नई दिल्ली, बिजनेस डेस्क | वेब वार्ता
-ट्रेड डील से पहले EU का बड़ा झटका, भारतीय सामानों पर 20% तक बढ़ा टैरिफ
India EU Trade Deal: भारत और यूरोपीय यूनियन (EU) के बीच प्रस्तावित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) से पहले भारतीय निर्यातकों को बड़ा झटका लगा है। EU ने भारत के कई उत्पादों पर दी जा रही एक्सपोर्ट टैरिफ छूट वापस ले ली है, जिससे यूरोप जाने वाले अधिकांश भारतीय सामानों पर 20 प्रतिशत तक अतिरिक्त शुल्क लगने की आशंका है।
GSP छूट वापस, 1 जनवरी से लागू
विशेषज्ञों के अनुसार, यूरोपीय यूनियन ने जनरलाइज्ड सिस्टम ऑफ प्रेफरेंसेज (GSP) के तहत भारत को दी जा रही टैरिफ छूट को 1 जनवरी से वापस ले लिया है। इसके चलते EU को होने वाले अधिकांश भारतीय निर्यात अब पूरे MFN (Most Favoured Nation) ड्यूटी रेट पर प्रवेश करेंगे, जिससे लागत में सीधा इजाफा होगा।
FTA से मिलेगी राहत, लेकिन इंतजार लंबा
राहत की बात यह है कि भारत और EU के बीच प्रस्तावित FTA लागू होते ही GSP की जगह ले लेगा। हालांकि, चिंता यह है कि FTA के लाभ मिलने में कई महीने लग सकते हैं, जबकि GSP विड्रॉल का आदेश पहले ही 25 सितंबर को जारी किया जा चुका था।
EU ने इस साल 1 जनवरी से भारत से होने वाले लगभग 87 प्रतिशत आयात पर GSP टैरिफ प्रेफरेंस खत्म कर दी है। इसका मतलब है कि अब अधिकांश भारतीय उत्पादों को यूरोपीय बाजार में प्रवेश के लिए पूरी MFN ड्यूटी चुकानी होगी।
भारतीय निर्यातकों की प्रतिस्पर्धा घटी
फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशंस (FIEO) के CEO और डायरेक्टर जनरल अजय सहाय ने कहा कि GSP हटने से भारतीय उत्पाद अब बांग्लादेश और वियतनाम जैसे देशों के मुकाबले कम प्रतिस्पर्धी हो गए हैं।
उन्होंने बताया कि इसका सबसे ज्यादा असर इंडस्ट्रियल एक्सपोर्ट पर पड़ा है, जिसमें निम्न सेक्टर शामिल हैं:
- मिनरल्स और केमिकल्स
- प्लास्टिक उत्पाद
- लोहा और स्टील
- मशीनरी और इलेक्ट्रिकल उपकरण
ये सभी सेक्टर EU को भारत के कुल शिपमेंट का बड़ा हिस्सा हैं और अब पूरी तरह MFN टैरिफ के दायरे में आ चुके हैं।
GSP क्या है और क्यों हटाई जाती है?
GSP एक ऐसी स्कीम है, जिसके तहत विकसित देश विकासशील देशों के चुनिंदा उत्पादों पर कम या शून्य टैरिफ लगाते हैं, ताकि उनके निर्यात को बढ़ावा मिल सके। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अनुसार, EU वर्ष 2016 से ही चरणबद्ध तरीके से भारतीय उत्पादों को GSP लाभ से बाहर करता आ रहा है।
वर्तमान स्थिति यह है कि अब इस स्कीम के तहत केवल 13 प्रतिशत भारतीय निर्यात को ही लाभ मिल रहा है, जिसमें मुख्य रूप से कृषि उत्पाद और लेदर शामिल हैं।
निर्यात आंकड़े क्या कहते हैं?
वित्त वर्ष 2025 के आंकड़ों के मुताबिक, भारत से EU को भेजे जाने वाले लगभग 47 प्रतिशत निर्यात (35.6 अरब डॉलर) अभी भी किसी न किसी रूप में GSP के दायरे में आते हैं, जबकि 53 प्रतिशत निर्यात (40.2 अरब डॉलर) पहले ही इससे बाहर हो चुका है।
हालिया GSP समीक्षा में EU ने इंडोनेशिया और केन्या के कुछ उत्पादों को भी इस स्कीम से बाहर कर दिया है। किसी उत्पाद को तब GSP से हटाया जाता है, जब वह EU बाजार में पर्याप्त प्रतिस्पर्धी हो जाता है और उसे विशेष छूट की आवश्यकता नहीं रहती।
कुल मिलाकर, EU का यह फैसला अल्पकाल में भारतीय निर्यातकों के लिए चुनौतीपूर्ण जरूर है, लेकिन यदि FTA समय पर लागू होता है, तो इससे व्यापार को नई रफ्तार मिलने की उम्मीद भी बनी हुई है।
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