लखनऊ, शिक्षा डेस्क | वेब वार्ता
उत्तर प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ा प्रयोग शुरू होता दिख रहा है। राज्य के कुछ स्कूलों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित लर्निंग टूल्स के उपयोग की खबरों ने शिक्षा जगत में नई बहस छेड़ दी है। बताया जा रहा है कि छात्रों को ChatGPT जैसे AI प्लेटफॉर्म के जरिए सवाल-जवाब, उदाहरणों के साथ पढ़ाई कराई जा रही है। इसे लेकर जहां कुछ लोग इसे भविष्य की शिक्षा प्रणाली बता रहे हैं, वहीं कई शिक्षक और अभिभावक इसे जोखिम भरा प्रयोग मान रहे हैं।
🤖 सरकारी स्कूलों में AI पढ़ाई का नया मॉडल
AI आधारित इस मॉडल का उद्देश्य बच्चों को पारंपरिक रटंत शिक्षा से हटाकर समझ आधारित और इंटरैक्टिव लर्निंग से जोड़ना है। जानकारी के अनुसार, छात्रों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सवाल पूछने की स्वतंत्रता दी जा रही है और AI टूल्स उन्हें तुरंत उत्तर, उदाहरण और सरल भाषा में व्याख्या उपलब्ध करा रहे हैं। खासतौर पर गणित, विज्ञान और सामान्य ज्ञान जैसे विषयों में इस तकनीक का प्रयोग किया जा रहा है।
🎓 क्या शिक्षक की भूमिका होगी कमजोर?
AI की एंट्री के साथ सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या इससे शिक्षकों की भूमिका सीमित हो जाएगी। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि AI शिक्षक का विकल्प नहीं, बल्कि एक सहायक उपकरण है। शिक्षक बच्चों को नैतिक शिक्षा, सामाजिक मूल्य और व्यवहारिक ज्ञान देने में हमेशा केंद्रीय भूमिका निभाते रहेंगे। हालांकि, कुछ शिक्षक संगठनों ने आशंका जताई है कि तकनीक पर अत्यधिक निर्भरता से शिक्षक-छात्र संवाद प्रभावित हो सकता है।
👨👩👧👦 अभिभावकों की राय दो हिस्सों में बंटी
AI आधारित पढ़ाई को लेकर अभिभावकों की राय भी एकमत नहीं है। कुछ अभिभावकों का कहना है कि इससे बच्चों की समझ और सोचने की क्षमता बढ़ेगी, जबकि अन्य को डर है कि बच्चे स्क्रीन और मोबाइल पर जरूरत से ज्यादा निर्भर हो जाएंगे। अधिकांश अभिभावक इस बात पर सहमत हैं कि यदि AI का उपयोग सीमित और निगरानी में किया जाए, तो यह बच्चों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।
🏫 सरकार की तैयारी और आगे की योजना
शिक्षा विभाग से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, सरकार डिजिटल शिक्षा को मजबूत करने के लिए स्मार्ट क्लासरूम, ई-कंटेंट और AI आधारित प्लेटफॉर्म पर काम कर रही है। हालांकि, इस पूरे प्रयोग को लेकर अभी तक कोई औपचारिक नीति या दिशा-निर्देश जारी नहीं किए गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि स्पष्ट नीति, शिक्षकों का प्रशिक्षण और तकनीकी निगरानी के बिना AI का व्यापक इस्तेमाल चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
⚠️ AI आधारित शिक्षा: फायदे और खतरे
- फायदे: व्यक्तिगत सीखने का अनुभव, कमजोर छात्रों को अतिरिक्त सहायता, डिजिटल स्किल्स में सुधार
- खतरे: तकनीक पर अत्यधिक निर्भरता, गलत जानकारी का जोखिम, मानवीय संवाद में कमी
कुल मिलाकर, सरकारी स्कूलों में AI का प्रयोग शिक्षा व्यवस्था के लिए एक क्रांतिकारी बदलाव साबित हो सकता है, लेकिन इसके लिए ठोस नीति, शिक्षक प्रशिक्षण और सख्त निगरानी जरूरी है। सवाल यही है कि क्या AI शिक्षा की गुणवत्ता को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा या यह केवल एक तकनीकी प्रयोग बनकर रह जाएगा।
📲 ताज़ा शिक्षा और टेक्नोलॉजी अपडेट्स के लिए हमारे WhatsApp चैनल को फॉलो करें।
ये भी पढ़ें: पेपर क्राफ्ट वर्ल्ड” में नन्हे कलाकारों की रचनात्मक उड़ान, बच्चों ने दिखाया हुनर




