कांग्रेस की बड़ी कार्रवाई: सीनियर नेता राजीव गौड़ा पार्टी से निलंबित, महिला अधिकारी से अभद्रता पड़ी भारी

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कर्नाटक | वेब वार्ता 

कर्नाटक में कांग्रेस पार्टी ने बड़ा अनुशासनात्मक कदम उठाते हुए अपने वरिष्ठ नेता राजीव गौड़ा को पार्टी से निलंबित कर दिया है। उन पर शिदलाघट्टा नगर आयुक्त अमृता गौड़ा के साथ फोन पर अभद्र भाषा का प्रयोग और धमकी देने का गंभीर आरोप है। यह मामला 14 जनवरी 2026 को सामने आया था, जब नगर आयुक्त ने उनके खिलाफ थाने में शिकायत दर्ज कराई थी।

कांग्रेस अनुशासन समिति की बड़ी कार्रवाई

कांग्रेस राज्य अनुशासन समिति के अध्यक्ष के. रहमान खान द्वारा जारी आदेश में कहा गया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए राजीव गौड़ा को पार्टी से तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। समिति ने बताया कि घटना के 10 दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस आरोपी नेता का पता नहीं लगा पाई है।

KPCC ने की थी निलंबन की सिफारिश

कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी (KPCC) ने 21 जनवरी को अनुशासन समिति को भेजे पत्र में सिफारिश की थी कि राजीव गौड़ा को तत्काल निलंबित किया जाए। यह मामला सामने आने के बाद कांग्रेस पार्टी को राष्ट्रीय स्तर पर आलोचना का सामना करना पड़ा। यहां तक कि उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने भी कहा था कि “यदि कांग्रेस का कोई नेता इस प्रकार का कार्य करता है, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।”

डीके शिवकुमार के करीबी बताए जाते हैं राजीव गौड़ा

राजीव गौड़ा ने पिछले विधानसभा चुनावों में सिदलाघट्टा सीट से कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा था। वे खाद्य मंत्री के.एच. मुनियप्पा और उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के करीबी माने जाते हैं। 15 जनवरी को पार्टी की अनुशासन समिति ने उन्हें नोटिस जारी किया था, लेकिन उन्होंने अब तक उसका कोई जवाब नहीं दिया है।

मीडिया में वायरल हुए विवादित बयान

प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष (प्रशासन) जी.सी. चंद्रशेखर ने अनुशासन समिति को भेजे पत्र में कहा कि राजीव गौड़ा द्वारा दिए गए विवादित बयान मीडिया में व्यापक रूप से प्रसारित हुए हैं, जिससे पार्टी की छवि को गंभीर क्षति पहुंची है। इस पर केपीसीसी अध्यक्ष ने गंभीर संज्ञान लेते हुए निलंबन की अनुशंसा की।

हाई कोर्ट ने भी फटकार लगाई

इस बीच कर्नाटक हाई कोर्ट ने भी मंगलवार को मामले की सुनवाई के दौरान राजीव गौड़ा को कड़ी फटकार लगाई। न्यायमूर्ति एम. नागप्रसन्ना की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि “क्या याचिकाकर्ता को महिलाओं के प्रति कोई सम्मान नहीं है? इस तरह की भाषा किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।” अदालत ने यह भी कहा कि “एक बार बोले गए शब्द वापस नहीं लिए जा सकते — अनियंत्रित जुबान सब कुछ बर्बाद कर सकती है।”

अब तक फरार हैं कांग्रेस नेता

अदालत में दाखिल याचिका उनके वकील के माध्यम से दायर की गई थी। फिलहाल राजीव गौड़ा फरार बताए जा रहे हैं। हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से सवाल किया है कि अब तक उनके खिलाफ गंभीर आरोप क्यों नहीं लगाए गए और गिरफ्तारी क्यों नहीं की गई।

राजीव गौड़ा का यह विवाद कांग्रेस पार्टी के लिए एक बड़ी राजनीतिक चुनौती बन गया है, खासकर तब जब पार्टी महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान को लेकर संवेदनशील रुख का दावा करती है।

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