नई दिल्ली, बिजनेस डेस्क | वेब वार्ता
देश और दुनिया में सोने और चांदी की कीमतें लगातार नए रिकॉर्ड बना रही हैं। मौजूदा हालात में 10 ग्राम सोना डेढ़ लाख रुपये के पार पहुंच गया है, जबकि चांदी तीन लाख रुपये प्रति किलो से भी ऊपर निकल चुकी है। ऐसे में आम निवेशकों से लेकर ज्वेलरी खरीदने वाले परिवारों तक के मन में एक ही सवाल है—क्या यह खरीदारी का सही वक्त है या अभी इंतजार करना चाहिए?
सोना और चांदी ने तोड़े सारे पुराने रिकॉर्ड
ताजा आंकड़ों के मुताबिक, सोना 1,53,831 रुपये प्रति 10 ग्राम के ऑल टाइम हाई पर पहुंच चुका है। वहीं चांदी का भाव 3,26,487 रुपये प्रति किलो तक दर्ज किया गया है। यानी चांदी अब औपचारिक रूप से तीन लाख रुपये किलो के पार निकल चुकी है, जो भारतीय बाजार के लिए ऐतिहासिक स्तर माना जा रहा है।
एक साल में 80% तक का रिटर्न, निवेशक हैरान
अगर रिटर्न की बात करें तो सोना और चांदी दोनों ने निवेशकों को चौंका दिया है। आंकड़े बताते हैं कि जिसने ठीक एक साल पहले 10 ग्राम सोना खरीदा था, उसे आज करीब 80 प्रतिशत तक का मुनाफा मिल चुका है। तुलना करें तो बैंक एफडी में पैसा डबल होने में 7 से 8 साल लग जाते हैं, जबकि कीमती धातुओं ने यह कमाल महज एक साल में कर दिखाया है।
कीमतों में तेजी के पीछे क्या हैं बड़े कारण?
सोने-चांदी की इस बेतहाशा तेजी के पीछे कई अंतरराष्ट्रीय और आर्थिक कारण जिम्मेदार माने जा रहे हैं। सबसे अहम वजह है भू-राजनीतिक तनाव, खासकर ग्रीनलैंड संकट और उससे जुड़ी वैश्विक अनिश्चितता। जब भी युद्ध या बड़े टकराव की आशंका बढ़ती है, निवेशक शेयर बाजार जैसे जोखिम वाले विकल्पों से पैसा निकालकर सोने जैसे सुरक्षित निवेश की ओर रुख करते हैं।
इसके अलावा अमेरिकी डॉलर की कमजोरी और जापान के सरकारी बॉन्ड्स में गिरावट ने भी सोने की कीमतों को मजबूती दी है। अमेरिका और यूरोप के बीच टैक्स विवाद और संभावित ट्रेड वॉर की आशंकाओं ने भी बाजार में डर का माहौल बनाया है, जिससे सेफ हेवन डिमांड लगातार बनी हुई है।
चांदी की रफ्तार सोने से भी तेज क्यों?
चांदी की तेजी के पीछे केवल निवेश मांग ही नहीं, बल्कि इंडस्ट्रियल डिमांड भी बड़ी वजह है। सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स और एआई सर्वर जैसे आधुनिक सेक्टरों में चांदी की भारी खपत होती है। मांग लगातार बढ़ रही है, जबकि सप्लाई सीमित है। इसी असंतुलन ने चांदी के भाव को रॉकेट की रफ्तार दे दी है।
आगे कहां तक जा सकती हैं कीमतें?
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक तनाव और आर्थिक अनिश्चितता बनी रहती है, तो सोने-चांदी की यह तेजी कुछ समय और जारी रह सकती है। बाजार में यह चर्चा भी जोरों पर है कि चांदी 3.5 से 4 लाख रुपये प्रति किलो तक जा सकती है, जबकि सोना भी और ऊंचे स्तर छू सकता है।
हालांकि विशेषज्ञ यह भी चेतावनी दे रहे हैं कि यदि हालात सुधरते हैं या ब्याज दरों में बदलाव होता है, तो कीमतों में तेज करेक्शन यानी गिरावट भी देखने को मिल सकती है।
खरीदें या अभी इंतजार करें?
निवेशकों और आम खरीदारों के लिए यही सबसे बड़ा सवाल है। एक्सपर्ट्स की सलाह है कि जिन परिवारों को शादी-ब्याह या किसी जरूरी जरूरत के लिए सोना-चांदी खरीदनी है, वे चरणबद्ध तरीके से खरीदारी करें। वहीं निवेश के लिहाज से एक साथ बड़ी रकम लगाने के बजाय धीरे-धीरे और सोच-समझकर निवेश करना ज्यादा सुरक्षित माना जा रहा है।
- सोना: 1.53 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर
- चांदी: 3.26 लाख रुपये प्रति किलो के पार
- एक साल में निवेशकों को 80% तक का रिटर्न
- भू-राजनीतिक तनाव और डॉलर कमजोरी से तेजी
- एकमुश्त निवेश से बचने की सलाह
कुल मिलाकर, सोना और चांदी इस समय तेज उतार-चढ़ाव वाले दौर में हैं। ऐसे में जल्दबाजी की बजाय संतुलित और रणनीतिक फैसले ही निवेशकों के लिए सबसे बेहतर रास्ता माने जा रहे हैं।
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