ढांचे, निवेश, रोजगार और मानव संसाधन विकास पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

चुनौतियां जो अब भी बनी हुई हैं

इन उपलब्धियों के बावजूद राज्य के सामने कई गंभीर चुनौतियां मौजूद हैं। महिला साक्षरता और रोजगार, शिक्षा की गुणवत्ता, ग्रामीण बुनियादी ढांचे और स्वास्थ्य सेवाओं का समान वितरण अब भी सुधार की मांग करता है।

निष्कर्ष: संतुलन ही भविष्य की कुंजी

उत्तर प्रदेश का भविष्य इस बात पर निर्भर करता है कि धर्म और राजनीति को सामाजिक एकता के पुल के रूप में कैसे उपयोग किया जाता है, सांस्कृतिक विरासत और आधुनिक विकास के बीच संतुलन कैसे साधा जाता है, और शिक्षा, स्वास्थ्य व रोजगार को कितनी प्राथमिकता दी जाती है। तभी यह राज्य केवल आकार और आबादी में ही नहीं, बल्कि न्याय, सम्मान, आस्था और प्रगति के मानकों पर भी देश का अग्रणी राज्य बन सकेगा।

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