दावोस, अंतर्राष्ट्रीय डेस्क | वेब वार्ता
केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने 20 जनवरी 2026 को दावोस में आयोजित विश्व आर्थिक मंच (WEF) की एक उच्चस्तरीय पैनल चर्चा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के प्रति भारत के दृष्टिकोण को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत किया। “एआई पावर प्ले: नो रेफरीज” शीर्षक वाली इस चर्चा में उन्होंने कहा कि एआई की वास्तविक शक्ति मॉडल के आकार से नहीं, बल्कि उसकी तैनाती और आर्थिक व्यवहार्यता से आती है।
भारत एआई विकसित देशों के अग्रणी समूह में
वैश्विक एआई गठबंधनों और भू-राजनीति से जुड़े एक प्रश्न के उत्तर में श्री वैष्णव ने कहा कि भारत स्पष्ट रूप से एआई विकसित देशों के पहले समूह में शामिल है। उन्होंने बताया कि एआई के ढांचे में पांच स्तर होते हैं — एप्लिकेशन, मॉडल, चिप, अवसंरचना और ऊर्जा — और भारत इन सभी क्षेत्रों में सक्रिय रूप से काम कर रहा है। उन्होंने कहा, “एप्लिकेशन स्तर पर भारत संभवतः विश्व को सेवाएं देने वाला सबसे बड़ा देश होगा।”
छोटे मॉडलों से बड़े परिणाम संभव
श्री वैष्णव ने कहा कि एआई में निवेश पर लाभ (ROI) केवल बड़े मॉडल बनाने से नहीं, बल्कि उद्यम स्तर पर तैनाती और उत्पादकता में वृद्धि से प्राप्त होता है। उन्होंने बताया कि लगभग 95 प्रतिशत एआई उपयोग मामलों को 20 से 50 बिलियन पैरामीटर वाले मॉडल से हल किया जा सकता है, और भारत के पास ऐसे कई मॉडल पहले से विद्यमान हैं जो विभिन्न क्षेत्रों में सफलतापूर्वक तैनात हैं।
- भारत एआई के पांचों स्तरों—एप्लिकेशन, मॉडल, चिप, अवसंरचना और ऊर्जा—पर कार्यरत है।
- 95% उपयोग मामलों को मध्यम आकार के मॉडलों से हल किया जा सकता है।
- एआई की शक्ति तैनाती और उत्पादकता में निहित है, न कि केवल बड़े मॉडलों में।
एआई भू-राजनीति में आर्थिक संतुलन का महत्व
उन्होंने एआई और भू-राजनीति के संबंध पर कहा कि बहुत बड़े एआई मॉडल के स्वामित्व को भू-राजनीतिक शक्ति के बराबर समझना खतरनाक है। उन्होंने कहा, “ऐसे मॉडल बंद किए जा सकते हैं और डेवलपर्स के लिए आर्थिक संकट भी पैदा कर सकते हैं।” श्री वैष्णव ने कहा कि “पांचवीं औद्योगिक क्रांति” की अर्थव्यवस्था निवेश पर अधिकतम रिटर्न पाने के लिए कम लागत वाले समाधानों पर आधारित होगी।
भारत की डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना: एआई का मजबूत आधार
श्री वैष्णव ने कहा कि भारत की डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI) की सफलता इस बात का प्रमाण है कि देश जीवन और अर्थव्यवस्था के हर क्षेत्र में एआई के प्रसार को प्रणालीगत तरीके से आगे बढ़ा रहा है। उन्होंने बताया कि भारत ने पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल के तहत लगभग 38,000 GPU को एक साझा राष्ट्रीय कंप्यूटिंग सुविधा के रूप में सूचीबद्ध किया है। यह सुविधा सरकार द्वारा समर्थित और सब्सिडी युक्त है, जो छात्रों, शोधकर्ताओं और स्टार्टअप्स को वैश्विक लागत के लगभग एक-तिहाई पर उपलब्ध कराई जा रही है।
तकनीकी-कानूनी नियमन की आवश्यकता
श्री वैष्णव ने कहा कि एआई के नियमन के लिए केवल कानूनी ढांचा पर्याप्त नहीं है, बल्कि इसमें तकनीकी उपकरणों का भी समावेश जरूरी है जो पूर्वाग्रह और डीपफेक जैसी चुनौतियों को कम कर सकें। उन्होंने कहा, “डीपफेक पहचान प्रणाली इतनी सटीक होनी चाहिए कि न्यायालयों में उनके परिणाम प्रमाणिक रूप से स्वीकार्य हों।” उन्होंने बताया कि भारत डीपफेक पहचान, पूर्वाग्रह कम करने और मॉडलों के उचित अनलर्निंग की दिशा में तकनीकें विकसित कर रहा है।
निष्कर्ष: एआई की शक्ति बुद्धिमान तैनाती में निहित
अश्विनी वैष्णव ने कहा कि एआई की शक्ति मॉडल के आकार में नहीं, बल्कि उसकी उपयोगिता, पहुंच और आर्थिक व्यवहार्यता में है। भारत एआई की दुनिया में तकनीकी नवाचार और मानव-केंद्रित विकास का उदाहरण बनकर उभर रहा है। पैनल चर्चा का संचालन इयान ब्रेमर (अध्यक्ष, यूरेशिया ग्रुप) ने किया, जिसमें ब्रैड स्मिथ (उपाध्यक्ष, माइक्रोसॉफ्ट), क्रिस्टालिना जॉर्जीवा (प्रबंध निदेशक, IMF) और खालिद अल-फलीह (निवेश मंत्री, सऊदी अरब) भी शामिल थे।
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