वॉशिंगटन, इंटरनेशनल डेस्क | वेब वार्ता
Trump NATO Controversy:
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर अपने बयान को लेकर विवादों में घिर गए हैं। इस बार मामला 9/11 के बाद अफगानिस्तान में चले आतंकवाद विरोधी अभियान और उसमें NATO सहयोगी देशों की भूमिका से जुड़ा है। ट्रंप ने एक इंटरव्यू के दौरान दावा किया था कि अफगानिस्तान में आतंक के खिलाफ लड़ाई में ब्रिटेन और अन्य NATO देशों के सैनिक अग्रिम मोर्चे से पीछे रहे। इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली और अब विवाद बढ़ने के बाद ट्रंप को अपने बयान पर यू-टर्न लेना पड़ा है।
विवाद के बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर एक नया पोस्ट साझा किया, जिसमें उन्होंने ब्रिटिश सैनिकों की जमकर तारीफ की और भावनात्मक अंदाज में लिखा – “Love You All”। इस पोस्ट को ट्रंप की ओर से डैमेज कंट्रोल की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
📌 क्या था ट्रंप का विवादित बयान?
दरअसल, इस सप्ताह की शुरुआत में फॉक्स न्यूज को दिए गए एक इंटरव्यू में डोनाल्ड ट्रंप ने NATO सहयोगी देशों पर निशाना साधते हुए कहा था कि अफगानिस्तान में तैनात उनके सैनिक फ्रंटलाइन से थोड़ा पीछे रहे। ट्रंप ने कहा था, “वे कहते हैं कि उन्होंने अफगानिस्तान में सैनिक भेजे, और उन्होंने भेजे भी… लेकिन वे फ्रंटलाइन से दूर, थोड़ा पीछे ही रहे।”
ट्रंप की इस टिप्पणी को यूरोपीय सहयोगियों और खासकर ब्रिटेन ने अपने सैनिकों के बलिदान का अपमान माना। गौरतलब है कि 9/11 हमलों के बाद अमेरिका के साथ मिलकर अफगानिस्तान में चले सैन्य अभियान में 457 ब्रिटिश सैनिकों ने अपनी जान गंवाई थी, जबकि सैकड़ों गंभीर रूप से घायल हुए थे।
🌍 NATO सहयोगियों की कड़ी प्रतिक्रिया
ट्रंप के बयान के बाद ब्रिटेन, डेनमार्क समेत कई NATO देशों में नाराजगी देखने को मिली। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने इस टिप्पणी को “भयानक” करार देते हुए ट्रंप से माफी की मांग की। वहीं डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्शन सहित अन्य यूरोपीय नेताओं ने भी ट्रंप के बयान को तथ्यहीन और अपमानजनक बताया।
ब्रिटेन सरकार की ओर से जारी बयान में साफ कहा गया कि अफगानिस्तान में NATO सैनिकों की भूमिका को कम करके आंकना गलत है और यह उन सैनिकों के बलिदान के प्रति असंवेदनशील रवैया दर्शाता है, जिन्होंने वैश्विक सुरक्षा के लिए अपनी जान जोखिम में डाली।
🔄 विवाद के बाद ट्रंप का यू-टर्न
बढ़ते विवाद और अंतरराष्ट्रीय दबाव के बीच राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने सुर बदले। उन्होंने Truth Social पर पोस्ट करते हुए लिखा,
“यूनाइटेड किंगडम के महान और बेहद बहादुर सैनिक हमेशा अमेरिका के साथ खड़े रहे हैं। अफगानिस्तान में 457 ब्रिटिश सैनिक शहीद हुए, कई गंभीर रूप से घायल हुए। वे अब तक के सबसे महान योद्धाओं में शामिल हैं। यह रिश्ता इतना मजबूत है कि इसे कभी तोड़ा नहीं जा सकता।”
इसके साथ ही ट्रंप ने ब्रिटिश आर्मी को दुनिया की दूसरी सबसे बहादुर सेना बताते हुए लिखा, “हम आप सभी से प्यार करते हैं और हमेशा करते रहेंगे।” ट्रंप का यह बयान उनके पहले के रुख से बिल्कुल उलट माना जा रहा है।
🪖 अफगानिस्तान युद्ध और NATO की भूमिका
11 सितंबर 2001 को अमेरिका में हुए आतंकी हमलों के बाद NATO ने पहली बार अपने कलेक्टिव सिक्योरिटी क्लॉज को लागू किया था। इसके तहत ब्रिटेन समेत कई सहयोगी देशों ने अमेरिका के साथ मिलकर अफगानिस्तान में सैन्य अभियान शुरू किया। इस युद्ध में अमेरिका के अलावा ब्रिटेन, कनाडा, जर्मनी और फ्रांस जैसे देशों के हजारों सैनिक शामिल रहे।
ट्रंप ने अपने पहले बयान में यह सवाल भी उठाया था कि यदि कभी अमेरिका को जरूरत पड़ी तो क्या NATO देश उसके साथ खड़े होंगे। उन्होंने कहा था, “हमने उनसे कभी असल में कुछ मांगा ही नहीं।” इसी टिप्पणी ने विवाद को और गहरा कर दिया।
🇬🇧 ब्रिटेन का सख्त रुख
ट्रंप के बयान के बाद ब्रिटेन में राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली। प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर के प्रवक्ता ने कहा,
“राष्ट्रपति ट्रंप ने 9/11 के बाद अफगानिस्तान में NATO सैनिकों की भूमिका को कम आंकने में गलती की है। ब्रिटिश सेना ने साहस और सम्मान के साथ सेवा दी है और उनके बलिदान को कभी भुलाया नहीं जाएगा।”
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह यू-टर्न आगामी कूटनीतिक समीकरणों और NATO सहयोगियों के साथ रिश्तों को संतुलित करने की कोशिश है।
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