नई दिल्ली, आर्थिक डेस्क | वेब वार्ता
मदर ऑफ ऑल डील्स:
वैश्विक व्यापार और भू-राजनीतिक समीकरणों के तेजी से बदलते दौर में भारत एक ऐतिहासिक आर्थिक कदम उठाने जा रहा है। भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच करीब दो दशक से चली आ रही मुक्त व्यापार समझौते (Free Trade Agreement – FTA) की लंबी बातचीत अब अपने निर्णायक चरण में पहुंच चुकी है। 27 जनवरी 2026 को राजधानी नई दिल्ली में होने वाले उच्चस्तरीय शिखर सम्मेलन में दोनों पक्ष इस समझौते पर बातचीत पूरी होने की औपचारिक घोषणा कर सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता न केवल भारत और यूरोपीय संघ के आर्थिक रिश्तों को नई ऊंचाई देगा, बल्कि वैश्विक व्यापार व्यवस्था में भारत की भूमिका को भी और मजबूत करेगा।
लगभग 20 वर्षों की लंबी वार्ता का परिणाम
भारत–ईयू FTA की औपचारिक शुरुआत वर्ष 2007 में हुई थी। उस समय इसे ब्रॉड-बेस्ड ट्रेड एंड इन्वेस्टमेंट एग्रीमेंट (BTIA) का नाम दिया गया था, जिसमें वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार के साथ-साथ निवेश, तकनीकी सहयोग और नियामक मानकों को भी शामिल किया गया।
हालांकि 2007 से 2013 के बीच कई दौर की बातचीत हुई, लेकिन कृषि, बाजार पहुंच, बौद्धिक संपदा अधिकार और टैरिफ कटौती जैसे मुद्दों पर गहरे मतभेदों के चलते यह प्रक्रिया ठप पड़ गई। इसके बाद लगभग एक दशक तक यह समझौता ठंडे बस्ते में चला गया।
2022 में वैश्विक परिस्थितियों में बड़े बदलाव देखने को मिले। यूक्रेन युद्ध, अमेरिका–चीन व्यापार तनाव और वैश्विक सप्लाई चेन संकट के बीच भारत और यूरोपीय संघ दोनों ने महसूस किया कि आपसी आर्थिक सहयोग को मजबूत करना रणनीतिक रूप से जरूरी है। इसके बाद उच्चस्तरीय राजनीतिक संवाद के जरिए FTA वार्ता को दोबारा गति दी गई।
भारतीय निर्यात को मिलेगा बड़ा बढ़ावा
FTA लागू होने के बाद भारतीय उत्पादों को यूरोपीय बाजारों में कम या शून्य टैरिफ पर प्रवेश मिलेगा। इससे भारतीय वस्त्र, चमड़ा, फार्मास्यूटिकल्स, ऑटो कंपोनेंट्स, आईटी सेवाएं और कृषि उत्पाद यूरोप में अधिक प्रतिस्पर्धी बन सकेंगे।
विशेष रूप से कपड़ा और परिधान उद्योग, जो भारत में लाखों लोगों को रोजगार देता है, इस समझौते से सबसे अधिक लाभान्वित हो सकता है। इसके अलावा, भारत की सेवा क्षेत्र की कंपनियों को यूरोप में नए अवसर मिलेंगे।
यूरोपीय संघ को भी होगा फायदा
यह समझौता केवल भारत के लिए ही नहीं, बल्कि यूरोपीय संघ के लिए भी समान रूप से फायदेमंद माना जा रहा है। EU के ऑटोमोबाइल, मशीनरी, मेडिकल उपकरण और ग्रीन टेक्नोलॉजी से जुड़े उत्पादों को भारतीय बाजार में बेहतर पहुंच मिलेगी।
इसके साथ ही यूरोपीय कंपनियों के लिए भारत में निवेश करना आसान होगा, जिससे भारत में तकनीक हस्तांतरण, रोजगार सृजन और औद्योगिक विकास को बढ़ावा मिलेगा।
संवेदनशील मुद्दों पर बनी संतुलित सहमति
FTA वार्ता के दौरान कई संवेदनशील और जटिल मुद्दे सामने आए। भारत ने कृषि और वस्त्र उत्पादों के लिए बेहतर बाजार पहुंच की मांग की, जबकि यूरोपीय संघ ने अपने किसानों और घरेलू उद्योगों की सुरक्षा पर जोर दिया।
इसके अलावा डेटा सुरक्षा, पर्यावरणीय मानक, श्रमिक अधिकार, निवेश संरक्षण और नियामक सहयोग जैसे मुद्दों पर भी लंबी चर्चा हुई। कई दौर की बातचीत और समझौतों के बाद दोनों पक्ष एक संतुलित समाधान पर सहमत हुए।
सुरक्षा और रक्षा साझेदारी भी होगी मजबूत
सूत्रों के अनुसार, 27 जनवरी को होने वाले शिखर सम्मेलन में भारत और यूरोपीय संघ के बीच सुरक्षा और रक्षा साझेदारी समझौते पर भी हस्ताक्षर हो सकते हैं। यह साझेदारी रक्षा खरीद, रक्षा उद्योग सहयोग और रणनीतिक संवाद को नई दिशा देगी।
EU भारत के रक्षा उद्योग के साथ मिलकर संयुक्त उत्पादन और तकनीकी सहयोग की संभावनाएं भी तलाश रहा है, जिससे भारत की ‘मेक इन इंडिया’ पहल को मजबूती मिलेगी।
गणतंत्र दिवस परेड में EU की ऐतिहासिक मौजूदगी
भारत–EU संबंधों की मजबूती का प्रतीक यह भी है कि 26 जनवरी की गणतंत्र दिवस परेड में पहली बार यूरोपीय संघ का एक सैन्य दस्ता हिस्सा लेगा।
इस अवसर पर यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन 25 से 27 जनवरी तक भारत दौरे पर रहेंगी और गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगी।
हस्ताक्षर बाद में, घोषणा अभी
हालांकि 27 जनवरी को FTA पर बातचीत पूरी होने की घोषणा की जाएगी, लेकिन इस पर औपचारिक हस्ताक्षर कुछ महीनों बाद होंगे। इसके लिए कानूनी प्रक्रियाएं पूरी करना और यूरोपीय संसद से मंजूरी लेना आवश्यक होगा।
शिखर सम्मेलन के बाद भारत–EU बिजनेस फोरम का भी आयोजन किया जाएगा, जिसमें व्यापारिक समुदाय के साथ भविष्य की रणनीति पर चर्चा होगी। इसके साथ ही एक संयुक्त बयान और संयुक्त रणनीतिक एजेंडा भी जारी किया जाएगा।
‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ क्यों कहा जा रहा है?
केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल पहले ही इस समझौते को ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ करार दे चुके हैं। उनका कहना है कि यह समझौता अब तक के सभी व्यापार समझौतों से अधिक व्यापक और प्रभावशाली होगा।
आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार, यह FTA भारत को वैश्विक सप्लाई चेन का अहम हिस्सा बनाएगा, विदेशी निवेश बढ़ाएगा और भारत की आर्थिक कूटनीति को नई मजबूती देगा।
फाइल फोटो: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (बाएं) और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन (दाएं)
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