सिद्धार्थनगर, संदीप पाण्डेय | वेब वार्ता
सिद्धार्थनगर। जनपद के बढ़नी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) से एक बार फिर स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। आरोप है कि केंद्र पर तैनात चिकित्सक डॉ. प्रदीप वर्मा मरीजों को सरकारी अस्पताल में उपलब्ध दवाएं देने के बजाय बाहर की दवाएं लिख रहे हैं, जिससे मरीजों को मजबूरन निजी मेडिकल स्टोर से दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं।
सरकारी अस्पताल में मरीजों की मजबूरी
स्थानीय मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि सरकारी अस्पताल में आने के बावजूद उन्हें निजी दुकानों से दवा खरीदने के लिए कहा जा रहा है। मरीजों का कहना है कि जब सरकार ने ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों पर मुफ्त दवा वितरण की सुविधा शुरू की है, तब भी डॉक्टरों द्वारा बाहर की दवाएं लिखना नीतियों का उल्लंघन है।
स्थानीय लोगों में आक्रोश
ग्रामीणों ने बताया कि यह पहला मामला नहीं है। पीएचसी बढ़नी और डॉ. प्रदीप वर्मा को लेकर इससे पहले भी कई विवाद सामने आ चुके हैं। लोगों का कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद न तो कार्रवाई हुई और न ही मरीजों को राहत मिली। उनका आरोप है कि सरकारी संसाधनों के बावजूद मरीजों को निजी खर्च उठाने पड़ रहे हैं।
- डॉक्टर पर बाहर की दवाएं लिखने का आरोप।
- सरकारी अस्पताल में दवा न मिलने से मरीज परेशान।
- स्थानीय लोगों ने स्वास्थ्य विभाग से जांच की मांग की।
स्वास्थ्य विभाग की निगरानी पर सवाल
लगातार मिल रही शिकायतों के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। आम लोगों का कहना है कि विभागीय अधिकारी पीएचसी की नियमित जांच नहीं करते, जिससे इस तरह की अनियमितताएं बढ़ती जा रही हैं। विभागीय सूत्रों के मुताबिक, बढ़नी केंद्र की शिकायत उच्चाधिकारियों तक पहुंच चुकी है और जल्द ही जांच कर कार्रवाई की जा सकती है।
निष्कर्ष: मरीजों की सेहत पर असर
सरकारी अस्पतालों का उद्देश्य ग्रामीणों को मुफ्त और सुलभ स्वास्थ्य सुविधाएं देना है। यदि इन केंद्रों पर ही मरीजों को बाहर की दवाएं खरीदनी पड़ें, तो यह न केवल सरकारी योजनाओं की विफलता है, बल्कि जनविश्वास पर भी आघात है। अब देखना यह होगा कि स्वास्थ्य विभाग इस मामले में क्या कदम उठाता है और कब तक मरीजों को उनके अधिकार की दवाएं मिलती हैं।
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