रामपुर, उत्तर प्रदेश डेस्क | वेब वार्ता
रामपुर में राजनीतिक हलचल मच गई है, जहां समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव आजम खां, उनकी पत्नी पूर्व सांसद डॉ. तजीन फात्मा और छोटे बेटे पूर्व विधायक अब्दुल्ला आजम के मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट से खुद को अलग करने की खबरें सामने आईं। यह ट्रस्ट आजम खां का ड्रीम प्रोजेक्ट है, जो जौहर यूनिवर्सिटी और रामपुर पब्लिक स्कूलों का संचालन करता है।
खबरों के मुताबिक, आजम खां, तजीन फात्मा और अब्दुल्ला आजम ने ट्रस्ट के पदों से इस्तीफा दे दिया है, जबकि उनकी बहन निकहत अफलाक को नई अध्यक्ष और बड़े बेटे अदीब आजम को सचिव बनाया गया है। हालांकि, जौहर यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. जहीरउद्दीन ने इन खबरों को पूरी तरह भ्रामक करार दिया है और स्पष्ट किया कि आजम खां अभी भी ट्रस्ट के अध्यक्ष बने हुए हैं तथा कोई परिवर्तन नहीं हुआ है।
ट्रस्ट से अलगाव की खबरें और रामपुर में हलचल
कुछ मीडिया रिपोर्ट्स और सूत्रों के अनुसार, आजम खां परिवार ने ट्रस्ट से अलग होने का फैसला लिया है। दावा किया गया कि आजम खां, उनकी पत्नी डॉ. तजीन फात्मा और बेटे अब्दुल्ला आजम ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया। नई कार्यकारिणी में आजम की बहन निकहत अफलाक को अध्यक्ष, बड़े बेटे मोहम्मद अदीब आजम को सचिव, मुश्ताक अहमद सिद्दीकी को उपाध्यक्ष, सपा विधायक नसीर अहमद खान को संयुक्त सचिव और जावेद उर रहमान खान को कोषाध्यक्ष बनाया गया बताया जा रहा है।
यह फैसला कानूनी चुनौतियों और ट्रस्ट पर चल रहे 30 से अधिक मामलों के बीच लिया गया माना जा रहा है, ताकि संस्थान का सुचारू संचालन सुनिश्चित हो सके। ट्रस्ट में पहले आजम खां अध्यक्ष, तजीन फात्मा सचिव और दोनों बेटे अदीब व अब्दुल्ला सदस्य थे।
आजम खां इन दिनों कई मामलों में जेल में बंद हैं, जबकि परिवार के अन्य सदस्यों पर भी विभिन्न मुकदमे चल रहे हैं, जिससे ट्रस्ट के संचालन में कठिनाइयाँ उत्पन्न हो रही थीं।
वीसी प्रो. जहीरउद्दीन का स्पष्ट बयान
जौहर यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. जहीरउद्दीन ने इन खबरों पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि आजम खां अभी भी ट्रस्ट के अध्यक्ष हैं और कोई भी परिवर्तन नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि जो जानकारी फैलाई जा रही है, वह भ्रामक और तथ्यहीन है।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने ऐसी अफवाहों को साजिश करार दिया है और स्पष्ट किया कि ट्रस्ट की स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है। प्रो. जहीरउद्दीन ने कहा कि ट्रस्ट के अध्यक्ष के रूप में आजम खां का हस्ताक्षरित कोई इस्तीफा न तो विश्वविद्यालय को प्राप्त हुआ है, न ही किसी बैठक में इसे मंजूरी दी गई है।
- जौहर ट्रस्ट आजम खां का ड्रीम प्रोजेक्ट है, जो जौहर यूनिवर्सिटी और रामपुर पब्लिक स्कूलों का संचालन करता है।
- ट्रस्ट पर 30 से अधिक मुकदमे चल रहे हैं, जिनमें भूमि विवाद प्रमुख हैं।
- आजम खां और उनके परिवार पर कानूनी कार्रवाइयों के कारण ट्रस्ट का संचालन प्रभावित हुआ है।
- कुलपति ने अफवाहों को खारिज करते हुए आजम खां को अध्यक्ष बताया है।
पृष्ठभूमि: ट्रस्ट पर कानूनी विवाद
मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट पर लंबे समय से विवाद चल रहा है। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने ट्रस्ट की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा भूमि लीज रद्द करने के फैसले को चुनौती दी गई थी। सरकार ने आरोप लगाया था कि आजम खां ने मंत्री रहते हुए पद का दुरुपयोग कर सरकारी भूमि पर कब्जा किया था।
इन मामलों के कारण ट्रस्ट की संपत्ति, संचालन और कानूनी स्थिति पर लगातार सवाल उठते रहे हैं।
निष्कर्ष: अफवाहें या रणनीतिक कदम?
आजम खां परिवार के ट्रस्ट से अलगाव की खबरों ने रामपुर की सियासत में नई बहस छेड़ दी है। एक ओर मीडिया रिपोर्ट्स इस्तीफे की पुष्टि कर रही हैं, वहीं विश्वविद्यालय प्रशासन ने इसे पूरी तरह खारिज कर दिया है।
यह स्थिति ट्रस्ट के संचालन और जौहर यूनिवर्सिटी के भविष्य पर असर डाल सकती है। फिलहाल स्थिति अस्पष्ट है, लेकिन कुलपति के बयान से यह स्पष्ट होता है कि कोई आधिकारिक बदलाव नहीं हुआ है। आगामी घटनाक्रम इस विवाद को और स्पष्ट करेगा।
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